Mukesh Ambani: 'यह भारत का दशक है, वैश्विक चुनौतियां नए सिरे से सोचने का मौका', बोले मुकेश अंबानी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा दशक भारत का है और ऐसा किसी संयोग नहीं बल्कि हमारी दृढ़ इच्छा और भरोसे के कारण है। उन्होंने यह बातें कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में कही है। वार्षिक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रिलायंस का मुनाफा 10 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। आइए इस बारे में विस्तार से पढ़ें।
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विस्तार
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) की वार्षिक रिपोर्ट में कई अहम बातों का खुलासा किया है। उन्होंने दुनिया भर में हो रहे बदलावों को भारत के लिए एक नए अवसर के रूप में देखने की वकालत की है। इसके साथ ही, एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए रिलायंस वित्त वर्ष 2026 में 10 अरब डॉलर का सालाना शुद्ध मुनाफा कमाने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई है। मौजूदा समय में कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 18.26 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
बदलाव कोई चुनौती नहीं, बल्कि एक बड़ा अवसर
मुकेश अंबानी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में वैश्विक उद्योग पीढ़ियों में होने वाले सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने इस दौर को परेशानी का नाम देने के बजाय इसे नई संभावनाओं के रूप में देखा है। उनके अनुसार, उद्योगों, तकनीक और देशों के बीच की सीमाएं अब नए सिरे से तय की जा रही हैं।
अंबानी ने बताया कि ग्लोबल सप्लाई चेन में काफी बदलाव हो रहा है, ऊर्जा के स्वरूप में परिवर्तन तेज हो गया है, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) व डेटा का तेजी से बढ़ता उपयोग आधुनिक दुनिया का पूरा ढांचा बदल रहा है। उन्होंने बड़े गर्व के साथ कहा, "यह भारत का दशक है- और यह किसी संयोग से नहीं, बल्कि हमारी पसंद और दृढ़ विश्वास का नतीजा है"।
रिलायंस इंटेलिजेंस के जरिए एआई पर बड़ा दांव
आने वाले भविष्य को ध्यान में रखते हुए, रिलायंस ने रिलायंस इंटेलिजेंस नाम से एक नई कंपनी की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत को चंद हाथों तक सीमित रखने के बजाय इसका लोकतांत्रीकरण करना है।
अंबानी ने बताया कि वे भारत में ही डिज़ाइन और स्केल की गई सॉवरेन एआई क्षमताएं विकसित करना चाहते हैं, ताकि इसका फायदा हर आम भारतीय नागरिक, छोटे-बड़े उद्यम और संस्थाओं को मिल सके। इसके साथ ही, वे जियो को वैश्विक डिजिटल क्रांति में सबसे आगे रखना चाहते हैं, जिसके तहत कनेक्टिविटी, एआई, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं पर खास जोर दिया जाएगा।
ग्रीन एनर्जी और अन्य प्रमुख सेक्टर्स में तेजी
डिजिटल क्रांति के अलावा ऊर्जा क्षेत्र में भी रिलायंस बड़ा दांव खेल रही है। गुजरात के जामनगर स्थित 'धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स' के जरिए रिलायंस भारत को स्वच्छ, सुरक्षित और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। कंपनी सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी स्टोरेज और ग्रीन एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रही है, ताकि भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
इसके अतिरिक्त, खुदरा व्यापार में रिलायंस रिटेल और रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के जरिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत किया जा रहा है और भारतीय ब्रांड्स को सशक्त बनाया जा रहा है। ऊर्जा के बदलते वैश्विक स्वरूप को देखते हुए कंपनी का 'ऑयल-टू-केमिकल्स' (ओटूसी) बिजनेस भी लगातार खुद को बदल रहा है और अब उच्च-मूल्य वाले मटीरियल और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार हो रहा है।
लगातार छठे वर्ष सैलरी नहीं लेने का फैसला
अरबपति मुकेश अंबानी ने लगातार छठे वर्ष कोई वेतन नहीं लेने का फैसला किया है। नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने वित्त वर्ष 2021 से कोई वेतन नहीं लिया है। कंपनी ने कहा, "इसका मतलब है कि लगातार छह वर्षों से उन्हें न तो वेतन, न भत्ते, न ही विशेष लाभ, न ही सेवानिवृत्ति लाभ, न ही कमीशन और न ही स्टॉक विकल्प मिल रहे हैं।"
हालांकि, आरआईएल का बाजार पूंजीकरण ₹18.26 लाख करोड़ है। आरआईएल के बाजार मूल्य के आधार पर, प्रवर्तकों की कुल संपत्ति 9.1 लाख करोड़ रुपये है। पिछले एक वर्ष में शेयर की कीमत में 4.3% की गिरावट आई है।
अब आगे क्या?
कुल मिलाकर, मुकेश अंबानी का यह दृष्टिकोण साफ करता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज बदलावों से घबराने के बजाय उन्हें भुनाने की रणनीति पर काम कर रही है। अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति और एआई से लेकर ग्रीन एनर्जी तक के व्यापक विजन के साथ, कंपनी न केवल भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में अपना योगदान देना चाहती है, बल्कि आने वाले समय में ग्लोबल लीडर बनने की पूरी तैयारी कर चुकी है।