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श्रमिकों को बचाने टैंक में उतरे थे शमसाबाद के तीनों युवक
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शमसाबाद (आगरा)। गुजरात के गांधीनगर में शनिवार को हुए हादसे में मरने वाले पांच लोगों में से तीन शमसाबाद के थे। जहरीली गैस से बेहोश होकर गिरे लखनऊ के दो श्रमिकों को बचाने के लिए ये तीनों साहसी युवक टैंक में उतरे थे। ये दो भाई राजन और अनीस व उनके पड़ोसी देवेंद्र थे। जहरीली गैस से इन तीनों की जान चली गई। एक साथ तीन युवकों की मौत से शमसाबाद में मातम पसरा रहा।
मृतक राजन के ताऊ रामप्रसाद ने बताया कि आगरा निवासी अरविंद का गांधीनगर में चाट भंडार है। अरविंद कैटरिंग का भी काम करता है। शमसाबाद के मोहल्ला टोला निवासी पप्पू का लड़का अनीस भी करीब चार साल उनके साथ काम करता था। बीस दिन पहले अनीस ने अपने भाई राजन और पड़ोसी देवेंद्र को काम करने के लिए बुला लिया था। दवा फैक्टरी के सामने ही अरविंद का चाट गोदाम है। वहीं ये लोग रहते भी थे।
शनिवार को लखनऊ के दो मजदूरों को बचाने के चक्कर में राजन, अनीस और देवेंद्र की जान चली गयी। मृतक राजन और अनीस के पिता पप्पू भी मजदूरी करते हैं। पप्पू के तीन लड़के और तीन लड़कियां थी। जिनमें से दो लड़के राजन और अनीस हादसे का शिकार होकर अपनी जान गंवा बैठे। तीनों लड़कों की शादी नहीं हुई थी। वहीं देवेंद्र के पिता नहीं हैं। तीन भाइयों में सबसे बड़ा देवेंद्र ही कमाने वाला था। उसके दोनों भाई अभी छोटे हैं। उसकी मौत से मां और परिवार के अन्य लोगों की रो-रोकर हालत खराब है।
गांधीनगर हादसे में शमसाबाद के दो सगे भाइयों और पड़ोसी देवेंद्र की मौत से पूरा मोहल्ला शोक में डूबा है। राजन और अनीस की मां बिलखती पड़ी हैं। बहनें और पड़ोस की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधा रही हैं, लेकिन इस दौरान वे भी अपने आंसू नहीं रोक पा रही थीं। वहीं परिजन और आसपास के लोग शवों के आने का इंतजार कर रहे हैं। लोगों ने बताया कि सोमवार की सुबह तक शव गांव आ सकता है।
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मृतक राजन के ताऊ रामप्रसाद ने बताया कि आगरा निवासी अरविंद का गांधीनगर में चाट भंडार है। अरविंद कैटरिंग का भी काम करता है। शमसाबाद के मोहल्ला टोला निवासी पप्पू का लड़का अनीस भी करीब चार साल उनके साथ काम करता था। बीस दिन पहले अनीस ने अपने भाई राजन और पड़ोसी देवेंद्र को काम करने के लिए बुला लिया था। दवा फैक्टरी के सामने ही अरविंद का चाट गोदाम है। वहीं ये लोग रहते भी थे।
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शनिवार को लखनऊ के दो मजदूरों को बचाने के चक्कर में राजन, अनीस और देवेंद्र की जान चली गयी। मृतक राजन और अनीस के पिता पप्पू भी मजदूरी करते हैं। पप्पू के तीन लड़के और तीन लड़कियां थी। जिनमें से दो लड़के राजन और अनीस हादसे का शिकार होकर अपनी जान गंवा बैठे। तीनों लड़कों की शादी नहीं हुई थी। वहीं देवेंद्र के पिता नहीं हैं। तीन भाइयों में सबसे बड़ा देवेंद्र ही कमाने वाला था। उसके दोनों भाई अभी छोटे हैं। उसकी मौत से मां और परिवार के अन्य लोगों की रो-रोकर हालत खराब है।
गांधीनगर हादसे में शमसाबाद के दो सगे भाइयों और पड़ोसी देवेंद्र की मौत से पूरा मोहल्ला शोक में डूबा है। राजन और अनीस की मां बिलखती पड़ी हैं। बहनें और पड़ोस की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधा रही हैं, लेकिन इस दौरान वे भी अपने आंसू नहीं रोक पा रही थीं। वहीं परिजन और आसपास के लोग शवों के आने का इंतजार कर रहे हैं। लोगों ने बताया कि सोमवार की सुबह तक शव गांव आ सकता है।