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Siddharthnagar News: मनरेगा में कर लिया 84 हजार अधिक भुगतान, प्रशासक और सचिव से होगी रिकवरी
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 19 Jun 2026 12:22 AM IST
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सिद्धार्थनगर। जोगिया ब्लॉक के ग्राम पंचायत हरैया में मनरेगा द्वारा मिट्टी पटाई के छह कार्यों में 84,735 रुपये अधिक भुगतान का मामला सामने आया है। मामले में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने तत्कालीन ग्राम प्रधान और वर्तमान प्रशासक अब्दुल कय्यूम से अधिक भुगताय्की धनराशि का एक तिहाई हिस्सा रिकवरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अवशेष धनराशि की वसूली संबंधित ग्राम सचिव और तकनीकी सहायक से जिला विकास अधिकारी व उपायुक्त श्रम रोजगार के स्तर से करने के निर्देश दिए हैं। इस तरह तीनों से 28245-28245 रुपये की वसूली की जाएगी।
जोगिया ब्लॉक की ग्राम पंचायत हरैया में कपिलदेव द्वारा डीएम को शिकायती पत्र देकर मनरेगा से कराए गए चक रोड पटाई समेत अन्य कार्य में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। डीएम ने जिला उद्यान अधिकारी और अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को जांच अधिकारी नामित किया था। जांच मनरेगा से कराए गए छह अलग-अलग कार्यों में 11119.51 रुपये, 21247.29 रुपये, 15721.86 रुपये 14695.75 रुपये, 13804.56 रुपये तथा 8147.61 रुपये का अधिक भुगतान करना पाया गया। हालांकि तत्कालीन प्रधान व वर्तमान प्रशासक द्वारा सफाई दी गई कि उनकी ग्राम पंचायत बाढ़ के समय पानी में डूबी रहती है, ऐसी स्थिति में मिट्टी के कार्यों में 10 प्रतिशत मिट्टी का बह जाना स्वाभाविक है। कार्य के तीन वर्ष बाद 10 प्रतिशत से कम के विचलन को किसी भी प्रकार से अनियमितता की श्रेणी में नही माना जा सकता। जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के मिलने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित मामले में सरकारी धनराशि की वसूली के निर्देश दिए हैं।
जोगिया ब्लॉक की ग्राम पंचायत हरैया में कपिलदेव द्वारा डीएम को शिकायती पत्र देकर मनरेगा से कराए गए चक रोड पटाई समेत अन्य कार्य में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। डीएम ने जिला उद्यान अधिकारी और अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को जांच अधिकारी नामित किया था। जांच मनरेगा से कराए गए छह अलग-अलग कार्यों में 11119.51 रुपये, 21247.29 रुपये, 15721.86 रुपये 14695.75 रुपये, 13804.56 रुपये तथा 8147.61 रुपये का अधिक भुगतान करना पाया गया। हालांकि तत्कालीन प्रधान व वर्तमान प्रशासक द्वारा सफाई दी गई कि उनकी ग्राम पंचायत बाढ़ के समय पानी में डूबी रहती है, ऐसी स्थिति में मिट्टी के कार्यों में 10 प्रतिशत मिट्टी का बह जाना स्वाभाविक है। कार्य के तीन वर्ष बाद 10 प्रतिशत से कम के विचलन को किसी भी प्रकार से अनियमितता की श्रेणी में नही माना जा सकता। जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के मिलने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित मामले में सरकारी धनराशि की वसूली के निर्देश दिए हैं।
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