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Kanpur News: अभिभावक संवाद बढ़ाएं, बच्चों को मोबाइल से दूर रखें
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कानपुर। संगीत एवं चित्रकला कार्यशाला का समापन समारोह सोमवार को ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज में हुआ। संगीत नाटक अकादमी, राज्य ललित कला अकादमी व स्वरांजलि संगीत शिक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, विशिष्ट अतिथि प्रो. जयंत खोत व डॉ. शोभित नाहर रहे। अध्यक्षता राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीशचंद्र मिश्रा ने की।
मुख्य अतिथि सतीश महाना ने कहा कि ग्रीष्मावकाश में ऐसे रचनात्मक प्रशिक्षण बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने, मोबाइल से दूरी बनाने और सहगामी गतिविधियों में भागीदारी पर जोर दिया। प्रो. जयंत खोत ने संगीत को जीवन की लय बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम प्रदेश के 75 जिलों में संचालित हो रहे हैं। गिरीशचंद्र मिश्रा ने कला को अनुशासन का माध्यम बताते हुए इसे संवेदनाओं के विकास का आधार बताया।
कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं ने रश्मि सविता व डॉ. अरविंद श्रीवास्तव के निर्देशन में स्वागत गीत व शास्त्रीय गायन, मधु द्विवेदी के निर्देशन में वादन, अर्पिता वर्मा की ओर से भरतनाट्यम (गणेश वंदना) तथा डॉ. नीता त्रिपाठी व विनम्रता के निर्देशन में कथक की प्रस्तुति दी गई। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित करने के बाद डॉ. ऋचा मिश्रा की पुस्तक का विमोचन हुआ। महानिदेशक डॉ. नीरजा अग्निहोत्री, प्रबंध निदेशक डॉ. पूजा अवस्थी, प्रधानाचार्य राममिलन सिंह, निदेशक डॉ. ममता तिवारी, वैष्णवी पाठक सहित डॉ. कुमकुम पांडेय, ध्रुव रूइया, रोचना विश्नोई, वेणुरंजन भदौरिया, आरके सिंह, रेनू निगम, भूपति तिवारी, डॉ. प्रेमकुमारी मिश्रा, पार्षद आलोक पांडेय, पवन गुप्ता, मनोज श्रीवास्तव, रामदिनेश त्रिवेदी, संतोष दीक्षित, आकांक्षा जौहरी, शिवानी सिंह आदि उपस्थित रहे।
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मुख्य अतिथि सतीश महाना ने कहा कि ग्रीष्मावकाश में ऐसे रचनात्मक प्रशिक्षण बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने, मोबाइल से दूरी बनाने और सहगामी गतिविधियों में भागीदारी पर जोर दिया। प्रो. जयंत खोत ने संगीत को जीवन की लय बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम प्रदेश के 75 जिलों में संचालित हो रहे हैं। गिरीशचंद्र मिश्रा ने कला को अनुशासन का माध्यम बताते हुए इसे संवेदनाओं के विकास का आधार बताया।
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कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं ने रश्मि सविता व डॉ. अरविंद श्रीवास्तव के निर्देशन में स्वागत गीत व शास्त्रीय गायन, मधु द्विवेदी के निर्देशन में वादन, अर्पिता वर्मा की ओर से भरतनाट्यम (गणेश वंदना) तथा डॉ. नीता त्रिपाठी व विनम्रता के निर्देशन में कथक की प्रस्तुति दी गई। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित करने के बाद डॉ. ऋचा मिश्रा की पुस्तक का विमोचन हुआ। महानिदेशक डॉ. नीरजा अग्निहोत्री, प्रबंध निदेशक डॉ. पूजा अवस्थी, प्रधानाचार्य राममिलन सिंह, निदेशक डॉ. ममता तिवारी, वैष्णवी पाठक सहित डॉ. कुमकुम पांडेय, ध्रुव रूइया, रोचना विश्नोई, वेणुरंजन भदौरिया, आरके सिंह, रेनू निगम, भूपति तिवारी, डॉ. प्रेमकुमारी मिश्रा, पार्षद आलोक पांडेय, पवन गुप्ता, मनोज श्रीवास्तव, रामदिनेश त्रिवेदी, संतोष दीक्षित, आकांक्षा जौहरी, शिवानी सिंह आदि उपस्थित रहे।