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Mathura News: हम मिलें न मिलें, तुम नाम जप करो...
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वृंदावन। संत प्रेमानंद ने भक्तों से भावुक अपील करते हुए कहा कि बिल्कुल चिंता मत करो, हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, आप सबको बहुत प्यार करते हैं, हम चाहते हैं सबको श्रीजी की कृपा प्राप्त हो। अंतिम बात यही मैं आऊं न आऊं, बिना बोले तुम्हारे दिमाग में हम होंगे। सभी नामजप करो वहीं कल्याणकारी है। यह कहकर मौन धारण कर संत प्रेमानंद ने एकांतवास शुरू कर दिया। संत प्रेमानंद का यह वीडियो तब सोशल मीडिया पर सामने आया जब पिछले दस दिनों से श्रीराधा केलिकुंज आश्रम में एकांतिक दर्शन व एकांतिक वार्ता एवं पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित है।
रविवार शाम को संत प्रेमानंद के आश्रम के सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जारी वीडियो में संत ने अपने भक्तों से भावुक अपील करते हुए मौन धारण कर एकांतवास पर जाने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, गुरुदेव हमेशा साथ रहेंगे। मौन व्रत एवं एकांतवास हमारे लिए नहीं भक्तों के कल्याण के लिए है। हमारा जो होना था, वह हो गया। अब जो कुछ भी हो रहा है, वह आप सबके कल्याण के लिए हो रहा है। संत ने कहा यह मौन स्थायी नहीं है और समय आने पर वे स्वयं इसकी जानकारी देंगे। भक्तों को भजन करने व सुखी रहने का संत प्रेमानंद ने संदेश देते हुए कहा नाम जप करो, भजन करो, राधारानी के आश्रित रहो और सुखी रहो। उन्होंने आगे कहा कि यह चिंता मत करो कि तुम्हारा उत्थान कैसे होगा। बिना बोले भी तुम्हारे दिमाग में गुरुदेव रहेंगे। हमारा एकांतवास तुम्हारी सेवा और कल्याण के लिए है।
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रविवार शाम को संत प्रेमानंद के आश्रम के सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जारी वीडियो में संत ने अपने भक्तों से भावुक अपील करते हुए मौन धारण कर एकांतवास पर जाने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, गुरुदेव हमेशा साथ रहेंगे। मौन व्रत एवं एकांतवास हमारे लिए नहीं भक्तों के कल्याण के लिए है। हमारा जो होना था, वह हो गया। अब जो कुछ भी हो रहा है, वह आप सबके कल्याण के लिए हो रहा है। संत ने कहा यह मौन स्थायी नहीं है और समय आने पर वे स्वयं इसकी जानकारी देंगे। भक्तों को भजन करने व सुखी रहने का संत प्रेमानंद ने संदेश देते हुए कहा नाम जप करो, भजन करो, राधारानी के आश्रित रहो और सुखी रहो। उन्होंने आगे कहा कि यह चिंता मत करो कि तुम्हारा उत्थान कैसे होगा। बिना बोले भी तुम्हारे दिमाग में गुरुदेव रहेंगे। हमारा एकांतवास तुम्हारी सेवा और कल्याण के लिए है।
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