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CBSE: अब नौवीं-दसवीं में तीन भाषाएं पढ़ना होगा अनिवार्य, तीसरी भाषा पर सस्पेंस; एक जुलाई से खुल रहे स्कूल
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 18 Jun 2026 09:00 AM IST
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सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 9 में तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया है, जिनमें दो भारतीय भाषाएं होंगी। हालांकि 1 जुलाई से स्कूल खुलने वाले हैं, लेकिन तीसरी भाषा, उसकी किताब और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अब भी स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
सीबीएसई
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विस्तार
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी- 2020) और राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा ढांचा (एनसीएफ-एसई-2023) के तहत 9वीं में तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया है, जिनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए। 1 जुलाई से विद्यालय खुलने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक यह तय नहीं हुआ कि कक्षा 9 में तीसरी भाषा के रूप में कौन सी भाषा और किताबों से पढ़ाई कराई जानी है।
निजी सीबीएसई स्कूल की निदेशक दीपिका त्यागी बताती हैं कि तीन-भाषा फार्मूले को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। फिलहाल सीबीएसई के सुझाव पर कक्षा 9 के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा के तौर पर कक्षा 6 की संस्कृत किताबों से पढ़ाया जाएगा। एसोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल्स ऑफ आगरा (अप्सा) सचिव गिरधर शर्मा बताते हैं अभी तक न तो पाठ्यक्रम को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले हैं और न ही यह बताया गया है कि छात्रों का मूल्यांकन किस प्रकार किया जाएगा।
अप्सा अध्यक्ष सुशील गुप्ता ने बताया कि आगरा में सीबीएसई के कुछ ही स्कूलों में फ्रेंच या जर्मन पढ़ाई जाती है। हमारे स्कूल में भी जर्मन भाषा छात्रों को पढ़ाई जाती थी, लेकिन नए नियम के तहत दो भारतीय भाषा जरूरी है इसलिए हमने जर्मन भाषा के शिक्षक को हटा दिया है। सीबीएसई का सुझाव हैं कि कक्षा 6 की संस्कृत की किताब से पढ़ाया जाए हम भी उसी को ही फॉलो करेंगे।
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निजी सीबीएसई स्कूल की निदेशक दीपिका त्यागी बताती हैं कि तीन-भाषा फार्मूले को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। फिलहाल सीबीएसई के सुझाव पर कक्षा 9 के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा के तौर पर कक्षा 6 की संस्कृत किताबों से पढ़ाया जाएगा। एसोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल्स ऑफ आगरा (अप्सा) सचिव गिरधर शर्मा बताते हैं अभी तक न तो पाठ्यक्रम को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले हैं और न ही यह बताया गया है कि छात्रों का मूल्यांकन किस प्रकार किया जाएगा।
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अप्सा अध्यक्ष सुशील गुप्ता ने बताया कि आगरा में सीबीएसई के कुछ ही स्कूलों में फ्रेंच या जर्मन पढ़ाई जाती है। हमारे स्कूल में भी जर्मन भाषा छात्रों को पढ़ाई जाती थी, लेकिन नए नियम के तहत दो भारतीय भाषा जरूरी है इसलिए हमने जर्मन भाषा के शिक्षक को हटा दिया है। सीबीएसई का सुझाव हैं कि कक्षा 6 की संस्कृत की किताब से पढ़ाया जाए हम भी उसी को ही फॉलो करेंगे।
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