दारोगा पर हमला कर पिस्टल लूटने के मामले में मुठभेड़ को लेकर पुलिसकर्मियों की पीठ थपथपाने वाले अफसरों ने मामले की नजाकत को समझते हुए खुद को अलग कर लिया, लिहाजा लिखापढ़ी में शामिल पुलिसकर्मी ही अकेले खडे़ रह गए।
इनमें से कई तो ऐसे थे, जो सिर्फ अवार्ड पाने की चाह में मुठभेड़ टीम में शामिल हुए।
तब की थी अफसरों ने हौसलाअफजाई
लाडपुर में रणवीर को मुठभेड़ में मार गिराने के समय जिले के अफसरों ने मौके पर पहुंचकर पुलिस टीम की हौसलाअफजाई की थी।
तत्कालीन एसएसपी अमित सिन्हा, कार्यवाहक एसपी सिटी निलेश आनंद भरणे, सीओ डालनवाला अजय सिंह मौके पर गए थे। बाद में वहां आए आईजी एमए गणपति तो मीडिया से बिना बात कहे ही लौट आए थे।
बड़े अधिकारियों पर दर्ज नहीं हुआ मुकदमा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो हत्या का मुकदमा दर्ज होने के साथ एसएसपी सिन्हा को यहां से रुखसत होना पड़ा था। पुलिस विभाग में निचले स्तर के पुलिसकर्मी ही लपेटे में आने को लेकर काफी नाराजगी रही।
उस समय के अधिकारी रैंक के एक पायदान आगे बढ़ गए, लेकिन आरोपी पुलिसकर्मी तिहाड़ जेल में अपनी जिदंगी का एक-एक पल गिनने को मजबूर हैं।
रणबीर कांड में तीन हुए मुकदमे
पहला मुकदमा
डालनवाला कोतवाली में जीडी भट्ट की तरफ से दर्ज किया गया था, जिसमें रणवीर और उसके साथियों पर हमला कर सर्विस रिवाल्वर लूटने का था।
दूसरा मुकदमा
लाडपुर में हुई मुठभेड़ में रणवीर को मारने का दूसरा मुकदमा पुलिस की तरफ से रायपुर थाने में दर्ज किया गया था।
तीसरा मुकदमा
तीसरा मुकदमा रणवीर के पिता की तरफ से दर्ज किया गया था। रविन्द्र पाल सिंह द्वारा दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि पुलिस ने पहले रणवीर को जबरन उठाया और फिर फर्जी मुठभेड़ दिखाकर उसकी हत्या कर दी।