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Hathras News: जिला अस्पताल फुल..बेड कम पड़े, बेंचों पर हुआ इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 26 May 2026 02:25 AM IST
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एक बेड पर लेटे दो मरीज। संवाद
- फोटो : Samvad
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार की दोपहर 12.30 बजे मेंडू निवासी नसरूद्दीन का 16 माह का बेटा सुभांश मां की गोदी में बीमार हालत में पहुंचा। बुखार व दस्त से पीड़ित बच्चे को तीन नंबर बेड पर मां की गोदी में ही ड्रिप लगाई गई। इस बीच नाई का नगला के जमील (40) गिरते-पड़ते इमरजेंसी में पहुंचे। जगह न होने के कारण उल्टी-दस्त व कमजोरी से पीड़ित जमील बेड नंबर तीन पर ही लेट गए।
उन्हें आईवी फ्लयूड दिया गया। एक ही बेड पर दोनों का इलाज रहा था। इसके बाद ही मरीज उपचार के लिए पहुंचते रहे, जो लेटने के लिए बेड क्या, बैठने की जगह ढूंढते नजर आए। 18 वर्षीय नीता उल्टी, खून की कमी व कमजोरी के चलते 12.40 बजे इमरजेंसी में पहुंची। प्राथमिक उपचार के बाद भी उल्टी बंद नही हुईं।
उल्टी के लिए बार-बार उठने के कारण आधे बैठ पर मिली जगह भी दूसरे मरीज के चलते घिर गई। निढाल हालत में वह काफी देर तक बैंच पर बैठी रहीं। साथ में आईं भाभी ने दूसरे मरीज के तीमारदार से गुजारिश कर बेड पर जगह बनाई। लगातार उल्टी कर रहा सात साल का प्रिंस पिता की गोद में दोपहर 1.10 पर इमरजेंसी में पहुंचा। पिता की गोदी में ही उसे प्राथमिक उपचार दिया गया।
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छह बेड, पांच बैंच, मरीज 22
दोपहर को इमरजेंसी वार्ड की स्थिति यह रह कि यहां क्षमता से अधिक मरीज नजर आए। इमरजेंसी में केवल छह बेड हैं, जहां ऑक्सीजन की व्यवस्था है। इनमें से चार मरीज ऑक्सीजन के थे। शेष उल्टी दस्त व पेट दर्द के मरीज दो बेड व बैंच पर लेटे थे। इमरजेंसी में पांच बैंच हैं। इन्हीं पर मरीज लेटे व तीमारदार बैठे नजर आए। दो बेड पर दो-दो मरीज तथा कुछ मरीज बैंच के कोने पर बैठे उपचार कराते नजर आए। दोपहर के समय एक बार में 22 मरीज इमरजेंसी में थे।
भर्ती किए गए 106 मरीज
जिला अस्पताल में रविवार रात 12 बजे से दोपहर एक बजे तक 85 मरीज उल्टी-दस्त व पेट का दर्द के पहुंचे। इनमें से 64 को वार्ड में भर्ती किया गया। शाम तक यह आंकड़ा बढ़कर 106 पहुंच गया। जिला अस्पताल में 70 बेड के छह वार्ड हैं। ये सभी फुल रहे। दोपहर को स्थिति यह बनी कि वार्ड से इमरजेंसी को मेसेज भेजा गया कि मरीज न भेजे जाएं।
गर्मी व मरीजों के दबाव से फेल हुए इंतजाम
अत्यधिक गर्मी व मरीजों की भीड़ के चलते वार्ड में लगे एसी व कूलर भी गर्मी से राहत नहीं दे पा रहे। वार्ड में अतिरिक्त बेड के चलते मरीज व तीमारदारों की संख्या बढ़ गई है। दोपहर एक बजे एसी चलते नजर आए। मरीजों ने बताया कि बीच-बीच में लाइट जाने के कारण वार्ड में उमस हो जाती है।
नहीं काम आए आइस जैल पैक
हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए कूल रूम के साथ-साथ आइस जैल पैक की व्यवस्था की गई है, लेकिन अभी तक एक भी मरीज हीट स्ट्रोक से संबंधित जिला अस्पताल नहीं पहुंचा है। ये आइस पैक एक बार फ्रीजर से निकालने के बाद काफी देर तक ठंडे रहते हैं, इन्हें मरीजों के नीचे बिछाया जाता है, जिससे शरीर ठंडा हो सके।
डायरिया से निपटने के लिए जिला अस्पताल में पर्याप्त दवाएं हैं। जगह की कमी है, जिसके लिए वार्ड में अतिरिक्त बेड बिछाए गए हैं। क्षमता से कहीं अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। नर्सिंग स्टाफ बढ़ाया गया है, जिससे प्रत्येक मरीज को उपचार मिल सके। जिला अस्पताल की क्षमता बढ़ाने के लिए उच्च अधिकारियों को लिखा गया है।
डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस
उन्हें आईवी फ्लयूड दिया गया। एक ही बेड पर दोनों का इलाज रहा था। इसके बाद ही मरीज उपचार के लिए पहुंचते रहे, जो लेटने के लिए बेड क्या, बैठने की जगह ढूंढते नजर आए। 18 वर्षीय नीता उल्टी, खून की कमी व कमजोरी के चलते 12.40 बजे इमरजेंसी में पहुंची। प्राथमिक उपचार के बाद भी उल्टी बंद नही हुईं।
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उल्टी के लिए बार-बार उठने के कारण आधे बैठ पर मिली जगह भी दूसरे मरीज के चलते घिर गई। निढाल हालत में वह काफी देर तक बैंच पर बैठी रहीं। साथ में आईं भाभी ने दूसरे मरीज के तीमारदार से गुजारिश कर बेड पर जगह बनाई। लगातार उल्टी कर रहा सात साल का प्रिंस पिता की गोद में दोपहर 1.10 पर इमरजेंसी में पहुंचा। पिता की गोदी में ही उसे प्राथमिक उपचार दिया गया।
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दोपहर को इमरजेंसी वार्ड की स्थिति यह रह कि यहां क्षमता से अधिक मरीज नजर आए। इमरजेंसी में केवल छह बेड हैं, जहां ऑक्सीजन की व्यवस्था है। इनमें से चार मरीज ऑक्सीजन के थे। शेष उल्टी दस्त व पेट दर्द के मरीज दो बेड व बैंच पर लेटे थे। इमरजेंसी में पांच बैंच हैं। इन्हीं पर मरीज लेटे व तीमारदार बैठे नजर आए। दो बेड पर दो-दो मरीज तथा कुछ मरीज बैंच के कोने पर बैठे उपचार कराते नजर आए। दोपहर के समय एक बार में 22 मरीज इमरजेंसी में थे।
भर्ती किए गए 106 मरीज
जिला अस्पताल में रविवार रात 12 बजे से दोपहर एक बजे तक 85 मरीज उल्टी-दस्त व पेट का दर्द के पहुंचे। इनमें से 64 को वार्ड में भर्ती किया गया। शाम तक यह आंकड़ा बढ़कर 106 पहुंच गया। जिला अस्पताल में 70 बेड के छह वार्ड हैं। ये सभी फुल रहे। दोपहर को स्थिति यह बनी कि वार्ड से इमरजेंसी को मेसेज भेजा गया कि मरीज न भेजे जाएं।
गर्मी व मरीजों के दबाव से फेल हुए इंतजाम
अत्यधिक गर्मी व मरीजों की भीड़ के चलते वार्ड में लगे एसी व कूलर भी गर्मी से राहत नहीं दे पा रहे। वार्ड में अतिरिक्त बेड के चलते मरीज व तीमारदारों की संख्या बढ़ गई है। दोपहर एक बजे एसी चलते नजर आए। मरीजों ने बताया कि बीच-बीच में लाइट जाने के कारण वार्ड में उमस हो जाती है।
नहीं काम आए आइस जैल पैक
हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए कूल रूम के साथ-साथ आइस जैल पैक की व्यवस्था की गई है, लेकिन अभी तक एक भी मरीज हीट स्ट्रोक से संबंधित जिला अस्पताल नहीं पहुंचा है। ये आइस पैक एक बार फ्रीजर से निकालने के बाद काफी देर तक ठंडे रहते हैं, इन्हें मरीजों के नीचे बिछाया जाता है, जिससे शरीर ठंडा हो सके।
डायरिया से निपटने के लिए जिला अस्पताल में पर्याप्त दवाएं हैं। जगह की कमी है, जिसके लिए वार्ड में अतिरिक्त बेड बिछाए गए हैं। क्षमता से कहीं अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। नर्सिंग स्टाफ बढ़ाया गया है, जिससे प्रत्येक मरीज को उपचार मिल सके। जिला अस्पताल की क्षमता बढ़ाने के लिए उच्च अधिकारियों को लिखा गया है।
डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस