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CPIM Election: बंगाल में भाजपा की जीत से माकपा चिंतित, चुनावी हार के बाद संगठन और रणनीति की होगी समीक्षा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 26 May 2026 03:06 AM IST
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सार
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माकपा ने हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों की समीक्षा करते हुए पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत और हिंदुत्व ताकतों के मजबूत होने पर चिंता जताई है। पार्टी ने केरल, बंगाल, तमिलनाडु और असम में संगठनात्मक समीक्षा शुरू करने की बात कही। माकपा का कहना है कि वह जनता के मुद्दों और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

CPIM Concerned Over BJPs Victory in Bengal Organization and Strategy to be Reviewed Following Electoral Defeat
CPIM की नई रणनीति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद माकपा ने अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति को लेकर गंभीर मंथन शुरू कर दिया है। पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक में पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत और समाज में हिंदुत्व ताकतों के मजबूत होने पर चिंता जताई गई। नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद जारी बयान में पार्टी ने कहा कि चुनाव नतीजों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी और संगठन की कमजोरियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। माकपा ने यह भी कहा कि वह जनता के मुद्दों और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।



आखिर माकपा ने चुनाव परिणामों पर क्या कहा?
22 से 24 मई तक नई दिल्ली में माकपा केंद्रीय समिति की बैठक हुई। बैठक में केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम के चुनाव परिणामों की प्रारंभिक समीक्षा की गई। पार्टी ने माना कि कई राज्यों में उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली। माकपा ने खास तौर पर पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़ती ताकत को गंभीर राजनीतिक चुनौती बताया। पार्टी का कहना है कि समाज में सांप्रदायिक राजनीति का बढ़ना लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतों के लिए चिंता का विषय है।
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केरल और बंगाल में अब क्या रणनीति बनेगी?
माकपा ने कहा कि केरल में हार के कारणों को समझने के लिए राज्य समिति अलग-अलग स्तरों से सुझाव जुटा रही है। इन सुझावों पर जून में तिरुवनंतपुरम में होने वाली बैठकों में विस्तार से चर्चा की जाएगी। वहीं पश्चिम बंगाल में भी पार्टी की सभी इकाइयों से राय ली जाएगी और जून के अंत तक समीक्षा रिपोर्ट तैयार की जाएगी। तमिलनाडु और असम में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई है। पार्टी का कहना है कि समीक्षा के आधार पर संगठनात्मक बदलाव और रणनीतिक सुधार किए जाएंगे।

भाजपा की जीत पर माकपा ने क्यों जताई चिंता?
माकपा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत और असम में उसकी सत्ता में वापसी से सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा मिलने की आशंका है। पार्टी ने कहा कि भले ही भाजपा को केरल और तमिलनाडु में सीमित सफलता मिली हो, लेकिन उसका विस्तार लगातार हो रहा है। माकपा ने इसे लोकतांत्रिक और प्रगतिशील राजनीति के लिए चुनौती बताया। पार्टी ने यह भी कहा कि वह सांप्रदायिक सौहार्द और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

पार्टी ने कहा कि उसके निर्वाचित प्रतिनिधि जनता के मुद्दों को सदनों में उठाएंगे और कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। माकपा ने तमिलनाडु की नई सरकार से भी संविधान, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की उम्मीद जताई। केंद्रीय समिति जुलाई 2026 के दूसरे पखवाड़े में फिर बैठक करेगी, जिसमें सभी राज्यों की समीक्षा रिपोर्ट पर अंतिम चर्चा होगी। इसके बाद पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

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