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Jalaun News: पुलिस पर फायरिंग की कोशिश, अवैध असलहा मामले में तीन को दो-दो वर्ष की कैद
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उरई। 10 वर्ष पुराने पुलिस पर फायरिंग के प्रयास और अवैध असलहा रखने के मामले में कोर्ट ने तीन दोषियों को दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही चार-चार हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
जालौन कोतवाली क्षेत्र के उपनिरीक्षक मनोज कुमार 10 अप्रैल 2016 को पुलिस टीम के साथ बंगरा रोड पर चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि छिरिया सलेमपुर गांव के पास एक बाग में तीन युवक संदिग्ध हालात में खड़े हैं और राहगीरों से लूटपाट की साजिश रच रहे हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि उनके पास अवैध हथियार हैं।
पुलिस मौके पर पहुंची तो एक बदमाश ने अपने साथियों से गोली चलाने की बात कही और पुलिस पर फायरिंग की कोशिश की। पुलिस ने चेतावनी देते हुए घेराबंदी की और मौके से दो बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि एक भाग गया।
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पुलिस पूछताछ में पकड़े गए बदमाशों ने अपने नाम शहर कोतवाली क्षेत्र के बघौरा निवासी पुष्पेंद्र जाटव, विजय बताए। तीसरे साथी का नाम गौरव बताया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पल्सर बाइक और मोबाइल फोन बरामद किया था। पूछताछ में आरोपियों ने चोरी और लूटपाट की घटनाओं में शामिल होने की बात भी स्वीकार की थी।
मामले की विवेचना उपनिरीक्षक रामप्रकाश द्वारा की गई और 29 अगस्त 2016 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई लंबी चली, जिसमें अभियोजन पक्ष ने कई गवाह पेश किए।
गुरुवार को अंतिम सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सतीश चंद्र द्विवेदी ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तीनों आरोपियों विजय दोहरे, पुष्पेंद्र जाटव और सह-आरोपी गौरव को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
जालौन कोतवाली क्षेत्र के उपनिरीक्षक मनोज कुमार 10 अप्रैल 2016 को पुलिस टीम के साथ बंगरा रोड पर चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि छिरिया सलेमपुर गांव के पास एक बाग में तीन युवक संदिग्ध हालात में खड़े हैं और राहगीरों से लूटपाट की साजिश रच रहे हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि उनके पास अवैध हथियार हैं।
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पुलिस मौके पर पहुंची तो एक बदमाश ने अपने साथियों से गोली चलाने की बात कही और पुलिस पर फायरिंग की कोशिश की। पुलिस ने चेतावनी देते हुए घेराबंदी की और मौके से दो बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि एक भाग गया।
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मामले की विवेचना उपनिरीक्षक रामप्रकाश द्वारा की गई और 29 अगस्त 2016 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई लंबी चली, जिसमें अभियोजन पक्ष ने कई गवाह पेश किए।
गुरुवार को अंतिम सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सतीश चंद्र द्विवेदी ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तीनों आरोपियों विजय दोहरे, पुष्पेंद्र जाटव और सह-आरोपी गौरव को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।