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Rajouri News: श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया गया
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राजोरी। राजोरी स्थित एसवीएस ज्ञान गंगा आश्रम में गंगा दशहरा का पर्व पूरे धार्मिक उत्साह, श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालुओं ने आश्रम में पहुंचकर धार्मिक समारोह में भाग लिया। यह कार्यक्रम परम पूज्य अटल पीठाधीश्वर राजगुरु आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के तहत आश्रम में “श्री आनंद रामायण तत्व ज्ञान यज्ञ” (रामायण कथा) का आयोजन किया गया। इस दौरान रामायण कथा में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया गया। कथा के दौरान राम, लक्ष्मण, माता सीता, हनुमान, बाली, सुग्रीव, शबरी और रावण जैसे पात्रों के माध्यम से श्रीराम के आदर्श जीवन और धर्म के संदेश को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि श्री गुरु गंग देवजी महाराज का शिक्षा एवं ज्ञान के प्रसार में योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि गुरुजी का मानना था कि “अज्ञानता को केवल ज्ञान से ही समाप्त किया जा सकता है। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न शिक्षण संस्थानों की स्थापना की जा रही है ताकि समाज के हर वर्ग तक शिक्षा पहुंच सके।
स्वामीजी ने कहा कि आनंद रामायण मानव जीवन को मोक्ष और आत्मिक स्वतंत्रता की ओर ले जाने वाला प्रकाश प्रदान करती है। उन्होंने कथा के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने और समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया।
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समारोह के समापन अवसर पर सोमवार को “संत सम्मेलन” और “श्रद्धांजलि सभा” का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के विभिन्न अखाड़ों से आए संतों और महामंडलेश्वरों ने भाग लिया। कार्यक्रम में स्वामी आदित्यपुरी जी, स्वामी विष्णुगिरी जी, स्वामी ज्ञानानंद गिरी जी (नासिक), स्वामी किशोरानंद जी (हरिद्वार), बाबा राजगुरु, ब्रह्मचारी स्वामी भूमिनिकेतन जी तथा आनंदानंद गिरी जी सहित अनेक संत उपस्थित रहे।
संतों ने गुरु गंग देवजी महाराज के 41वें निर्वाण दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके जीवन, शिक्षाओं और समाज सेवा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान “छप्पन भोग” अर्पित किया गया तथा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गुरु गंग देवजी की पूजा-अर्चना संपन्न हुई।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि श्री गुरु गंग देवजी महाराज का शिक्षा एवं ज्ञान के प्रसार में योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि गुरुजी का मानना था कि “अज्ञानता को केवल ज्ञान से ही समाप्त किया जा सकता है। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न शिक्षण संस्थानों की स्थापना की जा रही है ताकि समाज के हर वर्ग तक शिक्षा पहुंच सके।
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स्वामीजी ने कहा कि आनंद रामायण मानव जीवन को मोक्ष और आत्मिक स्वतंत्रता की ओर ले जाने वाला प्रकाश प्रदान करती है। उन्होंने कथा के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने और समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया।
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संतों ने गुरु गंग देवजी महाराज के 41वें निर्वाण दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके जीवन, शिक्षाओं और समाज सेवा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान “छप्पन भोग” अर्पित किया गया तथा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गुरु गंग देवजी की पूजा-अर्चना संपन्न हुई।