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Rewari News: उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची ज्वालामुखी चोटी पर लहराएगा भारत का तिरंगा
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 26 May 2026 05:13 PM IST
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नरेंद्र सिंह यादव
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोसली। नेहरूगढ़ गांव निवासी युवा पर्वतारोही नरेंद्र सिंह यादव उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची ज्वालामुखी चोटी माउंट पिको डी ओरिजाबा पर एक अंतरराष्ट्रीय अभियान का नेतृत्व करेंगे।
अभियान एनएसवाई आउटडोर के तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा जो भारत की अग्रणी पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों की संस्था के रूप में वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त पहचान बना चुकी है। नरेंद्र सिंह यादव ने अपने महत्वाकांक्षी वोल्कैनिक समिट्स प्रोजेक्ट की औपचारिक शुरुआत कर दी है जिसके अंतर्गत वे विश्व के प्रमुख ज्वालामुखी पर्वतों पर भारत का तिरंगा फहराने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
मेक्सिको में स्थित माउंट पिको डी ओरिजाबा उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची ज्वालामुखी चोटी है। लगभग 5,636 मीटर (18,491 फीट) ऊंची यह चोटी अपने खतरनाक ग्लेशियर मार्ग, अत्यधिक ठंड, तेज बर्फीली हवा और कठिन तकनीकी चढ़ाई के लिए विश्वभर के पर्वतारोहियों के बीच प्रसिद्ध है। इस पर्वत पर तापमान कई बार शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच जाता है, जहां शरीर का सामान्य संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
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सबसे बड़ी चुनौती ऊंचाई पर ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी
ऊंचाई पर ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी है जिसके कारण पर्वतारोहियों को गंभीर हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, सांस लेने में कठिनाई, तेज सिरदर्द और शरीर की ऊर्जा में अचानक गिरावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त पर्वतारोहियों को 40 से 60 डिग्री तक की खड़ी बर्फीली ढलानों पर क्रैम्पोन, आइस एक्स और रस्सियों के सहारे आगे बढ़ना पड़ता है, जहां एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।
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ओरिजाबा का मौसम अत्यंत अप्रत्याशित
माउंट पिको डी ओरिजाबा का मौसम अप्रत्याशित माना जाता है। कुछ ही मिनटों में साफ आसमान भीषण बर्फीले तूफान में बदल सकता है। व्हाइट आउट कंडीशन, ब्लैक आइस, ग्लेशियर क्रेवास और हिमस्खलन का खतरा इस अभियान को और अधिक जोखिमपूर्ण बना देता है। तेज हवाएं कई बार पर्वतारोहियों को संतुलन बनाए रखने तक में कठिनाई उत्पन्न कर देती हैं। यही कारण है कि इस पर्वत को केवल शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, धैर्य और उच्च तकनीकी कौशल की परीक्षा माना जाता है।
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भारत से मेक्सिको के लिए रवाना हो चुके नरेंद्र
नरेंद्र सिंह यादव मंगलवार को भारत से मेक्सिको के लिए रवाना हो चुके हैं। सात दिन तक चलने वाले अभियान में विश्व के विभिन्न देशों के अनुभवी पर्वतारोही भाग लेंगे। बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय अभियान का नेतृत्व एक भारतीय पर्वतारोही द्वारा किया जाना पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह ऐतिहासिक अभियान केवल पर्वतारोहण की उपलब्धि नहीं होगा, बल्कि यह भारत के साहस, आत्मविश्वास और अटूट संकल्प का वैश्विक प्रतीक बनेगा।
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सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफल आरोहण कर चुके
विश्व की सर्वोच्च चोटियों तक पहुंचने वाले नरेंद्र सिंह यादव सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफल आरोहण करने वाले भारत के पहले युवा पर्वतारोही हैं। उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर दो सफल आरोहण किए हैं। 12 वर्ष की आयु में पर्वतारोहण की शुरुआत करने वाले नरेंद्र अब तक 23 विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुके हैं। दिसंबर 2024 में उन्होंने 30 वर्ष और 10 दिन की आयु में सेवन समिट्स पूर्ण कर भारत के सबसे कम उम्र के पुरुष सेवन समिट्स पर्वतारोही बनकर इतिहास रचा।
कोसली। नेहरूगढ़ गांव निवासी युवा पर्वतारोही नरेंद्र सिंह यादव उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची ज्वालामुखी चोटी माउंट पिको डी ओरिजाबा पर एक अंतरराष्ट्रीय अभियान का नेतृत्व करेंगे।
अभियान एनएसवाई आउटडोर के तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा जो भारत की अग्रणी पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों की संस्था के रूप में वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त पहचान बना चुकी है। नरेंद्र सिंह यादव ने अपने महत्वाकांक्षी वोल्कैनिक समिट्स प्रोजेक्ट की औपचारिक शुरुआत कर दी है जिसके अंतर्गत वे विश्व के प्रमुख ज्वालामुखी पर्वतों पर भारत का तिरंगा फहराने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
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मेक्सिको में स्थित माउंट पिको डी ओरिजाबा उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची ज्वालामुखी चोटी है। लगभग 5,636 मीटर (18,491 फीट) ऊंची यह चोटी अपने खतरनाक ग्लेशियर मार्ग, अत्यधिक ठंड, तेज बर्फीली हवा और कठिन तकनीकी चढ़ाई के लिए विश्वभर के पर्वतारोहियों के बीच प्रसिद्ध है। इस पर्वत पर तापमान कई बार शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच जाता है, जहां शरीर का सामान्य संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
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ऊंचाई पर ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी है जिसके कारण पर्वतारोहियों को गंभीर हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, सांस लेने में कठिनाई, तेज सिरदर्द और शरीर की ऊर्जा में अचानक गिरावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त पर्वतारोहियों को 40 से 60 डिग्री तक की खड़ी बर्फीली ढलानों पर क्रैम्पोन, आइस एक्स और रस्सियों के सहारे आगे बढ़ना पड़ता है, जहां एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।
ओरिजाबा का मौसम अत्यंत अप्रत्याशित
माउंट पिको डी ओरिजाबा का मौसम अप्रत्याशित माना जाता है। कुछ ही मिनटों में साफ आसमान भीषण बर्फीले तूफान में बदल सकता है। व्हाइट आउट कंडीशन, ब्लैक आइस, ग्लेशियर क्रेवास और हिमस्खलन का खतरा इस अभियान को और अधिक जोखिमपूर्ण बना देता है। तेज हवाएं कई बार पर्वतारोहियों को संतुलन बनाए रखने तक में कठिनाई उत्पन्न कर देती हैं। यही कारण है कि इस पर्वत को केवल शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, धैर्य और उच्च तकनीकी कौशल की परीक्षा माना जाता है।
भारत से मेक्सिको के लिए रवाना हो चुके नरेंद्र
नरेंद्र सिंह यादव मंगलवार को भारत से मेक्सिको के लिए रवाना हो चुके हैं। सात दिन तक चलने वाले अभियान में विश्व के विभिन्न देशों के अनुभवी पर्वतारोही भाग लेंगे। बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय अभियान का नेतृत्व एक भारतीय पर्वतारोही द्वारा किया जाना पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह ऐतिहासिक अभियान केवल पर्वतारोहण की उपलब्धि नहीं होगा, बल्कि यह भारत के साहस, आत्मविश्वास और अटूट संकल्प का वैश्विक प्रतीक बनेगा।
सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफल आरोहण कर चुके
विश्व की सर्वोच्च चोटियों तक पहुंचने वाले नरेंद्र सिंह यादव सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफल आरोहण करने वाले भारत के पहले युवा पर्वतारोही हैं। उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर दो सफल आरोहण किए हैं। 12 वर्ष की आयु में पर्वतारोहण की शुरुआत करने वाले नरेंद्र अब तक 23 विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुके हैं। दिसंबर 2024 में उन्होंने 30 वर्ष और 10 दिन की आयु में सेवन समिट्स पूर्ण कर भारत के सबसे कम उम्र के पुरुष सेवन समिट्स पर्वतारोही बनकर इतिहास रचा।