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Jammu News: जम्मू यूनिवर्सिटी में बदलने जा रहा पढ़ाई का तरीका, बनी नई फैकल्टी
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जम्मू। जम्मू यूनिवर्सिटी अब पढ़ाई को सिर्फ पारंपरिक डिग्री और क्लासरूम तक सीमित रखने के बजाय उसे स्किल, रिसर्च और रोजगार से जोड़ने जा रही है। विवि की अकादमिक काउंसिल ने ट्रांस-डिसिप्लिनरी स्टडीज फैकल्टी को मंजूरी दे दी है। इसके जरिये छात्र अपनी रुचि और करियर की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग विषय चुनकर पढ़ सकेंगे। फैकल्टी मौजूदा डिजाइन योर डिग्री मॉडल को बड़ा और स्थायी ढांचा देगी।
अभी यह व्यवस्था एक कार्यक्रम की तरह चल रही थी लेकिन अब इसे अलग फैकल्टी के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि बदलते रोजगार बाजार और नई चुनौतियों के दौर में सिर्फ एक विषय की पारंपरिक पढ़ाई काफी नहीं रह गई है। इसी वजह से विज्ञान, तकनीक, समाजशास्त्र, कॉमर्स और स्किल से जुड़े विषयों को मिलाकर पढ़ाई की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत स्कूल ऑफ ट्रांस-डिसिप्लिनरी स्टडीज और स्किल इन्क्यूबेशन, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेंटर को शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने माना है कि मौजूदा सेंटर मॉडल बढ़ते दायरे और नई जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं रह गया था। इसी वजह से अलग फैकल्टी बनाने का फैसला लिया गया। अलग डीन, फैकल्टी बोर्ड, बोर्ड ऑफ स्टडीज और रिसर्च बोर्ड होंगे। इसके लिए अलग शिक्षकों की नियुक्ति, संसाधनों और बजट की व्यवस्था भी की जाएगी। विश्वविद्यालय इसे नई शिक्षा नीति के तहत बड़े बदलाव के रूप में देख रहा है।
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फैकल्टी को पीजी और पीएचडी स्तर तक ले जाने की तैयारी
छात्रों को कंपनियों और संस्थानों से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिलेगा ताकि वे सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें बल्कि वास्तविक समस्याओं को समझकर काम भी कर सकें। विश्वविद्यालय पढ़ाई के साथ स्टार्टअप, रिसर्च और नए आइडिया को भी बढ़ावा देने की तैयारी में है। छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही आइडिया पर काम करने और उन्हें आगे ले जाने का मौका देने की योजना है। साथ ही फैकल्टी को पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी स्तर तक ले जाने की योजना बनाई जा रही है। अकादमिक मामलों के डीन प्रोफेसर जेपी जूरेल का कहना है कि इससे छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और उन्हें बदलते समय की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने में मदद मिलेगी।
अभी यह व्यवस्था एक कार्यक्रम की तरह चल रही थी लेकिन अब इसे अलग फैकल्टी के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि बदलते रोजगार बाजार और नई चुनौतियों के दौर में सिर्फ एक विषय की पारंपरिक पढ़ाई काफी नहीं रह गई है। इसी वजह से विज्ञान, तकनीक, समाजशास्त्र, कॉमर्स और स्किल से जुड़े विषयों को मिलाकर पढ़ाई की जाएगी।
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नई व्यवस्था के तहत स्कूल ऑफ ट्रांस-डिसिप्लिनरी स्टडीज और स्किल इन्क्यूबेशन, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेंटर को शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने माना है कि मौजूदा सेंटर मॉडल बढ़ते दायरे और नई जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं रह गया था। इसी वजह से अलग फैकल्टी बनाने का फैसला लिया गया। अलग डीन, फैकल्टी बोर्ड, बोर्ड ऑफ स्टडीज और रिसर्च बोर्ड होंगे। इसके लिए अलग शिक्षकों की नियुक्ति, संसाधनों और बजट की व्यवस्था भी की जाएगी। विश्वविद्यालय इसे नई शिक्षा नीति के तहत बड़े बदलाव के रूप में देख रहा है।
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