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Karnal News: इंद्री में फायर ब्रिगेड सेवा खुद संकट में
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 26 May 2026 02:30 AM IST
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इंद्री स्थित अग्निशमन उप केंद्र का कार्यालय । संवाद
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इंद्री। अग्निशमन उप-केंद्र इंद्री की फायर ब्रिगेड सेवा खुद एक गंभीर संकट से गुजर रही है। जिले के 144 गांवों की आपातकालीन सुरक्षा तक पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि अग्निशमन केंद्र के पास फिलहाल केवल एक ही कार्यशील फायर टेंडर मशीन उपलब्ध है। अगर एक ही समय पर दो स्थानों पर आग लग जाती है तो अग्निशमन कर्मचारी भारी परेशानी में पड़ जाते हैं और बाहर से गाड़ियां मंगवानी पड़ती हैं।
उप-केंद्र इंद्री के अधिकारी गजे सिंह ने बताया कि फायर स्टेशन की एकमात्र गाड़ी पिछले पांच दिनों से खराब पड़ी है और उसे ठीक करवाने के लिए एजेंसी भेजा गया है। खराब गाड़ी के कारण दूसरे केंद्रों से गाड़ी उधार लेकर चलानी पड़ रही है जो पर्याप्त नहीं है। साथ ही अन्य उप-केंद्रों से आवश्यक सहयोग मांगा जा रहा है। हालांकि अभी तक स्थायी समाधान के लिए अतिरिक्त गाड़ियों की मांग पर स्पष्ट समय-सीमा नहीं दी गई है। उपकेंद्र में 16 अग्निशमन कर्मचारी कार्यरत हैं। बावजूद इसके फायर ब्रिगेड के पास एक ही चालू गाड़ी होने के कारण दो जगह एक साथ आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड का संचालन प्रभावित होता है।
पानी भरने की व्यवस्था भी ठप-
इंद्री फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में पानी भरने का भी ठोस इंतजाम नहीं है। फायर स्टेशन के पास बने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के ट्यूबवेल पर लगा हाईड्रेंट कुछ असामाजिक तत्वों ने हाल ही में तोड़ दिया था। इसके बाद से अग्निशमन कर्मियों को रोजमर्रा में ही गाड़ियों के लिए पानी जुटाने में दिक्कतें आ रही हैं। कर्मचारी कभी मार्केट कमेटी कार्यालय के टैंकों से और कभी पीएचई कार्यालय के पास के टैंकों से पानी भर कर आग बुझाने का काम कर रहे हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में न तो गाड़ी उपलब्ध रहती है और न ही पानी।
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शहरवाशी बोले- कम से कम हों दो फायर टेंडर
शहरवासी रजत, खुशनीत, राहुल, अमित, राजेश, विनय, का कहना है कि इंद्री अग्निशमन उप-केन्द्र में कम से कम दो-तीन फायर टेंडर होने चाहिए। लोगों ने प्रशासन से शीघ्र अतिरिक्त गाड़ियां देने, टूटी गाड़ियों की मरम्मत में तेजी लाने और फायर स्टेशन के पास पानी की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे की स्थिति में जिंदगियों और संपत्ति का भारी नुकसान हो सकता है।
- फायर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण एवं शहरी मिश्रित इलाके वाले उप-केंद्रों में कम से कम 2-3 फायर टेंडर और पानी की स्वतंत्र आपूर्ति के स्रोत अनिवार्य होने चाहिए। इसके साथ ही नियमित रखरखाव, फायर-हाइड्रेंट की सुरक्षा व आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना तैयार रखने की जरूरत है।
उप-केंद्र इंद्री के अधिकारी गजे सिंह ने बताया कि फायर स्टेशन की एकमात्र गाड़ी पिछले पांच दिनों से खराब पड़ी है और उसे ठीक करवाने के लिए एजेंसी भेजा गया है। खराब गाड़ी के कारण दूसरे केंद्रों से गाड़ी उधार लेकर चलानी पड़ रही है जो पर्याप्त नहीं है। साथ ही अन्य उप-केंद्रों से आवश्यक सहयोग मांगा जा रहा है। हालांकि अभी तक स्थायी समाधान के लिए अतिरिक्त गाड़ियों की मांग पर स्पष्ट समय-सीमा नहीं दी गई है। उपकेंद्र में 16 अग्निशमन कर्मचारी कार्यरत हैं। बावजूद इसके फायर ब्रिगेड के पास एक ही चालू गाड़ी होने के कारण दो जगह एक साथ आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड का संचालन प्रभावित होता है।
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पानी भरने की व्यवस्था भी ठप-
इंद्री फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में पानी भरने का भी ठोस इंतजाम नहीं है। फायर स्टेशन के पास बने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के ट्यूबवेल पर लगा हाईड्रेंट कुछ असामाजिक तत्वों ने हाल ही में तोड़ दिया था। इसके बाद से अग्निशमन कर्मियों को रोजमर्रा में ही गाड़ियों के लिए पानी जुटाने में दिक्कतें आ रही हैं। कर्मचारी कभी मार्केट कमेटी कार्यालय के टैंकों से और कभी पीएचई कार्यालय के पास के टैंकों से पानी भर कर आग बुझाने का काम कर रहे हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में न तो गाड़ी उपलब्ध रहती है और न ही पानी।
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शहरवासी रजत, खुशनीत, राहुल, अमित, राजेश, विनय, का कहना है कि इंद्री अग्निशमन उप-केन्द्र में कम से कम दो-तीन फायर टेंडर होने चाहिए। लोगों ने प्रशासन से शीघ्र अतिरिक्त गाड़ियां देने, टूटी गाड़ियों की मरम्मत में तेजी लाने और फायर स्टेशन के पास पानी की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे की स्थिति में जिंदगियों और संपत्ति का भारी नुकसान हो सकता है।
- फायर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण एवं शहरी मिश्रित इलाके वाले उप-केंद्रों में कम से कम 2-3 फायर टेंडर और पानी की स्वतंत्र आपूर्ति के स्रोत अनिवार्य होने चाहिए। इसके साथ ही नियमित रखरखाव, फायर-हाइड्रेंट की सुरक्षा व आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना तैयार रखने की जरूरत है।