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Chandigarh News: पुलिस गश्त के बावजूद बुड़ैल में कई जगह चल रहा रीफिलिंग का खेल
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चंडीगढ़। बुड़ैल में हुए सिलिंडर ब्लास्ट के बाद इलाके में अवैध गैस रीफिलिंग कारोबार को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता शहबाद राठी ने आरोप लगाया है कि जिस मकान में धमाका हुआ वहां पिछले करीब छह महीनों से गैस सिलिंडरों को स्टॉक कर अवैध रीफिलिंग और ब्लैकिंग का काम किया जा रहा था। लोगों ने सवाल उठाया कि जब इलाके में नियमित पुलिस गश्त होती है, तब आखिर इतने लंबे समय तक सिलिंडरों का अवैध स्टॉक और रीफिलिंग का काम कैसे चलता रहा। उनका कहना है कि बुड़ैल में केवल एक ही जगह नहीं बल्कि कई स्थानों पर अवैध गैस रीफिलिंग का कारोबार संचालित हो रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मकान के नीचे परचून की दुकान संचालित की जा रही थी जबकि ऊपरी मंजिल पर बड़ी संख्या में गैस सिलिंडर रखे गए थे। लोगों का कहना है कि इलाके में यह बात किसी से छिपी नहीं थी और आसपास रहने वाले लोग भी इस अवैध कारोबार के बारे में जानते थे। इसके बावजूद किसी स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई।
तंग गलियां बनीं सबसे बड़ी चुनौती
हादसे के दौरान बुड़ैल की तंग गलियां राहत और बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आईं। आग लगने के बाद दमकल विभाग की बड़ी गाड़ियां घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं। केवल फायर बाइक ही अंदर तक जा पाई। एंबुलेंस भी मौके तक नहीं पहुंच सकी, जिसके चलते घायलों को स्थानीय लोग और पुलिसकर्मी बाइकों और निजी वाहनों से अस्पताल लेकर गए। लोगों का कहना है कि यदि आग और ज्यादा फैल जाती या सिलिंडरों में बड़े स्तर पर धमाके होते, तो हालात बेहद भयावह हो सकते थे। संकरी गलियों और ऊपर-नीचे बने मकानों के बीच किसी बड़े हादसे की स्थिति में राहत और बचाव कार्य करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
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तुरंत विशेष जांच अभियान की मांग
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि बुड़ैल समेत शहर के उन इलाकों में तुरंत विशेष जांच अभियान चलाया जाए, जहां अवैध गैस रीफिलिंग का शक है। साथ ही तंग गलियों वाले क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए जाएं और आपातकालीन पहुंच व्यवस्था बेहतर बनाई जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
स्थानीय लोगों के अनुसार मकान के नीचे परचून की दुकान संचालित की जा रही थी जबकि ऊपरी मंजिल पर बड़ी संख्या में गैस सिलिंडर रखे गए थे। लोगों का कहना है कि इलाके में यह बात किसी से छिपी नहीं थी और आसपास रहने वाले लोग भी इस अवैध कारोबार के बारे में जानते थे। इसके बावजूद किसी स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई।
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तंग गलियां बनीं सबसे बड़ी चुनौती
हादसे के दौरान बुड़ैल की तंग गलियां राहत और बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आईं। आग लगने के बाद दमकल विभाग की बड़ी गाड़ियां घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं। केवल फायर बाइक ही अंदर तक जा पाई। एंबुलेंस भी मौके तक नहीं पहुंच सकी, जिसके चलते घायलों को स्थानीय लोग और पुलिसकर्मी बाइकों और निजी वाहनों से अस्पताल लेकर गए। लोगों का कहना है कि यदि आग और ज्यादा फैल जाती या सिलिंडरों में बड़े स्तर पर धमाके होते, तो हालात बेहद भयावह हो सकते थे। संकरी गलियों और ऊपर-नीचे बने मकानों के बीच किसी बड़े हादसे की स्थिति में राहत और बचाव कार्य करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
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स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि बुड़ैल समेत शहर के उन इलाकों में तुरंत विशेष जांच अभियान चलाया जाए, जहां अवैध गैस रीफिलिंग का शक है। साथ ही तंग गलियों वाले क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए जाएं और आपातकालीन पहुंच व्यवस्था बेहतर बनाई जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।