{"_id":"6a14c002b2185501f2040e7d","slug":"childrens-leave-mothers-new-duties-aligarh-news-c-2-gur1004-982478-2026-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: बच्चों की छुट्टी, मम्मी की लग गई नई ड्यूटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: बच्चों की छुट्टी, मम्मी की लग गई नई ड्यूटी
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Tue, 26 May 2026 03:02 AM IST
विज्ञापन
आदर्श कॉलोनी स्थित आवास पर एकांश गुप्ता का होमवर्क करतीं ज्योतिका गुप्ता।
- फोटो : samvad
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अंकल, मेरा नाम काव्या है। मैं सेकेंड क्लास में हूं। रोज पढ़ती हूं और कितनी पढ़ाई करूं। मैं थक जाती हूं। स्कूल ने बहुत सारा होमवर्क दिया है। मैंने सब मम्मी को दे दिया...यह कहते हुए छह वर्षीय काव्या खुद तो खिलौनों में व्यस्त हो गई, लेकिन पीछे उसकी मां चार्ट पेपर, कैंची और रंगों के बीच बैठकर प्रोजेक्ट पूरा करने में जुटी रहीं।
शाम होने वाली थी और उन्हें बाजार भी जाना था। आवास विकास कॉलोनी के अग्रवाल परिवार का यह दृश्य इन दिनों शहर के हजारों घरों की कहानी बन गया है। बच्चों की गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही स्कूलों से मिले समर प्रोजेक्ट्स ने मम्मियों की नई ड्यूटी लगा दी है।
कहीं थर्माकोल से मॉडल तैयार हो रहे हैं तो कहीं रंगीन चार्ट पर कटिंग-पेस्टिंग चल रही है। छोटे बच्चों को दिए गए कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जिन्हें वे खुद समझ भी नहीं पा रहे। ऐसे में माता-पिता, खासकर मम्मियां, बच्चों के होमवर्क को पूरा कराने में घंटों लगा रही हैं।
विज्ञापन
नौरंगाबाद निवासी खुशबू शर्मा बताती हैं कि उनके बच्चे को छुट्टियों में चार्ट, स्क्रैप बुक और मॉडल बनाने का काम मिला है। शुरुआत में उन्होंने सोचा था कि बच्चा खुद करेगा, लेकिन बाद में समझ आया कि अधिकांश काम उन्हें ही करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अब छुट्टियों में घर के कामों के साथ स्कूल प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी भी जुड़ गई है।
वहीं, आदर्श नगर निवासी ज्योतिका गुप्ता ने बताया कि नौकरी और घर के काम के बीच बच्चों के प्रोजेक्ट्स पूरे करना आसान नहीं है। कई बार देर रात तक बैठकर काम करना पड़ता है। इसलिए कुछ प्रोजेक्ट बाजार से भी तैयार कराने पड़ रहे हैं। इनका बेटा एकांश (क्लास फर्स्ट) पूछने पर बोला, अंकल..स्कूल में पढ़ाई होती है, घर पर नहीं।
एलकेजी के बच्चों को भी मिल रहे कठिन टास्क
आवास विकास कॉलोनी निवासी तनु ने बताया कि उनके एलकेजी में पढ़ने वाले बेटे को पत्तियों से जानवरों की आकृतियां बनाने, चिड़ियों के लिए घोंसला तैयार करने और कविताओं की रिकॉर्डिंग जैसे कार्य दिए गए हैं। उनका कहना है कि इतने छोटे बच्चे यह सब खुद नहीं कर सकते। वहीं, कक्षा दो की छात्रा की मां रूचि ने बताया कि उनकी बेटी को वेस्ट मटेरियल से कलाकृति, वीडियो रिकॉर्डिंग और कई गतिविधियों पर आधारित प्रोजेक्ट दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि छुट्टियां बच्चों की हैं, लेकिन असली मेहनत अब मम्मियों को करनी पड़ रही है।
शाम होने वाली थी और उन्हें बाजार भी जाना था। आवास विकास कॉलोनी के अग्रवाल परिवार का यह दृश्य इन दिनों शहर के हजारों घरों की कहानी बन गया है। बच्चों की गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही स्कूलों से मिले समर प्रोजेक्ट्स ने मम्मियों की नई ड्यूटी लगा दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कहीं थर्माकोल से मॉडल तैयार हो रहे हैं तो कहीं रंगीन चार्ट पर कटिंग-पेस्टिंग चल रही है। छोटे बच्चों को दिए गए कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जिन्हें वे खुद समझ भी नहीं पा रहे। ऐसे में माता-पिता, खासकर मम्मियां, बच्चों के होमवर्क को पूरा कराने में घंटों लगा रही हैं।
Trending Videos
नौरंगाबाद निवासी खुशबू शर्मा बताती हैं कि उनके बच्चे को छुट्टियों में चार्ट, स्क्रैप बुक और मॉडल बनाने का काम मिला है। शुरुआत में उन्होंने सोचा था कि बच्चा खुद करेगा, लेकिन बाद में समझ आया कि अधिकांश काम उन्हें ही करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अब छुट्टियों में घर के कामों के साथ स्कूल प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी भी जुड़ गई है।
वहीं, आदर्श नगर निवासी ज्योतिका गुप्ता ने बताया कि नौकरी और घर के काम के बीच बच्चों के प्रोजेक्ट्स पूरे करना आसान नहीं है। कई बार देर रात तक बैठकर काम करना पड़ता है। इसलिए कुछ प्रोजेक्ट बाजार से भी तैयार कराने पड़ रहे हैं। इनका बेटा एकांश (क्लास फर्स्ट) पूछने पर बोला, अंकल..स्कूल में पढ़ाई होती है, घर पर नहीं।
एलकेजी के बच्चों को भी मिल रहे कठिन टास्क
आवास विकास कॉलोनी निवासी तनु ने बताया कि उनके एलकेजी में पढ़ने वाले बेटे को पत्तियों से जानवरों की आकृतियां बनाने, चिड़ियों के लिए घोंसला तैयार करने और कविताओं की रिकॉर्डिंग जैसे कार्य दिए गए हैं। उनका कहना है कि इतने छोटे बच्चे यह सब खुद नहीं कर सकते। वहीं, कक्षा दो की छात्रा की मां रूचि ने बताया कि उनकी बेटी को वेस्ट मटेरियल से कलाकृति, वीडियो रिकॉर्डिंग और कई गतिविधियों पर आधारित प्रोजेक्ट दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि छुट्टियां बच्चों की हैं, लेकिन असली मेहनत अब मम्मियों को करनी पड़ रही है।