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हत्यारे पति को सात वर्ष की सजा
Lalitpur
Updated Fri, 15 Apr 2016 01:14 AM IST
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ललितपुर। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दहेज हत्या में पति को दोषी पाते हुए सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी सास को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
- फोटो : demo
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ललितपुर। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दहेज हत्या में पति को दोषी पाते हुए सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी सास को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
आठ वर्ष पूर्व 27 जुलाई 2008 को जखौरा थाना क्षेत्र के बांसी में संगीता पत्नी राकेश खटीक की जलकर मौत हो गई थी। इस मामले में मृतका के पिता लाखन खटीक निवासी बिजावर जिला छतरपुर ने जखौरा पुलिस को पुत्री की दहेज के लिए हत्या करने की तहरीर दी थी। 31 जुलाई को जखौरा पुलिस ने मृतका के पति नरेश खटीक व सास कलाबाई को आरोपी बनाया था। वादी लाखन ने बताया था कि उसकी बेटी संगीता की शादी नरेश से वर्ष 2006 में हुई थी। शादी के बाद से ही नरेश व उसकी मां दहेज के लिए पुत्री को प्रताड़ित करने लगे थे। अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर कई बार संगीता को उन्होंने पांच हजार व दस हजार रुपये दिए, लेकिन इससे भी पति व सास ने संगीता को परेशान करना नहीं छोड़ा। कुछ दिन बाद नरेश ने नौकरी के लिए जरूरी 50 हजार रुपये अपने मायके से लाने का दबाव संगीता पर डाला, लेकिन संगीता के मना करने पर उसके साथ मारपीट की गई। संगीता ने पूरे मामले की जानकारी अपने मायके में दी। पुत्री के साथ मारपीट की घटना सुनकर लाखन ने बांसी जाकर अपनी पुत्री को साथ ले जाने की बात कही, लेकिन पति व सास ने उसे भेजने से मना कर दिया।
27 जुलाई 2008 को लाखन को फोन पर पुत्री के जलने से मौत की सूचना दी गई। पीड़ित की तहरीर पर दर्ज मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) हरकेश कुमार ने आरोपी पति नरेश को दोषी मानते हुए सात वर्ष की कारावास व चार हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर तीन माह की साधारण कारावास की सजा होगी। वहीं, सास कलाबाई को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। मामले की पैरवी शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने की।
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आठ वर्ष पूर्व 27 जुलाई 2008 को जखौरा थाना क्षेत्र के बांसी में संगीता पत्नी राकेश खटीक की जलकर मौत हो गई थी। इस मामले में मृतका के पिता लाखन खटीक निवासी बिजावर जिला छतरपुर ने जखौरा पुलिस को पुत्री की दहेज के लिए हत्या करने की तहरीर दी थी। 31 जुलाई को जखौरा पुलिस ने मृतका के पति नरेश खटीक व सास कलाबाई को आरोपी बनाया था। वादी लाखन ने बताया था कि उसकी बेटी संगीता की शादी नरेश से वर्ष 2006 में हुई थी। शादी के बाद से ही नरेश व उसकी मां दहेज के लिए पुत्री को प्रताड़ित करने लगे थे। अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर कई बार संगीता को उन्होंने पांच हजार व दस हजार रुपये दिए, लेकिन इससे भी पति व सास ने संगीता को परेशान करना नहीं छोड़ा। कुछ दिन बाद नरेश ने नौकरी के लिए जरूरी 50 हजार रुपये अपने मायके से लाने का दबाव संगीता पर डाला, लेकिन संगीता के मना करने पर उसके साथ मारपीट की गई। संगीता ने पूरे मामले की जानकारी अपने मायके में दी। पुत्री के साथ मारपीट की घटना सुनकर लाखन ने बांसी जाकर अपनी पुत्री को साथ ले जाने की बात कही, लेकिन पति व सास ने उसे भेजने से मना कर दिया।
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27 जुलाई 2008 को लाखन को फोन पर पुत्री के जलने से मौत की सूचना दी गई। पीड़ित की तहरीर पर दर्ज मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) हरकेश कुमार ने आरोपी पति नरेश को दोषी मानते हुए सात वर्ष की कारावास व चार हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर तीन माह की साधारण कारावास की सजा होगी। वहीं, सास कलाबाई को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। मामले की पैरवी शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने की।