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नौतपा का कहर: 45 डिग्री तापमान में झुलसा जनजीवन, तीन दिन राहत के आसार नहीं
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बदायूं। नौतपा शुरू होते ही गर्मी ने अपने तेवर और तीखे कर दिए। सोमवार को जिले का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आसमान से बरस रही आग और दिनभर चल रही गर्म हवाओं ने जनजीवन प्रभावित कर दिया। सुबह से ही तेज धूप निकलने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जबकि दोपहर होते-होते सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसर गया। आने वाले तीन दिनों तक राहत की उम्मीद नहीं है।
नौतपा को लेकर लोगों के बीच पहले से ही भीषण गर्मी की आशंका थी और मौसम भी उसी ओर संकेत कर रहा है। नौतपा के नौ दिनों में सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक प्रभावी होती हैं। इससे तापमान में तेजी से वृद्धि होती है। इस बार नौतपा की शुरुआत के साथ ही तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया है। इससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। भीषण गर्मी का असर बाजारों, सार्वजनिक स्थानों पर साफ दिखाई दिया।
दोपहर 12 बजे के बाद सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम हो गई। जरूरी काम से बाहर निकले लोग सिर और चेहरा ढककर चलते नजर आए। सड़कों किनारे व दूसरी जगह लगे वाटर कूलरों पर ठंडा पानी की चाहत के साथ ही शीतल पेय पदार्थों की दुकानों और गन्ने के रस के ठेलों पर भीड़ लगी रही। गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी पड़ रहा है। तालाबों और जलाशयों के सिकुड़ने से बेजुबान जानवर पानी की तलाश में भटक रहे हैं।
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मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना नहीं है। अधिकतम तापमान 44 से 46 डिग्री के बीच बना रह सकता है और लू चलने के भी आसार हैं। विशेषज्ञों ने दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने, अधिक पानी पीने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। भीषण गर्मी और नौतपा का प्रभाव जिले में लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही है। संवाद
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डॉक्टर ने दी यह सलाह
-जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अलंकर सोलंकी का कहना है कि ज्यादा तापमान रहने से शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), लू, चक्कर आना, उल्टी, सिरदर्द और बेहोशी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। सबसे अधिक खतरा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को रहता है। ऐसे में सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक धूप में निकलने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को तेज प्यास, चक्कर, कमजोरी, बुखार या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस, नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते रहना चाहिए।
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क्या करें
-दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
-ओआरएस, नींबू पानी, छाछ और फलों का सेवन करें।
-घर से निकलते समय सिर और चेहरा ढकें।
-हल्के रंग के और सूती कपड़े पहनें।
-बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
-धूप से लौटने के बाद तुरंत ठंडा पानी न पीएं।
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क्या न करें
-दोपहर 11 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक खुले में निकलें।
-खाली पेट धूप में न जाएं।
-बासी और खुले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
-शरीर में पानी की कमी को नजरअंदाज न करें।
-बंद वाहन में बच्चों या बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें।
-लू या चक्कर आने के लक्षणों को हल्के में न लें।
नौतपा को लेकर लोगों के बीच पहले से ही भीषण गर्मी की आशंका थी और मौसम भी उसी ओर संकेत कर रहा है। नौतपा के नौ दिनों में सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक प्रभावी होती हैं। इससे तापमान में तेजी से वृद्धि होती है। इस बार नौतपा की शुरुआत के साथ ही तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया है। इससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। भीषण गर्मी का असर बाजारों, सार्वजनिक स्थानों पर साफ दिखाई दिया।
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दोपहर 12 बजे के बाद सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम हो गई। जरूरी काम से बाहर निकले लोग सिर और चेहरा ढककर चलते नजर आए। सड़कों किनारे व दूसरी जगह लगे वाटर कूलरों पर ठंडा पानी की चाहत के साथ ही शीतल पेय पदार्थों की दुकानों और गन्ने के रस के ठेलों पर भीड़ लगी रही। गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी पड़ रहा है। तालाबों और जलाशयों के सिकुड़ने से बेजुबान जानवर पानी की तलाश में भटक रहे हैं।
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डॉक्टर ने दी यह सलाह
-जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अलंकर सोलंकी का कहना है कि ज्यादा तापमान रहने से शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), लू, चक्कर आना, उल्टी, सिरदर्द और बेहोशी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। सबसे अधिक खतरा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को रहता है। ऐसे में सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक धूप में निकलने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को तेज प्यास, चक्कर, कमजोरी, बुखार या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस, नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते रहना चाहिए।
क्या करें
-दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
-ओआरएस, नींबू पानी, छाछ और फलों का सेवन करें।
-घर से निकलते समय सिर और चेहरा ढकें।
-हल्के रंग के और सूती कपड़े पहनें।
-बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
-धूप से लौटने के बाद तुरंत ठंडा पानी न पीएं।
क्या न करें
-दोपहर 11 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक खुले में निकलें।
-खाली पेट धूप में न जाएं।
-बासी और खुले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
-शरीर में पानी की कमी को नजरअंदाज न करें।
-बंद वाहन में बच्चों या बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें।
-लू या चक्कर आने के लक्षणों को हल्के में न लें।