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पीएसीएल जमीन घोटाला: तहसीलदार विक्रम सिंगला की अग्रिम जमानत खारिज
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रायपुररानी में 17.55 एकड़ अटैच भूमि की कथित अवैध रजिस्ट्री का मामला, गिरफ्तारी की बढ़ी आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। रायपुररानी क्षेत्र में पर्ल ग्रुप (पीएसीएल) की अटैच भूमि की कथित अवैध रजिस्ट्री और बिक्री मामले में नामजद तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला को अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।
मामला रायपुररानी की 17.55 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट और जांच एजेंसियों की रोक के बावजूद रजिस्ट्री किए जाने का आरोप है। विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला, कानूनगो दीपक कुमार, पटवारी नरेंद्र कुमार डबास और जमीन मालिक सुरमुख सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच के अनुसार, पर्ल ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों की संपत्तियां निवेशकों की धनराशि लौटाने की प्रक्रिया के तहत पहले ही अटैच की जा चुकी थीं। इसके बावजूद कथित मिलीभगत से जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल को मंजूरी दी गई।
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रिकॉर्ड के मुताबिक, सुरमुख सिंह की ओर से दी गई जीपीए के आधार पर हरदीप सिंह ने दिसंबर 2025 में राजस्व रिकॉर्ड से बंदी आदेश हटाने के लिए आवेदन किया था। इसके बाद राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर जनवरी 2026 में दो रजिस्ट्रियां दर्ज की गईं, जिनके जरिए करीब 4.20 करोड़ रुपये में जमीन की बिक्री की गई।
विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया कि इस भूमि को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। जांच एजेंसी का दावा है कि मामले में भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। रायपुररानी क्षेत्र में पर्ल ग्रुप (पीएसीएल) की अटैच भूमि की कथित अवैध रजिस्ट्री और बिक्री मामले में नामजद तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला को अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।
मामला रायपुररानी की 17.55 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट और जांच एजेंसियों की रोक के बावजूद रजिस्ट्री किए जाने का आरोप है। विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला, कानूनगो दीपक कुमार, पटवारी नरेंद्र कुमार डबास और जमीन मालिक सुरमुख सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
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जांच के अनुसार, पर्ल ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों की संपत्तियां निवेशकों की धनराशि लौटाने की प्रक्रिया के तहत पहले ही अटैच की जा चुकी थीं। इसके बावजूद कथित मिलीभगत से जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल को मंजूरी दी गई।
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विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया कि इस भूमि को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। जांच एजेंसी का दावा है कि मामले में भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं।