सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   AI to Detect Bone Tumors Predict Arthritis and Surgery Success Rate

Health: एआई बताएगा हड्डी में है ट्यूमर है कि नहीं, कितने वर्षों में होगा गठिया; सर्जरी की सफलता भी करेगा तय

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 21 Feb 2026 11:54 AM IST
विज्ञापन
सार

यूपीऑर्थोकॉन में विशेषज्ञों ने बताया कि एआई अब एक्स-रे, सीटी-एमआरआई और रक्त जांच के आधार पर हड्डी के ट्यूमर, टीबी और गठिया की सटीक भविष्यवाणी करेगा। ऑपरेशन से पहले इम्प्लांट की गुणवत्ता और बाद में संक्रमण के खतरे तक की जानकारी भी एआई देगा।
 

AI to Detect Bone Tumors Predict Arthritis and Surgery Success Rate
यूपीऑर्थोकॉन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार

चिकित्सकीय क्षेत्र में भी एआई क्रांतिकारी साबित हो रहा है। ये हड्डी में ट्यूमर है कि नहीं, कितने वर्षों में गठिया पनपेगा। इसकी सटीक जानकारी देगा। यहां तक कि ऑपरेशन के बाद मरीज का प्रत्यारोपण कितने समय तक सफल रहेगा, ये भी बताएगा। माल रोड स्थित होटल में शुक्रवार को शुरू हुए तीन दिवसीय यूपीऑर्थोकॉन में डॉक्टरों ने एआई के महत्व पर व्याख्यान दिए।
Trending Videos


यूपी आर्थोपेडिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. पीयूष कुमार मिश्रा ने बताया कि एआई का चिकित्सा में उपयोग शुरू हो गया है। ये तीन चरणों में कार्य करता है। ये मरीज के एक्सरे, सीटी-एमआरआई और रक्त संबंधी जांच की रिपोर्ट के आधार पर बताएगा कि इनके गठिया है कि नहीं, कितने साल में पनप जाएगा। हड्डी में टीबी या फिर अन्य का ट्यूमर है कि नहीं। दूसरे में ऑपरेशन की प्री-प्लानिंग कर संबंधित मरीज के लिए जरूरी इम्प्लांट में प्लेट का आकार, गुणवत्ता और सक्सेज रेट भी बता देगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


तीसरे चरण में पोस्ट ऑपरेशन के बाद मरीज में संक्रमण का खतरा, प्रत्यारोपण कब तक चलेगा, इसकी भी सटीक जानकारी देगा। समय रहते बीमारी का पता चलने से इलाज और बचाव हो सकेगा। ऑपरेशन सटीक होने से सफलता दर बढ़ेगी। रोबोटिक सर्जरी के बारे में उन्होंने बताया कि अच्छी गुणवत्ता के रोबोट 5-6 करोड़ रुपये के आ रहे हैं। ये अभी निर्यात करने पड़ रहे हैं। महंगा होने के कारण इसकी सर्जरी भी खर्चीली है।


मोच आने पर न कराएं मालिश, लिगामेंट को पहुंचेगी क्षति
नई दिल्ली के स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर के यूनिट हेड डॉ. स्कंद सिन्हा ने बताया कि लिंगामेंट टूटने-फटने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। 70 फीसदी मरीज खिलाड़ी और बाकी के सामान्य लोग हैं। कई ऐसे भी मरीज हैं जिनके पैर मुड़ने से मोच आ जाती है जिसमें लिगामेंट को नुकसान पहुंचता है। इसमें कई बार मरीज विशेषज्ञ को न दिखाकर मालिश और देसी उपचार कर लेते हैं। मालिश से लिगामेंट को और क्षति पहुंचती है। इससे परेशानी ठीक न होकर लंबे समय तक रहती है। कई बार ताउम्र परेशानी बन जाती है।


ये करें:
- रोजाना 8-10 हजार कदम पैदल जरूर चलें।
- विटामिन और कैल्शियम की कमी न होने दें।
- ज्यादा ऊंची हील की चप्पल-जूता पहनने से बचें।
- वजन न बढ़ने दें, पैरों का व्यायाम जरूर करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed