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Pauri News: अदालत ने तीन आरोपियों से 3.37 लाख रुपये के ऋण वसूली के आदेश दिए
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Tue, 14 Apr 2026 06:44 PM IST
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- समय पर नहीं हुआ था भुगतान, 12.95 प्रतिशत के ब्याज दर से अदा करनी होगी राशि
- सिविल जज (सी.डी) पौड़ी अमित भट्ट की अदालत ने सुनाया फैसला
पौड़ी। अदालत ने ऋण वसूली के एक मामले में उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों के खिलाफ 3.37 लाख रुपये की वसूली का आदेश दिया है। यह राशि 12.95 प्रतिशत के वार्षिक ब्याज दर से अदा करनी होगी। यह फैसला सिविल जज (सी.डी) पौड़ी अमित भट्ट की अदालत ने सुनाया है।
मामले के अनुसार बैंक शाखा प्रबंधक पौड़ी ने मेहरबान सिंह रावत निवासी चौबट्टाखाल, बीरेंद्र कुमार निवासी खंडाह व रविंद्र कुमार नौटियाल निवासी धारकोट के खिलाफ वसूली वाद दायर किया था। इसमें बैंक की ओर से बताया गया कि मेहरबान सिंह ने 3.40 लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया था जिसकी गारंटी बीरेंद्र कुमार व रविंद्र कुमार नौटियाल ने दी थी। ऋण का भुगतान 6,222 रुपये की 84 मासिक किश्तों में होना था लेकिन समय पर भुगतान नहीं किया गया।
बैंक की ओर से बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद आरोपियों ने बकाया राशि जमा नहीं की। इसके बाद बैंक को अदालत की शरण लेनी पड़ी। आरोपियों ने अदालत में दावा किया कि उन्होंने काफी रकम चुका दी है और बैंक गलत तरीके से अधिक धनराशि वसूलने का प्रयास कर रहा है। हालांकि वे अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद पाया कि बैंक का दावा सही है। इस आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों से 3,37,829 रुपये की वसूली के आदेश दिए। साथ ही यह राशि एक महीने के भीतर जमा करने को कहा।
- सिविल जज (सी.डी) पौड़ी अमित भट्ट की अदालत ने सुनाया फैसला
पौड़ी। अदालत ने ऋण वसूली के एक मामले में उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों के खिलाफ 3.37 लाख रुपये की वसूली का आदेश दिया है। यह राशि 12.95 प्रतिशत के वार्षिक ब्याज दर से अदा करनी होगी। यह फैसला सिविल जज (सी.डी) पौड़ी अमित भट्ट की अदालत ने सुनाया है।
मामले के अनुसार बैंक शाखा प्रबंधक पौड़ी ने मेहरबान सिंह रावत निवासी चौबट्टाखाल, बीरेंद्र कुमार निवासी खंडाह व रविंद्र कुमार नौटियाल निवासी धारकोट के खिलाफ वसूली वाद दायर किया था। इसमें बैंक की ओर से बताया गया कि मेहरबान सिंह ने 3.40 लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया था जिसकी गारंटी बीरेंद्र कुमार व रविंद्र कुमार नौटियाल ने दी थी। ऋण का भुगतान 6,222 रुपये की 84 मासिक किश्तों में होना था लेकिन समय पर भुगतान नहीं किया गया।
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बैंक की ओर से बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद आरोपियों ने बकाया राशि जमा नहीं की। इसके बाद बैंक को अदालत की शरण लेनी पड़ी। आरोपियों ने अदालत में दावा किया कि उन्होंने काफी रकम चुका दी है और बैंक गलत तरीके से अधिक धनराशि वसूलने का प्रयास कर रहा है। हालांकि वे अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।
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