लखनऊ। गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में तीन दिवसीय नाट्य समारोह का आगाज सोमवार को नाटक कांच के खिलौने के मंचन के साथ हुआ। आकांक्षा थिएटर आर्ट्स, लखनऊ की प्रस्तुति ने मध्यवर्गीय परिवारों के टूटते रिश्तों, युवाओं की महत्वाकांक्षाओं और पीढ़ियों के टकराव को संवेदनशील ढंग से दर्शाया। प्रसिद्ध नाटककार टेनेसी विलियम्स की मूल रचना का रूपांतरण सौरभ श्रीवास्तव ने किया। कहानी एक ऐसे परिवार की है, जिसमें मां आनंदा सिन्हा, बेटा रोहन और बेटी मीनाक्षी अपने संघर्षों और अधूरे सपनों के बीच जी रहे हैं। पिता वर्षों पहले परिवार छोड़ चुके हैं। नाटक में रिश्तों की नाजुकता और उम्मीदों के टूटने को ‘कांच के खिलौने’ के प्रतीक के जरिये प्रभावी ढंग से दिखाया गया। नाटक का निर्देशन रंग निर्देशक तुषार बाजपेई शुभम ने किया। दिव्याजीत गुप्ता, अंकुर सक्सेना, मुस्कान सोनी और अभिषेक कुमार सिंह ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को भावुक कर दिया। 60 दिवसीय कार्यशाला के कलाकारों की प्रस्तुति को खूब सराहना मिली।

कांच के खिलौने के मंचन में दिखा रिश्तों के टूटने का दर्द

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कांच के खिलौने के मंचन में दिखा रिश्तों के टूटने का दर्द

कांच के खिलौने के मंचन में दिखा रिश्तों के टूटने का दर्द

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