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Kanpur: नहीं रहा चिड़ियाघर की शान ‘अजय’; 18 वर्षीय बब्बर शेर की ट्यूमर फटने से मौत, वन्यजीव प्रेमियों में शोक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Thu, 18 Jun 2026 09:55 AM IST
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सार
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Kanpur News: कानपुर चिड़ियाघर के 18 वर्षीय बब्बर की फेफड़ों में ट्यूमर फटने से मौत हो गई। अजय अपनी साथी नंदिनी के साथ चिड़ियाघर के सफल प्रजनन केंद्र का मुख्य आधार था, जिसके निधन से वन्यजीव प्रेमियों में शोक है।

Kanpur Zoo pride Ajay is no more 18 year old Asiatic lion dies after tumor rupture wildlife enthusiasts mourn
बब्बर शेर अजय की फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
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विस्तार

कानपुर प्राणी उद्यान के 18 वर्षीय नर बब्बर शेर अजय की बुधवार को मौत हो गई। पोस्टमार्टम में उसके फेफड़े के बाएं हिस्से में ट्यूमर मिला जिसके फटने से अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। सुबह हालत बिगड़ने पर चिकित्सकों की टीम ने करीब तीन घंटे तक उसका उपचार किया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।


चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार बुधवार की सुबह अजय ने खून की उल्टियां कीं और वह उठने में असमर्थ हो गया। कीपर की सूचना पर चिकित्सकों ने इलाज शुरू किया। कुछ देर बाद वह अपने पैरों पर खड़ा हो गया लेकिन फिर अचानक गिर पड़ा और लगातार दहाड़ने लगा।

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तीन डॉक्टरों ने किया पोस्टमार्टम
उसकी आवाज चिड़ियाघर में गूंजती रही।  करीब 11 बजे उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद डॉ. बिपिन सचान, डॉ. नितेश कटियार और डॉ. नासिर की टीम ने पोस्टमार्टम किया। जांच में उसके मसूड़े सफेद पाए गए और खून काफी गाढ़ा मिला। सीने का परीक्षण करने पर काफी रक्त निकला।

शेरों के कुनबे में अब नंदिनी, उमा और शंकर ही बचे
फेफड़े के बाएं हिस्से में लगभग 100 ग्राम का ट्यूमर मिला।  चिकित्सकों के अनुसार ट्यूमर फटने से खून फेफड़ों में भर गया, जिससे हृदय ने काम करना बंद कर दिया और उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव चिड़ियाघर परिसर में दफना दिया गया। अजय की मौत से बब्बर शेरों के कुनबे में अब नंदिनी, उमा और शंकर ही बचे हैं।

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2016 में रायपुर से लाया गया था जोड़ा
वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ के रायपुर से अजय और नंदिनी की जोड़ी को कानपुर चिड़ियाघर लाया गया था। उस समय नंदिनी काफी कमजोर थी और उसके जीवित रहने की संभावना कम मानी जा रही थी। वन्यजीव विशेषज्ञों की सलाह पर अमेरिका से विशेष दूध मंगाकर उसकी देखभाल की गई, जिसके बाद वह स्वस्थ हुई।

दो शावकों की मौत हो गई और एक को बचा लिया गया
वर्ष 2017 में नंदिनी ने पहली बार तीन शावकों को जन्म दिया। हालांकि दो शावकों की मौत हो गई और एक को बचा लिया गया। इसके छह माह बाद नंदिनी ने फिर दो शावकों को जन्म दिया। बाद में शंकर, उमा और सुंदरी भी परिवार का हिस्सा बने। सुंदरी को बाद में तिरुपति भेज दिया गया। अजय-नंदिनी की जोड़ी ने कानपुर चिड़ियाघर को बब्बर शेरों के सफल प्रजनन केंद्र के रूप में पहचान दिलाई।

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