सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Iran rejects trumps mandatory abraham accords expansion iranian envoy mohammad fathali

ईरान ने ठुकराया ट्रंप का अनिवार्य अब्राहम समझौता: क्षेत्रीय शांति पर नया संकट, तेहरान-अमेरिका के बीच बढ़ी तल्खी

एएनआई, तेहरान/ नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 29 May 2026 11:40 PM IST
विज्ञापन
सार
LinksIndexing - Best SEO Indexing Tool

ईरान ने अमेरिका की ओर से अब्राहम समझौते को थोपने की कोशिशों को खारिज करते हुए इसे अव्यवहारिक बताया है। क्षेत्रीय देशों के हितों और जमीनी हकीकतों को दरकिनार कर बनाया गया कोई भी शांति ढांचा ईरान को स्वीकार्य नहीं है। ईरान ने और क्या-क्या कहा है? जानिए...
 

Iran rejects trumps mandatory abraham accords expansion iranian envoy mohammad fathali
मोहम्मद फतहाली, भारत में ईरान के राजदूत - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अब्राहम समझौते के जबरन विस्तार की कोशिशों को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने साफ किया है कि कोई भी शांति समझौता बाहरी दबाव के बजाय जमीनी हकीकत पर आधारित होना चाहिए। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने चेतावनी दी है कि बिना किसी ठोस भू-राजनीतिक आधार के थोपे गए समझौते सफल नहीं होंगे।


ट्रंप का फरमान और ईरान की दो टूक
हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक लंबी पोस्ट साझा की थी। इसमें उन्होंने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन जैसे मुस्लिम देशों के लिए अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य बताया था। ट्रंप इसे तेहरान के साथ जारी गुप्त वार्ताओं के बीच एक 'महासमझौते' के रूप में देख रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


राजदूत फतहाली ने एएनआई से बात करते हुए इस अमेरिकी दृष्टिकोण की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिरता बाहरी ताकतों की ओर से निर्मित नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया की सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है जब वहां की सरकारें आपस में सहयोग करें। उन्होंने इन समझौतों को शांति के बजाय केवल दिखावे का प्रोजेक्ट करार दिया। ईरान का मानना है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देश भी इस अमेरिकी दबाव से असहज हैं।
विज्ञापन
Trending Videos


परमाणु समझौते की राह में अमेरिका बना रोड़ा?
एक तरफ ट्रंप इस विस्तार को युद्धविराम की पूर्व शर्त बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने कड़ा रुख अपनाया है। अराघची ने कहा कि अमेरिका को अपना विरोधाभासी रुख छोड़ना होगा। ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी के साथ फोन पर बातचीत के दौरान अराघची ने कहा कि ईरान अपने वैध अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही इस कूटनीतिक प्रक्रिया में 60 दिनों के एक समझौता ज्ञापन पर चर्चा हो रही है। इस समझौते के तहत ईरान को उच्च संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने और परमाणु हथियारों की दौड़ से बाहर रहने की प्रतिबद्धता जतानी होगी। इसके बदले में अमेरिका ईरान की नौसैनिक घेराबंदी खत्म करने और उसकी जब्त संपत्ति को मुक्त करने पर चर्चा करेगा। हालांकि, ईरान ने ओमान को धमकाने और विरोधाभासी बयान देने के लिए अमेरिका की आलोचना की है।

यह भी पढ़ें: US-Iran Negotiations: ईरान परमाणु समझौते पर बड़ा फैसला लेने की तैयारी में ट्रंप, व्हाइट हाउस में हुई अहम बैठक

होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान की भूमिका
इस पूरे विवाद में ओमान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। ईरान ने ओमान के सिद्धांतवादी रुख की सराहना की है, जबकि अमेरिका ने ओमान को ईरान के साथ टोलिंग सिस्टम में शामिल होने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, बाद में बेसेंट ने यह भी बताया कि ओमान ने अमेरिका को आश्वस्त किया है कि उसकी ऐसी कोई योजना नहीं है। वर्तमान में ट्रंप इस पूरे मसले पर व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में एक आपातकालीन बैठक करने की तैयारी कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed