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जेल में खायीं ढेर सारी नशे की गोलियां, दे दी जान

ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा Updated Fri, 18 Mar 2016 12:07 AM IST
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ड्रग्‍स - फोटो : Azeem Ansari
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बुधवार रात को जेल में एक हवालाती ने आत्महत्या करने के लिए अधिक मात्रा में नशीली गोलियां खा ली। जेल प्रशासन हवालाती की हालत को देखकर इसे नाटक समझता रहा लेकिन घंटेभर बाद जब हवालाती बेसुध होकर नीचे गिर गया तो उसे उठाकर अस्पताल ले जाया गया। सामान्य अस्पताल के डॉक्टरों ने उसकी हालत देखकर उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। जहां कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। हवालाती मोहम्मद अली पशु तस्करी मामले में जेल में बंद था।

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जानकारी के अनुसार यूपी के जिला मुरादाबाद निवासी मोहम्मद अली को डबवाली सदर पुलिस ने नवंबर 2015 को पशु तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। तब से मोहम्मद अली की जमानत के लिए कोई भी नहीं आया था। जिसके चलते वह परेशान रहने लगा। बुधवार रात को उसने जेल में अधिक मात्रा में नशीली गोलियां खा लीं जिससे उसकी हालत बिगड़ गई।
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अन्य हवालातियों ने इसकी जानकारी जेल अधीक्षक जेएस सेठी को दी, लेकिन मोहम्मद अली की हालत को एक ड्रामा समझा जाता रहा। अधिकारी कहने लगे ये शातिर व्यक्ति है और हालत खराब होने का ड्रामा कर रहा है। घंटेभर बाद जब मोहम्मद अली बेसुध होकर नीचे गिर गया, तब जाकर जेल अधिकारी हरकत में आए और उसे उठाकर सामान्य अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने उसे अग्रोहा रेफर कर दिया गया। वहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

कहां से आई नशीली गोलियां
जांच अधिकारी प्रदीप कुमार का कहना है कि डॉक्टरों का कहना है कि हवालाती मोहम्मद की मौत नशीली गोलियां के कारण हुई है। मामला गंभीर है क्योंकि जेल में हवालाती के पास नशीली गोलियां आई कहां से। इसकी जांच की जाएगी। गौरतलब है कि सिरसा जेल में नशे का कारोबार काफी ज्यादा हो गया है। कुछ समय पहले जेल में आधा किलो अफीम मिली थी। इसके अलावा मोबाइल फोन मिलने का सिलसिला लगातार चल रहा है। जेल सूत्रों के अनुसार जेल के अंदर अधिकारियों अनुमति के बिना एक सुई तक नहीं जा सकती। हर सामान की बारिकी से जांच के उपरांत उसे अंदर भेजा जाता है। कुछ अधिकारियों की जेल बंद कैदियों से मिली भगत होती है। नशे की गोलियों से लेकर अफीम, गांजा, चरस व मोबाइल फोन भिजवाया जाता है। कैदी नशीले पदार्थ बेचकर मोटी कमाई करते है और इसका आधा से ज्यादा हिस्सा अधिकारियों व उनके खास कर्मचारियों की जेब में जाता है। जेल में मोबाइल भिजवाने की एवज में 20 से 25 हजार रुपये वसूल किए जाते हैं।

900 बंदियों की जिम्मेदारी एक सिपाही पर
जेल में करीब 900 बंदी है। चौंकाने वाली बात है कि इनकी निगरानी के लिए दिन के समय तो तीन से चार वार्डन होते है और रात को मात्र एक सिपाही। जेल सूत्रों के अनुसार एक सिपाही परिसर की निगरानी नहीं रख सकता। अगर बैरक में कुछ हो भी जाता है तो सिपाही के पास बैरकों की चाबी तक नहीं होती। शाम को बैरकों के बंद होते ही चाबियां डोडी में जमा करवा दी जाती हैं। बिना अधिकारियों की अनुमति के चांबी कोई नहीं ले सकता। ऐसे में बैरक में कुछ भी घटना हो जाए चाबी लेने में ही आधा घंटा लग जाता है। सूत्रों के अनुसार जेल अधिकारी वार्डनों से अपना निजी कार्य करवाते रहते हैं। कागजों में ड्यूटी जेल परिसर में होती है और काम अधिकारियों के घर में किया जाता है।

जस्टिस मलिक करेंगे जेल का दौरा
जस्टिस रामेश्वर मलिक शुक्रवार सुबह जेल का निरीक्षण करेंगे। वे जेल में बंद हवालातियों व कैदियों से मिलकर उनकी शिकायतें सुनेंगे। इसके अलावा जस्टिस मलिक जेल में कैदियों को दी जाने वाली सुविधाओं का जायजा भी लेंगे। उसके साथ जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिमलेश तंवर, उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ भी होंगे।

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