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Etawah News: चंबल के बीहड़ में बढ़ रहा तेंदुआ का कुनबा
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चकरनगर। चंबल सेंचुरी क्षेत्र में तेंदुओं की चहलकदमी बढ़ी है। बीहड़ से सटे गांवों के आसपास इनकी लगातार मौजूदगी देखी जा रही है। वन विभाग इसे एक शुभ संकेत मान रहा है। अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए जैसी संरक्षित प्रजाति की संख्या में वृद्धि पर्यावरण के अनुकूल होने का प्रमाण है। यह वृद्धि पर्यावरणीय संतुलन की वापसी का संकेत है।
सेंचुरी क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या पिछले एक दशक से लगातार बढ़ रही है। स्थानीय किसानों के अनुसार चंबल और यमुना के बीहड़ों में करीब तीस जोड़े तेंदुए और उनके बच्चे निवास कर रहे हैं। ये तेंदुए आदमखोर नहीं हैं और इंसानों से डरकर दूर भाग जाते हैं। इनका मुख्य आहार गाय, बकरी और अन्य छोटे मवेशी हैं। अन्य हिंसक जानवरों की संख्या घटने से ये शिकार की तलाश में गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार सेंचुरी क्षेत्र में लगाए गए प्रतिबंधों और वन्यजीव संरक्षण प्रयासों से यह प्रजाति फिर से फल-फूल रही है।
चंबल सेंचुरी डीएफओ आरुषि मिश्रा ने बताया कि तेंदुओं की संख्या में वृद्धि की सूचनाएं लगातार मिल रही हैं। हालांकि अभी इनकी औपचारिक गणना नहीं की गई है पर यह जरूर है कि चहलकदमी पहले से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि मुरोंग से लेकर पचनदा तक लगभग 115 गांव सेंचुरी क्षेत्र में आते हैं। इनमें मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकथाम अभियान के तहत जंगलों में अकेले न जाने, रात में पशुओं को खुले में न बांधने और टॉर्च या ढोलक के सहारे शोर करने जैसी सलाह दी जा रही हैं।
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सेंचुरी क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या पिछले एक दशक से लगातार बढ़ रही है। स्थानीय किसानों के अनुसार चंबल और यमुना के बीहड़ों में करीब तीस जोड़े तेंदुए और उनके बच्चे निवास कर रहे हैं। ये तेंदुए आदमखोर नहीं हैं और इंसानों से डरकर दूर भाग जाते हैं। इनका मुख्य आहार गाय, बकरी और अन्य छोटे मवेशी हैं। अन्य हिंसक जानवरों की संख्या घटने से ये शिकार की तलाश में गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार सेंचुरी क्षेत्र में लगाए गए प्रतिबंधों और वन्यजीव संरक्षण प्रयासों से यह प्रजाति फिर से फल-फूल रही है।
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चंबल सेंचुरी डीएफओ आरुषि मिश्रा ने बताया कि तेंदुओं की संख्या में वृद्धि की सूचनाएं लगातार मिल रही हैं। हालांकि अभी इनकी औपचारिक गणना नहीं की गई है पर यह जरूर है कि चहलकदमी पहले से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि मुरोंग से लेकर पचनदा तक लगभग 115 गांव सेंचुरी क्षेत्र में आते हैं। इनमें मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकथाम अभियान के तहत जंगलों में अकेले न जाने, रात में पशुओं को खुले में न बांधने और टॉर्च या ढोलक के सहारे शोर करने जैसी सलाह दी जा रही हैं।
