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सिपाही आत्महत्या: खुशमिजाज था चंद्रमणि, साथी बोले, बातचीत से नहीं लगा वो कभी कुछ ऐसा करेगा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 21 Sep 2021 11:49 AM IST
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Chandramani was happy person, companion said, he did not think that he would ever do something like this
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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प्रयागराज में सर्विस रिवाल्वर से आत्महत्या करने वाला हेड कांस्टेबल चंद्रमणि यादव खुशमिजाज था।उसके साथ एस्कार्ट में गए साथी हेड कांस्टेबल सुरेंद्र पटेल ने बताया कि हम लोग 18 सितंबर को अजमेर सियालदाह से प्रयागराज गए थे।तब उसने कोई ऐसी बात नहीं की।उसका व्यवहार भी सामान्य था। बिल्कुल भी अंदेशा नही था कि वह आत्महत्या कर लेगा।
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उन्होंने बताया कि सोमवार को कालका एक्सप्रेस से वापस कानपुर आना था।सुबह सवा आठ बजे ट्रेन छूटनी थी।कई बार फोन लगाया लेकिन फोन नहीं उठा। जिसके बाद साथी सिपाही संजय चौबे के साथ ट्रेन में सवार हो गए।बीच रास्ते में जानकारी मिली कि चंद्रमणि ने सर्विस रिवाल्वर से खुद को गोली मार ली।
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बता दें हेड कांस्टेबल चिंतामणि यादव जीआरपी थाने में दो अगस्त 2019 से तैनात हैं चूंकि परिवार प्रयागराज में ही रहता है इसलिए उसकी एस्कार्ट में ड्यूटी भी प्रयागराज के लिए लगायी गई थी।जीआरपी इंस्पेक्टर धर्मेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक उन्हें जानकारी मिली है कि जब चिंतामणि यादव बैग लेकर स्टेशन पहुंचे तो उसी दौरान फोन पर किसी से तल्ख लहजे में बात कर रहे थे।एक साथी सिपाही को बैग देखने की बात कहकर बाथरूम चले गए और वहीं खुद को गोली मार ली। आत्महत्या के कारणों पर जांच चल रही है।

जीआरपी के क्वार्टर नंबर नौ में रहता था चंद्रमणि
सेंट्रल स्टेशन के पास जीआरपी की बैरक है।यहां क्वार्टर नंबर नौ में चंद्रमणि तीन सिपाहियों के साथ रहता था।दैनिक जागरण ने मौके पर पड़ताल की तो क्वार्टर में ताला लगा मिला।साथी सिपाहियों ने बताया कि वह सुरेंद्र पटेल और संजय चौबे के साथ एस्कार्ट ड्यूटी पर गया था।साथी सिपाहियों ने भी घटना पर आश्चर्य व्यक्त किया।बोले, वह सबसे हंसी मजाक करता रहता था।विभाग में भी उसकी छवि अच्छी थी।

छुट्टी न मिलने पर उठे सवाल
साथी सिपाहियों ने बताया कि चंद्रमणि प्रयागराज के मण्डा थाना के चतुडिहा गांव का रहने वाला था। छुट्टी न मिलने जैसी कोई बात नहीं थी क्योंकि उसकी ड्यूटी एस्कार्ट में प्रयागराज रूट पर ही थी जिससे वह ड्यूटी पूरी कर घर भी जा सकता था।परिवार के बारे में जानकारी दी कि तीन भाई हैं।बीते चुनाव में एक भाई प्रधान बना है जबकि दूसरी सरकारी सेवा में है।ऐसे में कोई आर्थिक समस्या भी नहीं है।
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