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सब्र और हक्कानियत की सीख देता है माहे मोहर्रम : अहसन मियां
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 16 Jun 2026 01:40 AM IST
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बरेली। सज्जादा दरगाह पर आयोजित गोष्ठी में दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) ने कहा कि इस महीने से मुसलमानों को सब्र और हक्कानियत (सच्चाई) की सीख मिलती है। हक के रास्ते पर चलते हुए कितनी ही दुश्वारी आए, लेकिन सब्र का दामन नहीं छोड़ना है।
उन्होंने कहा कि अमन की खुशबू और इंसानियत का नाम ही हुसैनियत है। सन 680 हिजरी में पैगंबर-ए-इस्लाम के प्यारे नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने अपना सर जालिम हुकूमत के सामने झुकने नहीं दिया, बल्कि सर कटा कर इस्लाम का परचम बुलंद कर दिया। बुराई के खिलाफ आवाज बुलंद करने का पैगाम भी कर्बला का मैदान देता है। मुसलमान इस माह शहीद-ए-कर्बला को खिराजे अकीदत पेश करने के लिए ज्यादा से ज्यादा भलाई के काम करें। पशु पक्षियों के साथ रहमदिली से पेश आए उनके लिए दाना पानी के साथ बीमार जरूरतमंद का इलाज और दवा का इंतजाम करा दे। इस मौके पर औरंगजेब नूरी, नासिर कुरैशी, शाहिद नूरी, परवेज नूरी, अजमल नूरी, हाजी जावेद, ताहिर अल्वी, मंजूर रजा,शान रजा, मुजाहिद रजा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
आज दिख सकता है मोहर्रम का चांद
बरेली। इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम है। माह-ए मुहर्रम का चांद 16 जून (मंगल) शाम को देखा जा सकता है। यदि चांद दिखा तो माह-ए मोहर्रम का आगाज 17 जून से होगा। आला हजरत दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि अजीम कुरबानी से इस्लामी साल का आखिर होता है और शहादत से नए साल की शुरुआत। हिजरी सन् का आगाज मुहर्रम महीने से होता है। इस तरह यौम-ए-आशूरा (10 वीं मुहर्रम) 26 या 27 जून को होगा।
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उन्होंने कहा कि अमन की खुशबू और इंसानियत का नाम ही हुसैनियत है। सन 680 हिजरी में पैगंबर-ए-इस्लाम के प्यारे नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने अपना सर जालिम हुकूमत के सामने झुकने नहीं दिया, बल्कि सर कटा कर इस्लाम का परचम बुलंद कर दिया। बुराई के खिलाफ आवाज बुलंद करने का पैगाम भी कर्बला का मैदान देता है। मुसलमान इस माह शहीद-ए-कर्बला को खिराजे अकीदत पेश करने के लिए ज्यादा से ज्यादा भलाई के काम करें। पशु पक्षियों के साथ रहमदिली से पेश आए उनके लिए दाना पानी के साथ बीमार जरूरतमंद का इलाज और दवा का इंतजाम करा दे। इस मौके पर औरंगजेब नूरी, नासिर कुरैशी, शाहिद नूरी, परवेज नूरी, अजमल नूरी, हाजी जावेद, ताहिर अल्वी, मंजूर रजा,शान रजा, मुजाहिद रजा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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आज दिख सकता है मोहर्रम का चांद
बरेली। इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम है। माह-ए मुहर्रम का चांद 16 जून (मंगल) शाम को देखा जा सकता है। यदि चांद दिखा तो माह-ए मोहर्रम का आगाज 17 जून से होगा। आला हजरत दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि अजीम कुरबानी से इस्लामी साल का आखिर होता है और शहादत से नए साल की शुरुआत। हिजरी सन् का आगाज मुहर्रम महीने से होता है। इस तरह यौम-ए-आशूरा (10 वीं मुहर्रम) 26 या 27 जून को होगा।