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Panipat News: स्कूल और शिक्षण संस्थान के नजदीक से उठाए जाएं शराब के ठेके
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Tue, 26 May 2026 02:58 AM IST
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पानीपत। स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के नजदीक संचालित शराब के ठेकों को हटाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि सरकार को स्कूलों के आसपास शराब के ठेकों के लिए निर्धारित 200 मीटर की दूरी का दायरा और बढ़ाना चाहिए। उनका आरोप है कि कई बार अधिकारी अपने स्तर पर नियमों में छूट दे देते हैं, जिसका फायदा ठेकेदार उठाते हैं। इससे विद्यार्थियों, खासकर छात्राओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
किसान भवन में सोमवार को आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में किसानों और ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी। पालेराम, राम किशन, राम मेहर, सतबीर सिंह, बनी सिंह, सुरेश सिंह, अजीत नरवाल और बिशन सिंह ने कहा कि स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों के पास शराब के ठेके संचालित कर युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को रोजाना इन ठेकों के सामने से होकर स्कूल आना-जाना पड़ता है, जिससे छात्राएं असुरक्षित महसूस करती हैं। कई स्थानों पर नशेड़ियों के जमावड़े के कारण माहौल और भी खराब हो जाता है।
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किसान जयवीर ने कहा कि केवल गांव ही नहीं, शहर में भी कई स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के पास शराब के ठेके संचालित हो रहे हैं। यह प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसे ठेकों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
किसान कर्ण सिंह ने बताया कि स्कूलों के पास बने शराब के ठेकों के बाहर अक्सर नशेड़ियों की भीड़ लगी रहती है। ऐसे माहौल में वहां से गुजरने वाले विद्यार्थी स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व बढ़ाने के लिए संबंधित विभाग कई बार नियमों में ढील दे देता है, जबकि कुछ मामलों में ठेकेदार स्वयं भी नियमों का उल्लंघन करते हैं। किसानों का दावा है कि शहर और गांवों में करीब एक दर्जन स्थानों पर स्कूलों के नजदीक शराब के ठेके संचालित हो रहे हैं।
किसान भवन में सोमवार को आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में किसानों और ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी। पालेराम, राम किशन, राम मेहर, सतबीर सिंह, बनी सिंह, सुरेश सिंह, अजीत नरवाल और बिशन सिंह ने कहा कि स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों के पास शराब के ठेके संचालित कर युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को रोजाना इन ठेकों के सामने से होकर स्कूल आना-जाना पड़ता है, जिससे छात्राएं असुरक्षित महसूस करती हैं। कई स्थानों पर नशेड़ियों के जमावड़े के कारण माहौल और भी खराब हो जाता है।
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किसान जयवीर ने कहा कि केवल गांव ही नहीं, शहर में भी कई स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के पास शराब के ठेके संचालित हो रहे हैं। यह प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसे ठेकों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
किसान कर्ण सिंह ने बताया कि स्कूलों के पास बने शराब के ठेकों के बाहर अक्सर नशेड़ियों की भीड़ लगी रहती है। ऐसे माहौल में वहां से गुजरने वाले विद्यार्थी स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व बढ़ाने के लिए संबंधित विभाग कई बार नियमों में ढील दे देता है, जबकि कुछ मामलों में ठेकेदार स्वयं भी नियमों का उल्लंघन करते हैं। किसानों का दावा है कि शहर और गांवों में करीब एक दर्जन स्थानों पर स्कूलों के नजदीक शराब के ठेके संचालित हो रहे हैं।