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Kanpur News: ऑनस्क्रीन मार्किंग से छात्र हलकान, भरा पुनर्मूल्यांकन
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कानपुर। सीबीएसई की ऑनस्क्रीन मार्किंग प्रणाली से शहर के छात्र परेशान हैं। अधिकतर छात्रों ने परिणाम से असंतुष्ट होकर पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया है। हालांकि, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में उन्हें कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
ऑनस्क्रीन मार्किंग को लेकर बड़े विवाद के बाद सीबीएसई ने कदम उठाया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने अब आईआईटी को जिम्मेदारी सौंपी है। यह जिम्मेदारी पोस्ट रिजल्ट पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को दूर करने की है। आईआईटी कानपुर और आईआईटी चेन्नई मिलकर कई अहम पहलुओं पर काम करेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने चार वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई है। इस टीम में आईआईटी कानपुर से दो और आईआईटी मद्रास से दो वैज्ञानिकों को शामिल किया गया है। आईआईटी कानपुर से प्रो. कलोल मंडल और डॉ. आनंद हांडा इस टीम का हिस्सा हैं। यह निर्णय छात्रों की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर लिया गया है।
वैज्ञानिकों की टीम पोर्टल की स्थिरता और सर्वर परफॉर्मेंस पर काम करेगी। इसका उद्देश्य समग्र आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना है। लॉगिन ऑथेंटिकेशन सिस्टम को बेहतर किया जाएगा। यूजर एक्सेस मैकेनिज्म और पेमेंट गेटवे के सुचारु संचालन पर भी ध्यान दिया जाएगा। दोनों आईआईटी दो-दो सदस्यों की टीमें तैयार करेंगी। यह प्रयास छात्रों को एक सहज अनुभव प्रदान करने के लिए है।
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बिना तैयारी के ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू करना सीबीएसई के लिए सिरदर्द बन गया। शिक्षकों का कहना है कि स्कैनिंग का ठेका जिस कंपनी को दिया गया, उसमें काफी गड़बड़ी हुई। कई कॉपियों के पेज ब्लर थे, जिन्हें पढ़ना मुश्किल था। मजबूरी में उन कॉपियों को नंबर नहीं दिए गए। एचई और चीफ नोडल सुपरवाइजर तक शिकायतें पहुंचाई गईं। शिक्षकों के अनुसार, इस बार परिणाम निश्चित रूप से काफी गड़बड़ है।
ये दिक्कतें आ रहीं
पुनर्मूल्यांकन आवेदन के दौरान सीबीएसई की वेबसाइट बार-बार क्रैश हो रही है। लॉगिन न हो पाने, पेज लोड होने में देरी और पेमेंट सर्वर एरर जैसी दिक्कतें आ रही हैं। रोल नंबर डालने के बाद भी लॉगिन फेल हो रहा है, ओटीपी नहीं मिल रहा और अकाउंट लॉक हो रहा है। ऑनलाइन फीस जमा करते समय पैसा कट जाता है, पर आवेदन सबमिट नहीं होता। पेमेंट गेटवे फेल होने पर रिफंड की स्पष्ट जानकारी भी नहीं मिलती। इन तकनीकी दिक्कतों के बावजूद आवेदन की समय सीमा सीमित है, जिससे छात्र तनाव में हैं।
ऑनस्क्रीन मार्किंग को लेकर बड़े विवाद के बाद सीबीएसई ने कदम उठाया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने अब आईआईटी को जिम्मेदारी सौंपी है। यह जिम्मेदारी पोस्ट रिजल्ट पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को दूर करने की है। आईआईटी कानपुर और आईआईटी चेन्नई मिलकर कई अहम पहलुओं पर काम करेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने चार वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई है। इस टीम में आईआईटी कानपुर से दो और आईआईटी मद्रास से दो वैज्ञानिकों को शामिल किया गया है। आईआईटी कानपुर से प्रो. कलोल मंडल और डॉ. आनंद हांडा इस टीम का हिस्सा हैं। यह निर्णय छात्रों की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर लिया गया है।
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वैज्ञानिकों की टीम पोर्टल की स्थिरता और सर्वर परफॉर्मेंस पर काम करेगी। इसका उद्देश्य समग्र आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना है। लॉगिन ऑथेंटिकेशन सिस्टम को बेहतर किया जाएगा। यूजर एक्सेस मैकेनिज्म और पेमेंट गेटवे के सुचारु संचालन पर भी ध्यान दिया जाएगा। दोनों आईआईटी दो-दो सदस्यों की टीमें तैयार करेंगी। यह प्रयास छात्रों को एक सहज अनुभव प्रदान करने के लिए है।
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ये दिक्कतें आ रहीं
पुनर्मूल्यांकन आवेदन के दौरान सीबीएसई की वेबसाइट बार-बार क्रैश हो रही है। लॉगिन न हो पाने, पेज लोड होने में देरी और पेमेंट सर्वर एरर जैसी दिक्कतें आ रही हैं। रोल नंबर डालने के बाद भी लॉगिन फेल हो रहा है, ओटीपी नहीं मिल रहा और अकाउंट लॉक हो रहा है। ऑनलाइन फीस जमा करते समय पैसा कट जाता है, पर आवेदन सबमिट नहीं होता। पेमेंट गेटवे फेल होने पर रिफंड की स्पष्ट जानकारी भी नहीं मिलती। इन तकनीकी दिक्कतों के बावजूद आवेदन की समय सीमा सीमित है, जिससे छात्र तनाव में हैं।