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Mathura News: निवर्तमान प्रधान ही बनेंगे प्रशासक
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मथुरा। जिले में 495 ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल आज 26 मई को पूरा हो जाएगा। कल से निवर्तमान प्रधानों को ही उनकी संबंधित ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में नियुक्त किया है। पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव ने सोमवार को इस संबंध में शासनादेश जारी किया है।
आदेश के अनुसार निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक के तौर पर अधिकतम छह माह की अवधि या आगामी सामान्य निर्वाचन के बाद गठित होने वाली नई ग्राम पंचायत तक के लिए नामित किया गया है। प्रशासक के रूप में नियुक्त होने के बाद प्रधानों के अधिकार कम किए गए हैं। ये केवल सामान्य और रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों का ही निर्वहन कर सकेंगे। अपनी मर्जी से कोई भी बड़ा निर्णय नहीं ले पाएंगे। विशेष परिस्थिति में किसी भी कार्य के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी। एडीएम एफआर डॉ. पंकज वर्मा ने बताया कि सोमवार को शासन ने आदेश जारी कर दिया है। आदेशानुसार ही आगे की दिशा तय की जाएगी।
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फंड ठिकाने लगाने की होड़, रडार पर प्रधान व सचिव
नियमों के मुताबिक कार्यकाल समाप्त होने से पहले प्रधानों में फंड ठिकाने लगाने की होड़ रही। बजट का पूरा उपयोग दिखाने के लिए अधूरे पड़े निर्माण कार्यों की सीसी (पूर्णता प्रमाण पत्र) जारी कराकर वेंडर को भुगतान किए जा रहे हैं। इस हड़बड़ी में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए पंचायती राज विभाग ने चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि बीते दो या तीन माह में हुए बड़े भुगतानों की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि बिना जमीनी काम के कागजों पर भुगतान पाया गया तो संबंधित प्रधान और सचिव के खिलाफ रिकवरी और एफआईआर की कार्रवाई की जाएगी।
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आदेश के अनुसार निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक के तौर पर अधिकतम छह माह की अवधि या आगामी सामान्य निर्वाचन के बाद गठित होने वाली नई ग्राम पंचायत तक के लिए नामित किया गया है। प्रशासक के रूप में नियुक्त होने के बाद प्रधानों के अधिकार कम किए गए हैं। ये केवल सामान्य और रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों का ही निर्वहन कर सकेंगे। अपनी मर्जी से कोई भी बड़ा निर्णय नहीं ले पाएंगे। विशेष परिस्थिति में किसी भी कार्य के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी। एडीएम एफआर डॉ. पंकज वर्मा ने बताया कि सोमवार को शासन ने आदेश जारी कर दिया है। आदेशानुसार ही आगे की दिशा तय की जाएगी।
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फंड ठिकाने लगाने की होड़, रडार पर प्रधान व सचिव
नियमों के मुताबिक कार्यकाल समाप्त होने से पहले प्रधानों में फंड ठिकाने लगाने की होड़ रही। बजट का पूरा उपयोग दिखाने के लिए अधूरे पड़े निर्माण कार्यों की सीसी (पूर्णता प्रमाण पत्र) जारी कराकर वेंडर को भुगतान किए जा रहे हैं। इस हड़बड़ी में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए पंचायती राज विभाग ने चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि बीते दो या तीन माह में हुए बड़े भुगतानों की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि बिना जमीनी काम के कागजों पर भुगतान पाया गया तो संबंधित प्रधान और सचिव के खिलाफ रिकवरी और एफआईआर की कार्रवाई की जाएगी।