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Chandigarh News: युद्ध विराम से चंडीगढ़ के उद्योगों को राहत, कारोबार में 20 फीसदी उछाल की उम्मीद
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चंडीगढ़। वैश्विक युद्ध विराम की घोषणा के बाद चंडीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में राहत और उत्साह का माहौल है। कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति और आयात-निर्यात मार्गों के सामान्य होने की उम्मीद से उद्योग जगत को बड़ा संबल मिला है। विशेष रूप से दवा उद्योग, फास्टनर्स और ट्रैक्टर के पुर्जे बनाने वाली इकाइयों को आने वाले एक-दो महीनों में कारोबार में सुधार की उम्मीद है।
चंडीगढ़ का औद्योगिक क्षेत्र एक प्रमुख इंजीनियरिंग और विनिर्माण केंद्र माना जाता है। यहां 2,950 से अधिक लघु उद्योग और करीब 15 बड़े एवं मध्यम स्तर के उद्योग संचालित हैं। कुल औद्योगिक इकाइयों में से लगभग 40 फीसदी ट्रैक्टर के पुर्जे और अन्य इंजीनियरिंग घटकों का निर्माण करती हैं। वहीं फास्टनर उद्योग भी एशिया के बड़े विनिर्माण केंद्रों में गिना जाता है।
कारोबारियों का कहना है कि युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई थी, जिससे कच्चे माल की उपलब्धता और लागत दोनों पर असर पड़ा। अब हालात सामान्य होने से उत्पादन और निर्यात गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
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कच्चे माल की समय पर आपूर्ति से मिलेगी राहत
युद्ध के दौरान जीवन रक्षक दवाओं में इस्तेमाल होने वाले सक्रिय फार्मास्युटिकल घटकों (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित रही, जिससे उत्पादन लागत में 40 फीसदी तक वृद्धि हुई। अब कच्चा माल समय पर मिलने की उम्मीद है, जिससे लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा। - अरुण गोयल, मालिक, फार्मा कंपनी
कारोबार में 15 से 20 फीसदी बढ़ोतरी की संभावना
युद्ध से पैदा हुई अनिश्चितता के कारण वाणिज्यिक ईंधन और कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित हुई थी। शांति समझौते के बाद चंडीगढ़ औद्योगिक क्षेत्र के सालाना कारोबार में 15 से 20 फीसदी तक वृद्धि की संभावना है। - नवीन मंगलानी, उपाध्यक्ष, चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्री
निर्यातकों का भरोसा बढ़ेगा, नए ऑर्डर मिलेंगे
युद्ध विराम से समुद्री माल ढुलाई और बीमा दरों में कमी आएगी। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से परिवहन लागत भी घटेगी। खाड़ी मार्गों पर जोखिम कम होने से निर्यातकों का भरोसा बढ़ा है और वे नए ऑर्डर लेने के लिए तैयार हैं। - अवि भसीन, प्रेसीडेंट, लघु उद्योग भारती
चंडीगढ़ का औद्योगिक क्षेत्र एक प्रमुख इंजीनियरिंग और विनिर्माण केंद्र माना जाता है। यहां 2,950 से अधिक लघु उद्योग और करीब 15 बड़े एवं मध्यम स्तर के उद्योग संचालित हैं। कुल औद्योगिक इकाइयों में से लगभग 40 फीसदी ट्रैक्टर के पुर्जे और अन्य इंजीनियरिंग घटकों का निर्माण करती हैं। वहीं फास्टनर उद्योग भी एशिया के बड़े विनिर्माण केंद्रों में गिना जाता है।
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कारोबारियों का कहना है कि युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई थी, जिससे कच्चे माल की उपलब्धता और लागत दोनों पर असर पड़ा। अब हालात सामान्य होने से उत्पादन और निर्यात गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
कच्चे माल की समय पर आपूर्ति से मिलेगी राहत
युद्ध के दौरान जीवन रक्षक दवाओं में इस्तेमाल होने वाले सक्रिय फार्मास्युटिकल घटकों (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित रही, जिससे उत्पादन लागत में 40 फीसदी तक वृद्धि हुई। अब कच्चा माल समय पर मिलने की उम्मीद है, जिससे लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा। - अरुण गोयल, मालिक, फार्मा कंपनी
कारोबार में 15 से 20 फीसदी बढ़ोतरी की संभावना
युद्ध से पैदा हुई अनिश्चितता के कारण वाणिज्यिक ईंधन और कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित हुई थी। शांति समझौते के बाद चंडीगढ़ औद्योगिक क्षेत्र के सालाना कारोबार में 15 से 20 फीसदी तक वृद्धि की संभावना है। - नवीन मंगलानी, उपाध्यक्ष, चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्री
निर्यातकों का भरोसा बढ़ेगा, नए ऑर्डर मिलेंगे
युद्ध विराम से समुद्री माल ढुलाई और बीमा दरों में कमी आएगी। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से परिवहन लागत भी घटेगी। खाड़ी मार्गों पर जोखिम कम होने से निर्यातकों का भरोसा बढ़ा है और वे नए ऑर्डर लेने के लिए तैयार हैं। - अवि भसीन, प्रेसीडेंट, लघु उद्योग भारती