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Barabanki News: माती पुलिस चौकी में आगजनी के 22 दोषियों को सात-सात साल की कैद
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 26 May 2026 02:06 AM IST
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बाराबंकी। देवा कोतवाली की माती पुलिस चौकी फूंकने, तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले के बहुचर्चित मामले में अदालत ने 11 साल बाद फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह ने सोमवार को 22 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष की कैद व प्रत्येक पर 61 हजार 500 रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। न्यायालय ने मामले को कानून-व्यवस्था पर सुनियोजित हमला मानते हुए कठोर टिप्पणी भी की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 31 अगस्त 2015 को हुई थी। माती पुलिस चौकी में तैनात सिपाही राजेंद्र सिंह बिष्ट ने देवा कोतवाली में तहरीर देते हुए बताया था कि 30 अगस्त 2015 को देवा थाने के हवालात में बाइक चोरी के आरोप में बंद माती निवासी सुभाष राजवंशी ने आत्महत्या कर ली थी।
सुभाष की मौत का राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से नेताओं के भड़काने पर 31 अगस्त को माती व आसपास के गांव के करीब 150 पुरुष और महिलाएं लाठी डंडों व सरिया लेकर माती चौकी पहुंच गईं। इनके हाथ में डीजल और पेट्रोल से भरी पिपिया थीं। चौकी के छप्पर में आग लगा दी गई। पुलिसकर्मियों की बाइकों में तोड़फोड़ की गई।
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वायरलेस सेट तोड़कर संचार व्यवस्था बंद कर दी गई। चौकी में बने शस्त्रागार को लूटने की कोशिश कर दरवाजे को तोड़कर जला दिया गया। सिपाही राजेंद्र ने 24 नामजद व 150 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में 24 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते उन्हें शनिवार को ही न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया था। सोमवार को 22 दोषियों को सजा सुनाई गई। मामले में आरोपी रहे ओमप्रकाश रावत व दीनबंधु की विचारण के दौरान मौत हो गई थी।
इनको मिली सजा
जरुआ मुरादाबाद गांव के रिंकू वर्मा, रेदुंआ पल्हरी के चंद्रिका रावत, सरसौंदी के धर्मेंद्र रावत, मुजफ्फरमऊ के मंत्री रावत, विनोद रावत, दुर्गेश रावत, मुरादाबाद गांव के बेंदा रावत, सरसौंदी के प्रमोद लोनिया, देशराज, सिराज, कबीर, कन्हैया रावत, कमलेश वर्मा, सर्वेश कुमार, रेंदुआ पल्हरी के ही कमलेश रावत व सोनेलाल, जरुआ मुरादाबाद के राकेश रावत, राजेश वर्मा, रामू , मुजफ्फरमऊ के अजय कुमार वर्मा, रंजीत रावत, अंगद रावत को सजा सुनाई गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 31 अगस्त 2015 को हुई थी। माती पुलिस चौकी में तैनात सिपाही राजेंद्र सिंह बिष्ट ने देवा कोतवाली में तहरीर देते हुए बताया था कि 30 अगस्त 2015 को देवा थाने के हवालात में बाइक चोरी के आरोप में बंद माती निवासी सुभाष राजवंशी ने आत्महत्या कर ली थी।
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सुभाष की मौत का राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से नेताओं के भड़काने पर 31 अगस्त को माती व आसपास के गांव के करीब 150 पुरुष और महिलाएं लाठी डंडों व सरिया लेकर माती चौकी पहुंच गईं। इनके हाथ में डीजल और पेट्रोल से भरी पिपिया थीं। चौकी के छप्पर में आग लगा दी गई। पुलिसकर्मियों की बाइकों में तोड़फोड़ की गई।
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न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते उन्हें शनिवार को ही न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया था। सोमवार को 22 दोषियों को सजा सुनाई गई। मामले में आरोपी रहे ओमप्रकाश रावत व दीनबंधु की विचारण के दौरान मौत हो गई थी।
इनको मिली सजा
जरुआ मुरादाबाद गांव के रिंकू वर्मा, रेदुंआ पल्हरी के चंद्रिका रावत, सरसौंदी के धर्मेंद्र रावत, मुजफ्फरमऊ के मंत्री रावत, विनोद रावत, दुर्गेश रावत, मुरादाबाद गांव के बेंदा रावत, सरसौंदी के प्रमोद लोनिया, देशराज, सिराज, कबीर, कन्हैया रावत, कमलेश वर्मा, सर्वेश कुमार, रेंदुआ पल्हरी के ही कमलेश रावत व सोनेलाल, जरुआ मुरादाबाद के राकेश रावत, राजेश वर्मा, रामू , मुजफ्फरमऊ के अजय कुमार वर्मा, रंजीत रावत, अंगद रावत को सजा सुनाई गई।