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कोसली : हर घर में सैनिक, हर दिल में देशभक्ति
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 26 May 2026 06:03 PM IST
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कोसली गांव में बना शहीद स्मारक। संवाद
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जगदीश यादव
रेवाड़ी। कोसली गांव को यदि मिनी छावनी कहा जाए तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि इस गांव की पहचान ही सैन्य परंपरा और राष्ट्रसेवा से जुड़ी है। यहां लगभग हर घर से कम से कम एक व्यक्ति भारतीय सेना या अर्धसैनिक बलों में देश की सेवा कर रहा है। यह गांव देश के उन चुनिंदा गांवों में शामिल है जहां सैन्य सेवा को जीवन का हिस्सा माना जाता है।
कोसली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां से 100 से अधिक अधिकारी वर्तमान में भी विभिन्न सैन्य सेवाओं में कार्यरत हैं। इसके अलावा कई जवान देश की सुरक्षा में तैनात हैं। गांव की यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही हैं जिसने इसे पूरे प्रदेश में अलग पहचान दी है।
इतिहास में भी कोसली गांव का नाम गौरव के साथ दर्ज है। यहां के नायब कमांडेंट राम नारायण को वर्ष 1924 में राय बहादुर की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उनका पैतृक घर लगभग 40 वर्षों तक ऑफिसर मेस के रूप में उपयोग किया गया। एडवोकेट संजय यादव ने बताया कि इस गांव के वीर सैनिकों ने 1857 की क्रांति से लेकर प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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प्रथम विश्व युद्ध में अकेले कोसली गांव से 247 सैनिकों ने भाग लिया था। स्वतंत्रता के बाद हुए सभी प्रमुख सैन्य अभियानों में भी इस गांव के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। कोसली की यही परंपरा इसे पूरे क्षेत्र में विशेष बनाती है। यहां एक कहावत भी प्रचलित है कि घर-घर में फौजी, गली-गली में सरदार। यह कहावत इस गांव की सैन्य पहचान और गौरवशाली इतिहास को पूरी तरह दर्शाती है।
इंसेट
गांव से जुड़े कई वीर सपूतों ने देश का नाम किया रोशन
गांव से जुड़े कई वीर सपूतों ने देश का नाम रोशन किया है। इनमें ब्रिगेडियर राज सिंह (एमबीसी, डीसीएम 1967), सूबेदार जयकरण (कीर्ति चक्र, नाथूला), कर्नल बरू भान (शौर्य चक्र), मेजर शैलेंद्र सिंह (शौर्य चक्र), मेजर उमराव सिंह (मिलिट्री क्रॉस, 1940) और कप्तान शिव सहाय (सरदार बहादुर, ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश इंडिया, 1940) प्रमुख हैं। सूबेदार निहाल सिंह (एएसएम 1918) भी इसी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा रहे हैं।
इंसेट
5 हजार से अधिक लोग सेना और अर्धसैनिक बलों में सेवा दे रहे:
सूबेदार महेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 की जनसंख्या के अनुसार कोसली गांव की आबादी लगभग 22 हजार है जबकि मतदाताओं की संख्या 8 हजार से अधिक है। यह गांव शिक्षा, प्रशासन और सैन्य सेवाओं तीनों क्षेत्रों में अग्रणी माना जाता है। यहां के कई लोग दिल्ली विश्वविद्यालय में डीन, सेना में जनरल और पुलिस में आईजी जैसे उच्च पदों पर भी कार्यरत रह चुके हैं। 4 हजार घरों वाले इस गांव से 5 हजार से अधिक लोग सेना और अर्धसैनिक बलों में सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा 120 से अधिक अधिकारी उच्च पदों पर कार्यरत हैं तथा 50 से अधिक कर्नल, ब्रिगेडियर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सेवानिवृत्त होकर भी समाज में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
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लोक आस्था और परंपरा पर आधारित मान्यता
सूबेदार सतवीर सिंह ने बताया कि स्थानीय मान्यताओं के अनुसार वर्ष 1193 में मठाधीश बाबा मुक्तेश्वर पुरी महाराज ने इस क्षेत्र को आशीर्वाद दिया था जिसके बाद यहां बस्ती का विकास हुआ। ग्रामीणों में यह विश्वास प्रचलित है कि उनके आशीर्वाद के कारण इस गांव के सैनिकों ने कई युद्धों में भाग लेने के बावजूद भारी क्षति से बचाव पाया। हालांकि यह एक लोक आस्था और परंपरा पर आधारित मान्यता है।
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कोसली गांव की पहचान ही देशभक्ति और सैन्य सेवा से है। यहां हर परिवार से युवा सेना में जाकर देश की सेवा करना गर्व की बात मानते हैं। गांव के वीर सैनिकों ने हमेशा देश का नाम रोशन किया है।-संजय यादव
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चार बेटे हैं। चारों ही बेटे फौज में हैं। मुझे इस बात का काफी गर्व होता है कि बेेटे देश की सेवा कर रहे हैं। देश की सेवा किसी भी रूप में करना बड़ी बात होती है।- सूबेदार महेंद्र सिंह
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40 साल सेना में रहा हूं। देश में पहला गांव ऐसा है जिसमें हर घर से सेना में भर्ती है। हमारे लिए गर्व की बात है। गांव के गौरवशाली परंपरा से आने वाली पीढि़यों सीखेंगी।-गुरुदत्त, कोसली
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एक बेटा था। बेटा आकाश वायु सेना में पायलट था। बेटा एयर क्रैश में शहीद हो गया था। मुझे इस बात का गर्व है कि बेटे ने देश की रक्षा के दौरान अपना बलिदान दिया।-सूबेदार सतबीर सिंह
रेवाड़ी। कोसली गांव को यदि मिनी छावनी कहा जाए तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि इस गांव की पहचान ही सैन्य परंपरा और राष्ट्रसेवा से जुड़ी है। यहां लगभग हर घर से कम से कम एक व्यक्ति भारतीय सेना या अर्धसैनिक बलों में देश की सेवा कर रहा है। यह गांव देश के उन चुनिंदा गांवों में शामिल है जहां सैन्य सेवा को जीवन का हिस्सा माना जाता है।
कोसली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां से 100 से अधिक अधिकारी वर्तमान में भी विभिन्न सैन्य सेवाओं में कार्यरत हैं। इसके अलावा कई जवान देश की सुरक्षा में तैनात हैं। गांव की यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही हैं जिसने इसे पूरे प्रदेश में अलग पहचान दी है।
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इतिहास में भी कोसली गांव का नाम गौरव के साथ दर्ज है। यहां के नायब कमांडेंट राम नारायण को वर्ष 1924 में राय बहादुर की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उनका पैतृक घर लगभग 40 वर्षों तक ऑफिसर मेस के रूप में उपयोग किया गया। एडवोकेट संजय यादव ने बताया कि इस गांव के वीर सैनिकों ने 1857 की क्रांति से लेकर प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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प्रथम विश्व युद्ध में अकेले कोसली गांव से 247 सैनिकों ने भाग लिया था। स्वतंत्रता के बाद हुए सभी प्रमुख सैन्य अभियानों में भी इस गांव के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। कोसली की यही परंपरा इसे पूरे क्षेत्र में विशेष बनाती है। यहां एक कहावत भी प्रचलित है कि घर-घर में फौजी, गली-गली में सरदार। यह कहावत इस गांव की सैन्य पहचान और गौरवशाली इतिहास को पूरी तरह दर्शाती है।
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गांव से जुड़े कई वीर सपूतों ने देश का नाम किया रोशन
गांव से जुड़े कई वीर सपूतों ने देश का नाम रोशन किया है। इनमें ब्रिगेडियर राज सिंह (एमबीसी, डीसीएम 1967), सूबेदार जयकरण (कीर्ति चक्र, नाथूला), कर्नल बरू भान (शौर्य चक्र), मेजर शैलेंद्र सिंह (शौर्य चक्र), मेजर उमराव सिंह (मिलिट्री क्रॉस, 1940) और कप्तान शिव सहाय (सरदार बहादुर, ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश इंडिया, 1940) प्रमुख हैं। सूबेदार निहाल सिंह (एएसएम 1918) भी इसी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा रहे हैं।
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5 हजार से अधिक लोग सेना और अर्धसैनिक बलों में सेवा दे रहे:
सूबेदार महेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 की जनसंख्या के अनुसार कोसली गांव की आबादी लगभग 22 हजार है जबकि मतदाताओं की संख्या 8 हजार से अधिक है। यह गांव शिक्षा, प्रशासन और सैन्य सेवाओं तीनों क्षेत्रों में अग्रणी माना जाता है। यहां के कई लोग दिल्ली विश्वविद्यालय में डीन, सेना में जनरल और पुलिस में आईजी जैसे उच्च पदों पर भी कार्यरत रह चुके हैं। 4 हजार घरों वाले इस गांव से 5 हजार से अधिक लोग सेना और अर्धसैनिक बलों में सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा 120 से अधिक अधिकारी उच्च पदों पर कार्यरत हैं तथा 50 से अधिक कर्नल, ब्रिगेडियर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सेवानिवृत्त होकर भी समाज में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
लोक आस्था और परंपरा पर आधारित मान्यता
सूबेदार सतवीर सिंह ने बताया कि स्थानीय मान्यताओं के अनुसार वर्ष 1193 में मठाधीश बाबा मुक्तेश्वर पुरी महाराज ने इस क्षेत्र को आशीर्वाद दिया था जिसके बाद यहां बस्ती का विकास हुआ। ग्रामीणों में यह विश्वास प्रचलित है कि उनके आशीर्वाद के कारण इस गांव के सैनिकों ने कई युद्धों में भाग लेने के बावजूद भारी क्षति से बचाव पाया। हालांकि यह एक लोक आस्था और परंपरा पर आधारित मान्यता है।
कोसली गांव की पहचान ही देशभक्ति और सैन्य सेवा से है। यहां हर परिवार से युवा सेना में जाकर देश की सेवा करना गर्व की बात मानते हैं। गांव के वीर सैनिकों ने हमेशा देश का नाम रोशन किया है।-संजय यादव
चार बेटे हैं। चारों ही बेटे फौज में हैं। मुझे इस बात का काफी गर्व होता है कि बेेटे देश की सेवा कर रहे हैं। देश की सेवा किसी भी रूप में करना बड़ी बात होती है।- सूबेदार महेंद्र सिंह
40 साल सेना में रहा हूं। देश में पहला गांव ऐसा है जिसमें हर घर से सेना में भर्ती है। हमारे लिए गर्व की बात है। गांव के गौरवशाली परंपरा से आने वाली पीढि़यों सीखेंगी।-गुरुदत्त, कोसली
एक बेटा था। बेटा आकाश वायु सेना में पायलट था। बेटा एयर क्रैश में शहीद हो गया था। मुझे इस बात का गर्व है कि बेटे ने देश की रक्षा के दौरान अपना बलिदान दिया।-सूबेदार सतबीर सिंह