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Yamuna Nagar News: दूध के दाम बढ़े, भैंस का 75, गाय का 65 रुपये लीटर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 26 May 2026 01:58 AM IST
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चारे की कालाबाजारी रोकने की मांग लेकर जिला सचिवालय पहुंचे डेयरी संचालक। संगठन
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। रसोई गैस, तेल, पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमसों से पहले ही आम आदमी की जेब महंगाई की आग में झुलस रही है कि अब दूध के दाम बढ़ गए है। जिला डेयरी एसोसिएशन ने दूध के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब भैंस का दूध 75 रुपये और गाय का दूध 65 रुपये प्रति लीटर मिलेगा।
डेयरी संचालकों का कहना है कि पशुओं का चारा, भूसा और खल की कीमतें पिछले कुछ महीनों में दोगुनी तक बढ़ चुकी हैं, जिससे पुराने रेट पर दूध बेचना संभव नहीं रह गया था। दूसरी तरफ दाम बढ़ाने की घोषणा ने मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों के साथ अब बच्चों के पोषण पर भी महंगाई का सीधा असर पड़ेगा।
जिले के चार कॉम्पलैक्स में चल रही डेयरी के संचालकों का कहना है कि पशु चारा दोगुना महंगा हो गया है और पुराने दाम पर दूध बेचना संभव नहीं है। वे महंगाई के कारण यह निर्णय पर विवश हुए हैं। अभी तक भैंस का दूध 65 से 70 और गाय का दूध 55 से 60 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा था।
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दड़वा डेयरी कॉम्पलेक्स के जितेंद्र लांबा, संजय पाहवा, कुलदीप मेहता, मोनू, काकू, सोनू, जग्गा, गोपी, दीपू पंडित ने कहा कि कुछ महीने पहले तक भूस का दाम 400 से 450 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन अब यह 1000 से 1100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। चारा महंगा होने के कारण पशुपालन व दुग्ध कारोबार उनके लिए घाटे का सौदा बन गया है।
डेयरी संचालकों ने भूसे की कालाबाजारी, दूसरे राज्यों में सप्लाई और फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इससे बाजार में चारे की कमी हो गई और मांग बढ़ गई है। इसी कड़ी सोमवार को दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स के पशुपालक जिला सचिवालय पहुंचे। यहां उन्होंने ज्ञापन में दिया। ज्ञापन में उन्होंने कहा कि पशुओं के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो गया है। पशुओं के रखरखाव, दाना, खल, भूसा और अन्य खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है।
ऐसे में पुराने रेट पर दूध बेचना घाटे का सौदा बन गया है। यदि दूध के दाम नहीं बढ़ाए जाते तो डेयरी चलाना संभव नहीं होगा। हालात ऐसे हैं कि संचालक डेयरी बंद करने के कगार पर पहुंच गए हैं। इस दौरान डेयरी संचालकों ने आरोप लगाया कि कुछ आढ़ती व व्यापारी अधिकारियों की मिलीभगत से भूस के दाम मनमर्जी से बढ़ा रहे हैं।
वहीं, दूध के दाम वृद्धि का कैल कॉम्प्लेक्स से सुरजीत सिंह, भारत नागपाल, औरंगाबाद से हैप्पी, जसविंद्र, रायपुर से मिल्केश फौजी ने भी दाम बढ़ाने का समर्थन किया है। गृहिणियों का कहना है कि पहले से ही रसोई का बजट महंगाई से बिगड़ा हुआ है और अब दूध महंगा होने से घर का खर्च और बढ़ जाएगा। इससे बच्चों की खुराक भी महंगी हो गई है। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चे वाले परिवारों पर पड़ेगा।
घर का बिगड़ जाएगा बजट
गृहिणी सीमा चौधरी ने कहा कि दूध के बढ़ते दामों ने घर का बजट बिगाड़ दिया है। रोजमर्रा की जरूरत होने के कारण दूध लेना मजबूरी है, लेकिन बार-बार कीमत बढ़ने से रसोई का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है। सरकार को महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
घरेलू खर्च पर सीधा असर
गृहिणी ममता सेन ने कहा कि दूध की कीमत बढ़ने से घरेलू खर्च पर सीधा असर पड़ा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए दूध जरूरी है, इसलिए कटौती भी नहीं कर सकते। हर महीने बजट बनाना कठिन होता जा रहा है।
दूध से बनी मिठाइयां होंगी महंगी
यमुनानगर। दूध के दाम बढ़ने से मिठाइयों भी महंगी होंगी। दुकानदार सन्नी ने कहा कि अभी सिलेंडर सहित अन्य सभी वस्तुओं के दाम बढ़े हुए हैं। अब दूध के दाम बढ़ने से मिठाई बनाना और भी महंगा हो जाए। दुकानदार शोहित ने कहा कि महंगाई के कारण दुकानदारी प्रभावित है। मिठाइयों की बिक्री बहुत ही कम है। अब दाम बढ़ाते हैं तो काम और भी मंदा हो जाएगा। संवाद
जगाधरी। रसोई गैस, तेल, पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमसों से पहले ही आम आदमी की जेब महंगाई की आग में झुलस रही है कि अब दूध के दाम बढ़ गए है। जिला डेयरी एसोसिएशन ने दूध के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब भैंस का दूध 75 रुपये और गाय का दूध 65 रुपये प्रति लीटर मिलेगा।
डेयरी संचालकों का कहना है कि पशुओं का चारा, भूसा और खल की कीमतें पिछले कुछ महीनों में दोगुनी तक बढ़ चुकी हैं, जिससे पुराने रेट पर दूध बेचना संभव नहीं रह गया था। दूसरी तरफ दाम बढ़ाने की घोषणा ने मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों के साथ अब बच्चों के पोषण पर भी महंगाई का सीधा असर पड़ेगा।
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जिले के चार कॉम्पलैक्स में चल रही डेयरी के संचालकों का कहना है कि पशु चारा दोगुना महंगा हो गया है और पुराने दाम पर दूध बेचना संभव नहीं है। वे महंगाई के कारण यह निर्णय पर विवश हुए हैं। अभी तक भैंस का दूध 65 से 70 और गाय का दूध 55 से 60 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा था।
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डेयरी संचालकों ने भूसे की कालाबाजारी, दूसरे राज्यों में सप्लाई और फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इससे बाजार में चारे की कमी हो गई और मांग बढ़ गई है। इसी कड़ी सोमवार को दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स के पशुपालक जिला सचिवालय पहुंचे। यहां उन्होंने ज्ञापन में दिया। ज्ञापन में उन्होंने कहा कि पशुओं के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो गया है। पशुओं के रखरखाव, दाना, खल, भूसा और अन्य खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है।
ऐसे में पुराने रेट पर दूध बेचना घाटे का सौदा बन गया है। यदि दूध के दाम नहीं बढ़ाए जाते तो डेयरी चलाना संभव नहीं होगा। हालात ऐसे हैं कि संचालक डेयरी बंद करने के कगार पर पहुंच गए हैं। इस दौरान डेयरी संचालकों ने आरोप लगाया कि कुछ आढ़ती व व्यापारी अधिकारियों की मिलीभगत से भूस के दाम मनमर्जी से बढ़ा रहे हैं।
वहीं, दूध के दाम वृद्धि का कैल कॉम्प्लेक्स से सुरजीत सिंह, भारत नागपाल, औरंगाबाद से हैप्पी, जसविंद्र, रायपुर से मिल्केश फौजी ने भी दाम बढ़ाने का समर्थन किया है। गृहिणियों का कहना है कि पहले से ही रसोई का बजट महंगाई से बिगड़ा हुआ है और अब दूध महंगा होने से घर का खर्च और बढ़ जाएगा। इससे बच्चों की खुराक भी महंगी हो गई है। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चे वाले परिवारों पर पड़ेगा।
घर का बिगड़ जाएगा बजट
गृहिणी सीमा चौधरी ने कहा कि दूध के बढ़ते दामों ने घर का बजट बिगाड़ दिया है। रोजमर्रा की जरूरत होने के कारण दूध लेना मजबूरी है, लेकिन बार-बार कीमत बढ़ने से रसोई का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है। सरकार को महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
घरेलू खर्च पर सीधा असर
गृहिणी ममता सेन ने कहा कि दूध की कीमत बढ़ने से घरेलू खर्च पर सीधा असर पड़ा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए दूध जरूरी है, इसलिए कटौती भी नहीं कर सकते। हर महीने बजट बनाना कठिन होता जा रहा है।
दूध से बनी मिठाइयां होंगी महंगी
यमुनानगर। दूध के दाम बढ़ने से मिठाइयों भी महंगी होंगी। दुकानदार सन्नी ने कहा कि अभी सिलेंडर सहित अन्य सभी वस्तुओं के दाम बढ़े हुए हैं। अब दूध के दाम बढ़ने से मिठाई बनाना और भी महंगा हो जाए। दुकानदार शोहित ने कहा कि महंगाई के कारण दुकानदारी प्रभावित है। मिठाइयों की बिक्री बहुत ही कम है। अब दाम बढ़ाते हैं तो काम और भी मंदा हो जाएगा। संवाद