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प. एशिया संकट: अमेरिका और ईरान ने अस्थायी संघर्ष विराम 60 दिन बढ़ाने पर जताई सहमति, ट्रंप देंगे अंतिम मंजूरी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 28 May 2026 10:56 PM IST
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अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम को 60 दिन बढ़ाने और परमाणु वार्ता शुरू करने पर अस्थायी सहमति बनी है, लेकिन इसे अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी मिलनी बाकी है। इसी बीच दोनों देशों पर एक-दूसरे के खिलाफ संघर्ष विराम उल्लंघन और हमलों के आरोप लग रहे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है। पढ़िए रिपोर्ट-
अमेरिका-ईरान के राष्ट्रीय ध्वज (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
अमेरिका और ईरान के वार्ताकारों ने गुरुवार को तीन महीने पुराने युद्ध में संघर्ष विराम को 60 दिन बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने को लेकर एक अस्थायी समझौता किया है। मामले से परिचित एक अमेरिकी अधिकारी ने यह जानकारी दी।
यह अधिकारी सार्वजनिक रूप से बयान देने के लिए अधिकृत नहीं था और उसने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि इस समझौते को अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है। ईरान ने तुरंत इस संभावित समझौते की पुष्टि नहीं की।
दोनों पक्षों के बीच बना यह अस्थायी समझौता ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी संघर्ष विराम कमजोर होता नजर आ रहा था।
ये भी पढ़ें: इस्राइल में भी खुफिया जानकारी लीक?: प्रधानमंत्री के करीबी पर शिकंजा, जानें कौन से दस्तावेज लीक करने का आरोप
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संघर्ष विराम पर तनाव बढ़ा
अमेरिकी सेना ने गुरुवार को आरोप लगाया कि ईरान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है, जब कुवैत ने बताया कि अमेरिकी हमले के बाद उस पर मिसाइल हमला हुआ। इसे मौजूदा शांति समझौते का गंभीर उल्लंघन बताया गया।
अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि बुधवार देर रात कुवैत ने ईरान से दागी गई मिसाइलों को रोक लिया। सेना ने इसे अमेरिका के प्रमुख सहयोगी देश पर हमला बताया। कुवैत ने पहले अपने क्षेत्र पर हमले की पुष्टि की थी, जबकि ईरान ने कहा कि उसने एक अमेरिकी अड्डे पर जवाबी कार्रवाई की है। हालांकि, उसने देश का नाम नहीं लिया।
जवाबी हमले और आरोप
घटना उस समय हुई, जब अमेरिकी सेना ने बुधवार देर रात ईरान पर नए हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास चार ड्रोन मार गिराए। साथ ही ईरान के बंदर अब्बास में एक ड्रोन नियंत्रण केंद्र को भी निशाना बनाया गया।
दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद पूर्ण युद्ध से बचते हुए बातचीत जारी रखे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि बातचीत में प्रगति हो रही है।
सोमवार को अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट और नावों पर 'आत्मरक्षा' के तहत हमले किए थे।
क्षेत्र में तनाव बढ़ा
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बंदर अब्बास हवाई अड्डे पर हुए हमले की पुष्टि की और जवाबी कार्रवाई की बात कही। लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि हमला कुवैत पर था या नहीं। कुवैत ने कहा कि उसकी रक्षा प्रणाली ने मिसाइलों और ड्रोन को रोक लिया।
कुवैत इससे पहले भी ईरान और उसके समर्थित समूहों के हमलों का निशाना बन चुका है।
अमेरिका और ईरान क्या चाहते हैं?
राष्ट्रपति ट्रंप इस समझौते के जरिये होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, ईरान चाहता है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और उसकी जब्त संपत्तियां वापस की जाएं। ईरान ने यह भी मांग की है कि किसी भी समझौते में इस्राइल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई बंद होनी चाहिए।
लेबनान और इस्राइल में भी तनाव
अप्रैल के मध्य में लेबनान-इस्राइल के बीच संघर्ष विराम हुआ था। लेकिन इसे बार-बार चुनौती मिली है। इस्राइल और लेबनान के सैन्य अधिकारी शुक्रवार को वॉशिंगटन में पहली सुरक्षा वार्ता करेंगे। इस्राइल ने हाल ही में बेरूत और दक्षिण लेबनान के टायर शहर में हवाई हमले किए, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई।
यह अधिकारी सार्वजनिक रूप से बयान देने के लिए अधिकृत नहीं था और उसने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि इस समझौते को अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है। ईरान ने तुरंत इस संभावित समझौते की पुष्टि नहीं की।
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दोनों पक्षों के बीच बना यह अस्थायी समझौता ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी संघर्ष विराम कमजोर होता नजर आ रहा था।
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संघर्ष विराम पर तनाव बढ़ा
अमेरिकी सेना ने गुरुवार को आरोप लगाया कि ईरान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है, जब कुवैत ने बताया कि अमेरिकी हमले के बाद उस पर मिसाइल हमला हुआ। इसे मौजूदा शांति समझौते का गंभीर उल्लंघन बताया गया।
अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि बुधवार देर रात कुवैत ने ईरान से दागी गई मिसाइलों को रोक लिया। सेना ने इसे अमेरिका के प्रमुख सहयोगी देश पर हमला बताया। कुवैत ने पहले अपने क्षेत्र पर हमले की पुष्टि की थी, जबकि ईरान ने कहा कि उसने एक अमेरिकी अड्डे पर जवाबी कार्रवाई की है। हालांकि, उसने देश का नाम नहीं लिया।
जवाबी हमले और आरोप
घटना उस समय हुई, जब अमेरिकी सेना ने बुधवार देर रात ईरान पर नए हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास चार ड्रोन मार गिराए। साथ ही ईरान के बंदर अब्बास में एक ड्रोन नियंत्रण केंद्र को भी निशाना बनाया गया।
दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद पूर्ण युद्ध से बचते हुए बातचीत जारी रखे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि बातचीत में प्रगति हो रही है।
सोमवार को अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट और नावों पर 'आत्मरक्षा' के तहत हमले किए थे।
क्षेत्र में तनाव बढ़ा
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बंदर अब्बास हवाई अड्डे पर हुए हमले की पुष्टि की और जवाबी कार्रवाई की बात कही। लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि हमला कुवैत पर था या नहीं। कुवैत ने कहा कि उसकी रक्षा प्रणाली ने मिसाइलों और ड्रोन को रोक लिया।
कुवैत इससे पहले भी ईरान और उसके समर्थित समूहों के हमलों का निशाना बन चुका है।
अमेरिका और ईरान क्या चाहते हैं?
राष्ट्रपति ट्रंप इस समझौते के जरिये होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, ईरान चाहता है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और उसकी जब्त संपत्तियां वापस की जाएं। ईरान ने यह भी मांग की है कि किसी भी समझौते में इस्राइल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई बंद होनी चाहिए।
लेबनान और इस्राइल में भी तनाव
अप्रैल के मध्य में लेबनान-इस्राइल के बीच संघर्ष विराम हुआ था। लेकिन इसे बार-बार चुनौती मिली है। इस्राइल और लेबनान के सैन्य अधिकारी शुक्रवार को वॉशिंगटन में पहली सुरक्षा वार्ता करेंगे। इस्राइल ने हाल ही में बेरूत और दक्षिण लेबनान के टायर शहर में हवाई हमले किए, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई।