Fraud: अधिक मुनाफे की चाह में फंसे निवेशकों के करोड़ों रुपये, धोखाधड़ी के आरोप में दो कंपनियों पर केस दर्ज
बंगलूरू पुलिस ने मोबिक्विक एक्स्ट्रा स्कीम के जरिए निवेशकों के करोड़ों रुपये फंसाने के आरोप में फिनटेक कंपनियों मोबिक्विक और लेंडबॉक्स पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पूरी खबर पढ़ें।
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ज्यादा मुनाफे और आसान निकासी का लालच देकर निवेशकों का पैसा फंसाने के आरोप में बंगलूरू पुलिस ने दो बड़ी फिनटेक कंपनियों पर शिकंजा कसा है। बंगलूरू की वर्थुर पुलिस ने गुड़गांव स्थित फिनटेक कंपनियों- 'ट्रांजैक्ट्री टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' (लैंडबॉक्स) और 'वन मोबिक्विक सिस्टम्स लिमिटेड' (मोबिक्विक)- के खिलाफ धोखाधड़ी और निवेशकों के फंड के गलत इस्तेमाल का मामला दर्ज किया है। यह पूरा मामला मोबिक्विक एक्स्ट्रा इन्वेस्टमेंट स्कीम से जुड़ा है, इसमें देशभर के सैकड़ों निवेशकों के करोड़ों रुपये फंसने की आशंका है।
क्या है मोबिक्विक एक्स्ट्रा स्कीम और कैसे फंसे निवेशक?
पुलिस के मुताबिक, इन कंपनियों ने अपनी 'मोबिक्विक एक्स्ट्रा' स्कीम का जमकर प्रचार किया था। निवेशकों को यह लालच दिया गया था कि यह योजना फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की तरह ही सुरक्षित है, जिसमें अच्छे रिटर्न के साथ-साथ जब चाहे तब पैसा निकालने (लिक्विडिटी) की सुविधा मिलेगी। इन लुभावने वादों पर भरोसा करके लोगों ने निवेश तो कर दिया, लेकिन बाद में कंपनियों ने बिना निवेशकों की सहमति के पैसे निकालने पर रोक लगा दी और वे अपने ही पैसे नहीं निकाल पाए।
शिकायतों में क्या-क्या आरोप लगे हैं?
पुलिस के पास मुख्य रूप से दो निवेशकों ने शिकायत दर्ज कराई है, जिससे इस बड़े फर्जीवाड़े का अंदेशा हुआ है:
- पहली शिकायत: 14 मई को अर्जीत सिंह बेंचोर नामक निवेशक ने अपनी शिकायत में बताया कि प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश किए गए उनके लगभग चार लाख रुपये ब्लॉक कर दिए गए हैं और वे उन्हें नहीं निकाल पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों का उल्लंघन करते हुए निवेशकों के पैसे को डायवर्ट (गलत जगह इस्तेमाल) किया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि इस योजना में देशभर के 630 से अधिक निवेशकों के छह करोड़ रुपये से ज्यादा फंसे हो सकते हैं।
- दूसरी शिकायत: मयंक डे नामक एक अन्य निवेशक ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने मोबिक्विक और लेंडबॉक्स के जरिए तीन लाख रुपये का निवेश किया था, जिसमें से 91,341 रुपये अभी भी ब्लॉक हैं। उनकी शिकायत के अनुसार, देश भर में 420 से अधिक निवेशकों का करीब 5.93 करोड़ रुपये इस योजना के तहत अटका हो सकता है।
फर्जी खातों का खुलासा और पुलिस की कार्रवाई
पहली शिकायत में 5 मई की एक 'बॉरोअर मैपिंग रिपोर्ट' और लेंडर वेरिफिकेशन का भी हवाला दिया गया है। इससे यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस स्कीम से जुड़े कई उधारकर्ताओं के खाते या तो निष्क्रिय हो चुके हैं या डिफाल्टर हो गए हैं, लेकिन निवेशकों का पैसा अब भी आरोपी कंपनियों से जुड़े खातों में फंसा हुआ है। शिकायतकर्ता ने कंपनियों के बैंक खातों को फ्रीज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
साल 2009 में शुरू हुई मोबिक्विक मुख्य रूप से एक डिजिटल वॉलेट और मोबाइल पेमेंट प्लेटफॉर्म है जो यूपीआई पेमेंट और बिल भुगतान जैसी सुविधाएं देती है। फिलहाल पुलिस ने निवेशकों की इन शिकायतों के आधार पर आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 319(2) और 318(4) के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब लेन-देन से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड्स की गहराई से जांच कर रही है, जिसके बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।