सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarkashi News ›   चिन्यालीसौड़वासियों के लिए नासूर बनती जा रही टिहरी बांध परियोजना की झील

चिन्यालीसौड़वासियों के लिए नासूर बनती जा रही टिहरी बांध परियोजना की झील

Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 05 Mar 2019 10:11 PM IST
विज्ञापन
चिन्यालीसौड़वासियों के लिए नासूर बनती जा रही टिहरी बांध परियोजना की झील
विज्ञापन
चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)। राष्ट्रहित में ऊर्जा उत्पादन के लिए बनी टिहरी बांध परियोजना की झील चिन्यालीसौड़ और आसपास के तटवर्ती गांवों के लिए नासूर बनती जा रही है। झील में डूबने से अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है। झील में पानी के उतार-चढ़ाव से यहां तटवर्ती हिस्सों में धंसाव भी बढ़ता जा रहा है। इन हालात में स्थानीय लोगों में परियोजना प्रबंधन एवं सरकार के खिलाफ आक्रोश पनप रहा है।
Trending Videos

वर्ष 2006 में बनकर तैयार हुई टिहरी बांध जल विद्युत परियोजना की झील का विस्तार धरासू चिन्यालीसौड़ तक है। इसमें चिन्यालीसौड़ ब्लाक का एक गांव जुग्याड़ा पूर्ण और 15 गांव आंशिक विस्थापन की जद में आए। झील से सटे भल्डगांव, बड़ी मणी, छोटी मणि, पंजियानी, बल्डोगी, कुमराड़ा, मुंडरासेरा, बधाणगांव, हडियाड़ी, देवीसौड़, तुल्याड़ा, नेरी, हिटारा एवं छोटी नागणी गांव के समुद्र सतह से 840 मीटर ऊंचाई तक आ रहे परिवारों को तो विस्थापित किया गया, लेकिन शेष को उनके हाल पर छोड़ दिया गया। बरसात के सीजन में यह झील धरासू पावर हाउस के मुहाने तक पूरी भरी रहती है। जबकि साल के छह महीने झील का पानी कम होने के कारण यहां दलदल पसर जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीते बारह वर्षों में तटवर्ती गांवों के आठ लोगों की इस झील में डूबने से मौत हो चुकी है। झील के पानी के उतार चढ़ाव के कारण जमीन में हो रहे पानी के रिसाव से यहां तटवर्ती हिस्सों में भूधंसाव बढ़ता जा रहा है। इससे झील से सटे खेतों और मकानों में दरारें पड़ गई हैं। इन प्रभावितों को न तो किसी तरह का मुआवजा दिया गया और न ही इनका विस्थापन किया गया। यहां तक कि झील में समाए डेढ़ दर्जन मंदिर एवं मेला स्थलों का पुनर्निर्माण भी नहीं कराया गया, जिसके चलते इन गांवों के लोगों में सरकार और टीएचडीसी के खिलाफ आक्रोश पनप रहा है।
कोट.............
टिहरी बांध झील से उत्पन्न समस्याओं को लेकर कई बार टीएचडीसी के अधिकारियों से कहा गया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। झील और दलदल तटवर्ती आबादी के लिए बड़ा खतरा है। यहां सुरक्षा इंतजाम जरूरी है। यदि टीएचडीसी इस मामले में शीघ्र कोई कार्रवाई नहीं करता है तो आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा।
-केदार सिंह रावत, विधायक यमुनोत्री क्षेत्र।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed