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Chandigarh News: मलोया में बनेगा 50 बेड का अस्पताल और स्पोर्ट्स कांप्लेक्स
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चंडीगढ़। मलोया में 50 बेड का अस्पताल और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। सोमवार को मलोया के कम्युनिटी सेंटर में आयोजित समाधान शिविर के दौरान प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने प्रशासनिक अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। समाधान शिविर में स्थानीय लोगों ने पूर्व सांसद किरण खेर के समय मंजूर हुए 50 बेड के अस्पताल और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। लोगों ने मांग की कि बढ़ती आबादी को देखते हुए इन परियोजनाओं को जल्द शुरू किया जाए।
प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि मलोया क्षेत्र में करीब एक लाख 20 हजार लोगों की आबादी रहती है। ऐसे में 50 बेड का अस्पताल शुरू होने से शहर के अन्य सरकारी अस्पतालों पर भी मरीजों का दबाव कम होगा और स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। वहीं समाधान शिविर में एक युवा खिलाड़ी ने भी अपनी समस्या रखी। उसने बताया कि उसे रोजाना अभ्यास के लिए सेक्टर-42 स्टेडियम जाना पड़ता है, जिससे काफी परेशानी होती है। घर के पास स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स नहीं होने और लड़की होने के कारण परिवार भी खेल गतिविधियों में जाने से रोकता है। इस पर प्रशासक ने खेल विभाग को मलोया में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
लोग बोले- आवीं का छात्र पढ़ नहीं पाता, प्रशासक ने कहा- मैं एक महीने बाद खुद स्कूल का दौरा करूंगा
प्रशासक गुलाब चंद कटारिया प्रशासन के आला अफसरों के साथ मलोया के लोगों की समस्याएं सुनने पहुंचे। करीब दो घंटे 20 मिनट तक चले शिविर में प्रशासक 84 के करीब लोगों की समस्याएं सुकीं। इस दौरान ज्यादातर लोगों ने क्षेत्र के स्कूलों की खराब शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया। लोगों ने बताया कि मलोया में एक सीनियर सेकेंडरी और तीन हाई स्कूल होने के बावजूद शिक्षकों की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि आठवीं कक्षा का छात्र ठीक से किताब तक नहीं पढ़ पा रहा और 120 छात्रों पर एक शिक्षक तैनात है। प्रशासक ने मौके पर मौजूद शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक को तलब किया। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही 178 पीजीटी और 68 टीजीटी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही मलोया हाई स्कूल में 11 करोड़ रुपये की लागत से नया इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर उसे सीनियर सेकेंडरी स्कूल बनाया जाएगा। प्रशासक ने कहा कि वह एक महीने बाद खुद स्कूलों का दौरा करेंगे। इस दौरान मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, मेयर सौरभ जोशी, वित्त सचिव दिप्रवा लाकड़ा और डीसी निशांत कुमार यादव समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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लैंड पूलिंग और पीआर-5 रोड का मुद्दा उठा
समाधान शिविर के दौरान लैंड पूलिंग और पीआर-5 रोड निर्माण का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। स्थानीय निवासियों ने इन परियोजनाओं में तेजी लाने की मांग की। इस पर प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने संबंधित अधिकारियों को मामले का अध्ययन कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। आवास संबंधी मुद्दे पर प्रशासक ने स्पष्ट किया कि मलोया में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत आवंटित मकानों को खाली नहीं कराया जाएगा। हालांकि उन्होंने कहा कि लाभार्थियों को निर्धारित किराया नियमित रूप से जमा कराना होगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य लोगों को राहत देना है, लेकिन नियमों का पालन भी जरूरी है। कार्यक्रम में शिक्षा और खेल को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन की छात्रवृत्ति योजनाओं का भी जिक्र किया गया। बताया गया कि पिछले दो वर्षों में विद्यार्थियों को करीब 31 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली है।
घुटने पर बैठा गोवंश समर्थक, प्रशासक से बोला- इच्छामृत्यु दे दी जाए
समाधान शिविर में प्रशासक के समक्ष एक बार फिर 60 से अधिक गोवंश मृत्यु का मामला उठा। इस मामले में डीएम ने एक कमेटी गठित की थी, इस कमेटी की सिफारिश पर अब तक कोई बड़ा एक्शन नहीं हुआ। इस पर शिविर में पहुंचे एक गोवंश समर्थक ने प्रशासक से कहा कि अब तक इस मामले में कोई एक्शन नहीं हुआ। जब प्रशासक ने कहा कि जांच रिपोर्ट में अधिकारियों की कोई गलती सामने नहीं आई, इंसिनेटर प्लांट तकनीकी रूप से खराब पड़ा था और वहां मृत गोवंश लंबे समय से इकट्ठे हो रहे थे। इस पर गोवंश समर्थक प्रशासक के समक्ष घुटने पर बैठ गया और बोला कि वह गोवंश समर्थक है, वह ऐसा नहीं देख पाया, इसलिए उसे इच्छामृत्यु दे दी जाए।
82 में से 61 शिकायतों का निवारण किया गया
अब तक प्रशासन की ओर से तीन समाधान शिविर लगाए गए। इनमें डड्डूमाजरा समाधान शिविर में प्राप्त 82 शिकायतों में से 61 का निस्तारण किया जा चुका है, 16 मामलों पर कार्रवाई जारी है जबकि 5 मामले नीतिगत विषयों से संबंधित हैं। इसी प्रकार हल्लोमाजरा समाधान शिविर में प्राप्त 54 शिकायतों में से 24 का समाधान किया जा चुका है, 14 मामलों पर कार्य प्रगति पर है तथा लगभग 5-6 मामले नीतिगत प्रकृति के हैं। मलोया में लगाए शिविर में 84 शिकायतें सामने आई। मलोया के काम्युनिटी सेंटर में लगाए शिविर में इतनी ज्यादा संख्या में लोग शिकायत लेकर पहुंचे कि काम्युनिटी सेंटर छोटा पड़ गया। लोगों को अलग-अलग शिफ्ट में अंदर बुलाकर प्रशासक ने समस्याएं सुनी।
प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि मलोया क्षेत्र में करीब एक लाख 20 हजार लोगों की आबादी रहती है। ऐसे में 50 बेड का अस्पताल शुरू होने से शहर के अन्य सरकारी अस्पतालों पर भी मरीजों का दबाव कम होगा और स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। वहीं समाधान शिविर में एक युवा खिलाड़ी ने भी अपनी समस्या रखी। उसने बताया कि उसे रोजाना अभ्यास के लिए सेक्टर-42 स्टेडियम जाना पड़ता है, जिससे काफी परेशानी होती है। घर के पास स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स नहीं होने और लड़की होने के कारण परिवार भी खेल गतिविधियों में जाने से रोकता है। इस पर प्रशासक ने खेल विभाग को मलोया में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
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लोग बोले- आवीं का छात्र पढ़ नहीं पाता, प्रशासक ने कहा- मैं एक महीने बाद खुद स्कूल का दौरा करूंगा
प्रशासक गुलाब चंद कटारिया प्रशासन के आला अफसरों के साथ मलोया के लोगों की समस्याएं सुनने पहुंचे। करीब दो घंटे 20 मिनट तक चले शिविर में प्रशासक 84 के करीब लोगों की समस्याएं सुकीं। इस दौरान ज्यादातर लोगों ने क्षेत्र के स्कूलों की खराब शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया। लोगों ने बताया कि मलोया में एक सीनियर सेकेंडरी और तीन हाई स्कूल होने के बावजूद शिक्षकों की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि आठवीं कक्षा का छात्र ठीक से किताब तक नहीं पढ़ पा रहा और 120 छात्रों पर एक शिक्षक तैनात है। प्रशासक ने मौके पर मौजूद शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक को तलब किया। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही 178 पीजीटी और 68 टीजीटी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही मलोया हाई स्कूल में 11 करोड़ रुपये की लागत से नया इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर उसे सीनियर सेकेंडरी स्कूल बनाया जाएगा। प्रशासक ने कहा कि वह एक महीने बाद खुद स्कूलों का दौरा करेंगे। इस दौरान मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, मेयर सौरभ जोशी, वित्त सचिव दिप्रवा लाकड़ा और डीसी निशांत कुमार यादव समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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लैंड पूलिंग और पीआर-5 रोड का मुद्दा उठा
समाधान शिविर के दौरान लैंड पूलिंग और पीआर-5 रोड निर्माण का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। स्थानीय निवासियों ने इन परियोजनाओं में तेजी लाने की मांग की। इस पर प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने संबंधित अधिकारियों को मामले का अध्ययन कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। आवास संबंधी मुद्दे पर प्रशासक ने स्पष्ट किया कि मलोया में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत आवंटित मकानों को खाली नहीं कराया जाएगा। हालांकि उन्होंने कहा कि लाभार्थियों को निर्धारित किराया नियमित रूप से जमा कराना होगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य लोगों को राहत देना है, लेकिन नियमों का पालन भी जरूरी है। कार्यक्रम में शिक्षा और खेल को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन की छात्रवृत्ति योजनाओं का भी जिक्र किया गया। बताया गया कि पिछले दो वर्षों में विद्यार्थियों को करीब 31 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली है।
घुटने पर बैठा गोवंश समर्थक, प्रशासक से बोला- इच्छामृत्यु दे दी जाए
समाधान शिविर में प्रशासक के समक्ष एक बार फिर 60 से अधिक गोवंश मृत्यु का मामला उठा। इस मामले में डीएम ने एक कमेटी गठित की थी, इस कमेटी की सिफारिश पर अब तक कोई बड़ा एक्शन नहीं हुआ। इस पर शिविर में पहुंचे एक गोवंश समर्थक ने प्रशासक से कहा कि अब तक इस मामले में कोई एक्शन नहीं हुआ। जब प्रशासक ने कहा कि जांच रिपोर्ट में अधिकारियों की कोई गलती सामने नहीं आई, इंसिनेटर प्लांट तकनीकी रूप से खराब पड़ा था और वहां मृत गोवंश लंबे समय से इकट्ठे हो रहे थे। इस पर गोवंश समर्थक प्रशासक के समक्ष घुटने पर बैठ गया और बोला कि वह गोवंश समर्थक है, वह ऐसा नहीं देख पाया, इसलिए उसे इच्छामृत्यु दे दी जाए।
82 में से 61 शिकायतों का निवारण किया गया
अब तक प्रशासन की ओर से तीन समाधान शिविर लगाए गए। इनमें डड्डूमाजरा समाधान शिविर में प्राप्त 82 शिकायतों में से 61 का निस्तारण किया जा चुका है, 16 मामलों पर कार्रवाई जारी है जबकि 5 मामले नीतिगत विषयों से संबंधित हैं। इसी प्रकार हल्लोमाजरा समाधान शिविर में प्राप्त 54 शिकायतों में से 24 का समाधान किया जा चुका है, 14 मामलों पर कार्य प्रगति पर है तथा लगभग 5-6 मामले नीतिगत प्रकृति के हैं। मलोया में लगाए शिविर में 84 शिकायतें सामने आई। मलोया के काम्युनिटी सेंटर में लगाए शिविर में इतनी ज्यादा संख्या में लोग शिकायत लेकर पहुंचे कि काम्युनिटी सेंटर छोटा पड़ गया। लोगों को अलग-अलग शिफ्ट में अंदर बुलाकर प्रशासक ने समस्याएं सुनी।