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Rohtak News: पीजीआई आईये...संक्रमण लेकर जाइये
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19-सिविल अस्पताल में तीसरी मंजिल में शौचालय में टूटी हुई सीट। संवाद
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करिश्मा रंगा
रोहतक। पीजीआईएमएस और सिविल अस्पताल में वॉशरूम की स्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि वार्ड-14, आपातकालीन विभाग और ओपीडी अस्पताल में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। जिस अस्पताल में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, वहीं गंदगी और बदबू से जूझने को मजबूर हैं।
सिविल अस्पताल की पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर शौचालयों का हाल बेहद खराब मिला। जगह-जगह पेशाब फैला हुआ था और तीखी बदबू से हालात असहनीय थे। तीसरी मंजिल पर एक शौचालय का दरवाजा तक नहीं खुल रहा था। वहीं एक शौचालय में टूटी हुई सीट भी मिली है। संवाद
महिलाएं बोली-इतनी गंदगी में यूरिन सैंपल देना भी मुश्किल
पीजीआईएमएस ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में महिलाएं जांच के लिए पहुंचती हैं लेकिन वहां साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं मिला। महिलाओं ने बताया कि इतनी गंदगी में यूरिन सैंपल देना भी मुश्किल है। उनका कहना है कि इस तरह की स्थिति में यूटीआई और अन्य संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है जो सीधे उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ है। वहीं पीजीआईएमएस के वार्ड-14 में वॉशरूम ब्लॉक पाए गए।
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बुजुर्ग महिला बोलीं-अधिकांश शौचालय वेस्टर्न स्टाइल के
एक बुजुर्ग महिला रामप्यारी ने यह भी शिकायत की है कि अधिकांश शौचालय वेस्टर्न स्टाइल के हैं जिनका इस्तेमाल करने में दिक्कत होती है। उन्होंने मांग की है कि भारतीय शैली के शौचालय उपलब्ध कराए जाएं जिससे मरीजों को कम से कम बुनियादी सुविधा तो मिल सके।
मरीजों का सवाल- इलाज के लिए आएं या बीमारी लेकर जाएं?
मरीजों और उनके परिजनों ने प्रशासन से सवाल उठाया है कि आखिर अस्पताल इलाज के लिए हैं या संक्रमण फैलाने के लिए। उन्होंने तुरंत सफाई व्यवस्था सुधारने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
क्या बोलीं महिलाएं
हम इलाज करवाने अस्पताल आते हैं लेकिन यहां की गंदगी देखकर डर लगता है कि कहीं नई बीमारी न लग जाए। इतनी खराब सफाई में यूरिन सैंपल देना बहुत मुश्किल हो जाता है। -पूजा, डेयरी पाना निवासी
महिलाओं के लिए शौचालयों की हालत बेहद खराब है। न साफ-सफाई है, ना भारतीय स्टाइल टॉयलेट। ऐसी स्थिति में यूटीआई जैसी समस्याओं का खतरा और बढ़ जाता है। -सविता, महम निवासी
वर्जन
संस्थान में सफाई व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। लोग खुद व्यवस्था खराब करते हैं। कुछ शौचालयों में दिक्कत है। इन्हें जल्द दूर कर व्यवस्था दुरुस्त बनाई जाएगी। -डॉ. कुंदन मित्तल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआई।
रोहतक। पीजीआईएमएस और सिविल अस्पताल में वॉशरूम की स्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि वार्ड-14, आपातकालीन विभाग और ओपीडी अस्पताल में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। जिस अस्पताल में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, वहीं गंदगी और बदबू से जूझने को मजबूर हैं।
सिविल अस्पताल की पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर शौचालयों का हाल बेहद खराब मिला। जगह-जगह पेशाब फैला हुआ था और तीखी बदबू से हालात असहनीय थे। तीसरी मंजिल पर एक शौचालय का दरवाजा तक नहीं खुल रहा था। वहीं एक शौचालय में टूटी हुई सीट भी मिली है। संवाद
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महिलाएं बोली-इतनी गंदगी में यूरिन सैंपल देना भी मुश्किल
पीजीआईएमएस ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में महिलाएं जांच के लिए पहुंचती हैं लेकिन वहां साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं मिला। महिलाओं ने बताया कि इतनी गंदगी में यूरिन सैंपल देना भी मुश्किल है। उनका कहना है कि इस तरह की स्थिति में यूटीआई और अन्य संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है जो सीधे उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ है। वहीं पीजीआईएमएस के वार्ड-14 में वॉशरूम ब्लॉक पाए गए।
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बुजुर्ग महिला बोलीं-अधिकांश शौचालय वेस्टर्न स्टाइल के
एक बुजुर्ग महिला रामप्यारी ने यह भी शिकायत की है कि अधिकांश शौचालय वेस्टर्न स्टाइल के हैं जिनका इस्तेमाल करने में दिक्कत होती है। उन्होंने मांग की है कि भारतीय शैली के शौचालय उपलब्ध कराए जाएं जिससे मरीजों को कम से कम बुनियादी सुविधा तो मिल सके।
मरीजों का सवाल- इलाज के लिए आएं या बीमारी लेकर जाएं?
मरीजों और उनके परिजनों ने प्रशासन से सवाल उठाया है कि आखिर अस्पताल इलाज के लिए हैं या संक्रमण फैलाने के लिए। उन्होंने तुरंत सफाई व्यवस्था सुधारने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
क्या बोलीं महिलाएं
हम इलाज करवाने अस्पताल आते हैं लेकिन यहां की गंदगी देखकर डर लगता है कि कहीं नई बीमारी न लग जाए। इतनी खराब सफाई में यूरिन सैंपल देना बहुत मुश्किल हो जाता है। -पूजा, डेयरी पाना निवासी
महिलाओं के लिए शौचालयों की हालत बेहद खराब है। न साफ-सफाई है, ना भारतीय स्टाइल टॉयलेट। ऐसी स्थिति में यूटीआई जैसी समस्याओं का खतरा और बढ़ जाता है। -सविता, महम निवासी
वर्जन
संस्थान में सफाई व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। लोग खुद व्यवस्था खराब करते हैं। कुछ शौचालयों में दिक्कत है। इन्हें जल्द दूर कर व्यवस्था दुरुस्त बनाई जाएगी। -डॉ. कुंदन मित्तल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआई।

19-सिविल अस्पताल में तीसरी मंजिल में शौचालय में टूटी हुई सीट। संवाद

19-सिविल अस्पताल में तीसरी मंजिल में शौचालय में टूटी हुई सीट। संवाद