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नासिक कुंभ की इन बातों को जानकर हैरान होंगे आप

ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार Updated Sun, 06 Sep 2015 07:21 PM IST
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देश के चार कुंभ नगरों में नासिक ही अकेला ऐसा क्षेत्र है, जहां कुंभ मेला दो अलग-अलग नगरों में होता है।
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देश-विदेश के श्रद्धालु एक से दूसरे नगर जाकर कुंभ की दृश्यावली का आनंद लेते हैं। शायद यही कारण है कि हरिद्वार और प्रयाग के कुंभ जैसे झगड़े नासिक में कभी नहीं हुए। जहां तक हरिद्वार का सवाल है यहां अनेक कुंभ मेले हिंसक होते आए हैं। कई शताब्दियों में कभी बैरागी और संन्यासी तो कभी संन्यासी और निर्मलों के बीच संघर्ष हुए हैं।

हरिद्वार के कुंभ मेलों पर मुगल जागीरदारों ने भी आक्रमण किए हैं। हरिद्वार कुंभ में खुद साधुओं के बीच भीषण हिंसा होती आई है। बैरागियों और संन्यासी के संघर्ष के कारण कई कुंभ मेलों पर बैरागियों ने हरिद्वार और प्रयाग जाना छोड़ दिया था। इसी लिए बैरागियों का कुंभ आज तक भी एक पर्व के लिए वृंदावन में लगता है।
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उज्जैन में भी संघर्षों का इतिहास मौजूद है। तैमूर लंग ने हरिद्वार कुंभ के अवसर पर अपनी सेना के साथ साधुओं पर चढ़ाई कर उन्हें लहूलुहान कर दिया था। नासिक में कभी झगड़ा नहीं हुआ। कारण स्पष्ट है। नासिक कुंभ गोदावरी के किनारे नासिक और त्र्यंबकेश्वर दो स्थानों पर लगता है। दोनों के बीच अच्छा-खासा फासला है।

10 अखाड़े त्र्यंबकेश्वर और तीन अखाड़े नासिक में डेरे जमाकर स्नान करते हैं। दो अलग-अलग स्थानों पर कुंभ लगने से संतों के बीच कोई टकराव नहीं होता। नासिक के इतिहास में अखाड़ों के संघर्ष की एक भी घटना विद्यमान नहीं है।

कुंभ में उठी प्रज्ञा भारती को रिहा करने की आवाज

सिंहस्थ कुंभ में कंप्यूटर बाबा के आश्रम में संतों ने प्रज्ञा भारती को रिहा करने की मांग उठाई। षड्दर्शन साधु मंडल के अध्यक्ष महंत गरीबदास ने कहा कि यदि प्रज्ञा भारती दोषी हैं तो उन्हें अब तक सजा क्यों नहीं दी गई। यदि उन पर कोई दोष नहीं है तो उन्हें जेल में क्यों रखा गया है।

नारको टेस्ट करा लिए जाने के बावजूद प्रज्ञा भारती को जेल में रखना न्याय के साथ अन्याय है। देश के हिंदू इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा, महंत नृसिंह दास, महंत पवनसुतदास आदि ने भी विचार रखे।

विहिप बैठक में पहुंचे अवधेशानंद गिरि
जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि नासिक में चल रही विश्व हिंदू परिषद की बैठक में पहुंचे। प्रवीण भाई तोगड़िया सहित विहिप के अनेक नेताओं ने बैठक में भाग लिया। अवधेशानंद ने अध्यात्म और हिंदू समाज से जुड़े अनेक मसलों पर चर्चा की।

सैकड़ों भक्तों के साथ आनंद गिरि त्र्यंबकेश्वर में
पंजाब की बागडोर संभालने वाले जूना अखाड़े के श्रीमहंत आनंद गिरि अपने सैकड़ों भक्तों के साथ त्र्यंबकेश्वर पहुंचे। अखाड़े की छावनी में उनका स्वागत बैंड-बाजों के साथ किया गया।

धुल जाते हैं पाप
जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर मां सुनीतानंद गिरि ने त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड में स्नान करने के बाद कहा कि यहां आने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। गोदावरी का यह तट परम पूज्य है। काल सर्प दोष और पितृ दोष से पीड़ित जन यदि इस घाट पर कुंभ स्नान कर ले तो उनके समस्त पाप मिट जाएंगे।

सच्चे रास्ते पर चले समाज
निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर महेशानंद गिरि ने त्र्यंबकेश्वर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सच्ची जिंदगी जीने के लिए सच्चा रास्ता भी जरूरी है। मनुष्य को कर्म और वाणी से एक रहना चाहिए। वाणी संयम तथा विवेक व्यक्ति को महान बनाते हैं।
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