यूपी: तीखी धूप और ज्यादा तापमान बदल रहा है बुंदेलखंड की किस्मत, बढ़ा सौर ऊर्जा उत्पादन; खुलेगा नया प्लांट
Solar Energy in UP: बीते एक महीने से यूपी के बुंदेलखंड में आने वाले जिलों में पड़ रही तीखी धूप अब वरदान बनकर उभरी है। यहां सौर ऊर्जा का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।
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विस्तार
बुंदेलखंड इन दिनों भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। कुछ दिनों से यहां पारा लगातार 46 डिग्री के पार बना हुआ है। लोगों के लिए चिलचिलाती धूप और गर्म हवाएं मुसीबत बनी हुई हैं। लेकिन, इसका दूसरा और सुखद पहलू भी है। अलसुबह से ही तीखी धूप का सीधा फायदा बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा उत्पादन को मिल रहा है। अकेले मई में यहां सौर ऊर्जा उत्पादन करीब 20 फीसदी बढ़ गया है। इतना ही नहीं यहां 70 मेगावाट का नया प्लांट भी शुरू कर दिया गया है। अगले माह तक कई नए प्लांट शुरू होंगे।
कभी जल संकट और पलायन के लिए पहचाना जाने वाला बुंदेलखंड आज सौर ऊर्जा उत्पादन की बदौलत पूरे प्रदेश में चमक रहा है। बुंदेलखंड में करीब 25 हजार एकड़ जमीन पर सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित कर दिए गए हैं। इसमें ज्यादातर जमीन बंजर है। यहां अभी तक 885 मेगावाट यूटिलिटी स्केल सौर पावर परियोजना में उत्पादन हो रहा है। मई 2026 में इसमें करीब 17 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह 336 मेगावाट की ओपेन एक्सेस सौर परियोजनाओं में भी करीब छह मेगावाट की वृद्धि हुई है।
लंबे समय तक धूप मिलने से फायदा
यूपीनेडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेंद्र कुमार बताते हैं कि करीब 20 फीसदी वृद्धि की वजह सुबह छह बजे से पहले सूर्योदय और शाम छह बजे के बाद सूर्यास्त होना है। गर्मी के मौसम में लंबे समय तक सूर्य की किरणें मिलने से भरपूर उत्पादन हो रहा है। हालांकि, दोपहर के वक्त तापमान 40 डिग्री से अधिक हो जाता है तो उत्पादन प्रभावित होता है। यदि तापमान 40 डिग्री से कम या उसके आसपास बना रहे तो सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि का आंकड़ा 30 फीसदी तक जा सकता है।
पारा अचानक न बढ़े तो फायदा ज्यादा
जालौन में निजी कंपनी के सौर ऊर्जा प्लांट के इंजीनियर सौरभ सिंह के मुताबिक सर्दी में सात बजे के बाद उत्पादन शुरू होता है। अगर कोहरा हो तो ज्यादा असर पड़ता है। गर्मी में साढ़े पांच बजे से धूप हो जाती है तो उत्पादन जल्दी शुरू होता है और देर शाम तक होता है। अगर दोपहर में पारा 40 डिग्री से नीचे रहे तो ज्यादा फायदा मिलेगा।
ज्यादा तापमान में कम उत्पादन की वजह
यूपीनेडा के विशेषज्ञ बताते हैं कि सोलर पैनल सिलिकॉन जैसे सेमीकंडक्टर (अर्धचालक) पदार्थों से बनते हैं। जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो इनकी कार्यक्षमता कम होने लगती है। सोलर सेल्स में इलेक्ट्रॉन्स उत्तेजित हो जाते हैं जिससे बिजली का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता है। अगर तापमान 25 से 35 डिग्री के बीच रहता है तो फायदा सर्वाधिक मिलता है। सुबह और शाम को इसी मानक के आसपास तापमान मिल रहा है। ऐसे में उत्पादन भरपूर हो रहा है।
कबरई से 70 मेगावाट का उत्पादन शुरू
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-2 परियोजना के तहत कबरई का 220 केवी उपकेंद्र शुरू हो गया है। यहां से मंगलवार को निजी कंपनी के सोलर प्लांट से पहली बार 70 मेगावाट सौर ऊर्जा की आपूर्ति की गई। उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थापित हो रहे 4000 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांटों से ऊर्जा निकासी के लिए 5400 करोड़ की लागत से कुल 21 विद्युत केंद्र बन रहे हैं। इनमें 10 विद्युत उपकेंद्र चालू किए जा चुके हैं।
यह हमारे लिए उपलब्धि
चरखारी, डकोर, बांगरा, बमौर, बिरधा, जैतपुर, हमीरपुर, बांदा और मड़ावरा उपकेंद्र जल्द हो जाएंगे। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-2 परियोजना के तहत पहली बार सोलर प्लांट से हरित ऊर्जा की सफल निकासी शुरू होना प्रदेश की विद्युत व्यवस्था के लिए उपलब्धि है।-मयूर महेश्वरी, प्रबंध निदेशक, यूपी पीपीटीसीएल
प्रदेश में वर्ष 2026-27 का लक्ष्य
सोलर पार्क की क्षमता 14 हजार मेगावाट
रूफटॉप सोलर (आवासीय) 4500 मेगावाट
रूफटॉप सरकारी (वाणिज्यिक) 1500 मेगावाट
पीएम कुसुम योजना (सोलर पंप) 2000 मेगावाट
अभी सौर ऊर्जा उत्पादन 2876 मेगावाट
बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा उत्पादन की स्थिति
336 मेगावाट ओपेन एक्सेस सौर पावर परियोजना में उत्पादन
394 मेगावाट ओपेन एक्सेस सौर पावर परियोजना में उत्पादन की तैयारी
7800 मेगावाट की पावर परियोजना पाइप लाइन में हैं
अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क की स्थिति
बुंदेलखंड में अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क के तहत 3840 मेगावाट की स्वीकृति है। इसमें 430 मेगावाट का उत्पादन हो रहा है, जबकि 3410 मेगावाट पर काम चल रहा है।