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AIIMS Bilaspur: बिलासपुर एम्स में नन्हे मरीजों की बिना चीरा लगाए होगी सर्जरी, उपकरण खरीद की प्रक्रिया शुरू

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 21 Feb 2026 05:00 AM IST
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सार

पीडियाट्रिक सिस्टोयूरेथ्रोस्कोप एक अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक उपकरण है, जिसे खासतौर पर छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं के नाजुक शरीर को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

In Bilaspur AIIMS, infant patients will be treated without surgery.
एम्स बिलासपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

एम्स बिलासपुर के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में जल्द ही अत्याधुनिक पीडियाट्रिक सिस्टोयूरेथ्रोस्कोप उपलब्ध होने जा रहा है। इस आधुनिक उपकरण के आने से हिमाचल प्रदेश सहित आसपास के राज्यों के उन बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी, जो जन्मजात मूत्र रोगों, पेशाब की नली की रुकावट, संक्रमण या पथरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। अब ऐसे मरीजों और उनके अभिभावकों को उपचार के लिए बड़े शहरों का रुख करने की मजबूरी काफी हद तक कम हो जाएगी।

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पीडियाट्रिक सिस्टोयूरेथ्रोस्कोप एक अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक उपकरण है, जिसे खासतौर पर छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं के नाजुक शरीर को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसकी मोटाई लगभग 8–8.5 फ्रेंच (करीब 2.7 मिमी) होती है, जो बेहद पतली होती है। इस उपकरण की मदद से डॉक्टर बिना किसी बड़े चीरे के पेशाब के प्राकृतिक रास्ते से ही शरीर के अंदर पहुंचकर जांच और सर्जरी कर सकते हैं। इसमें लगा लगभग 1.9 मिमी टेलिस्कोप हाई-डेफिनिशन विजन प्रदान करता है, जिससे अंगों की स्पष्ट तस्वीर मिलती है और उपचार की सटीकता बढ़ती है।

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अब तक कई जटिल मामलों में बच्चों के पेट या निचले हिस्से में चीरा लगाकर ऑपरेशन करना पड़ता था, जिससे दर्द और रिकवरी का समय अधिक होता था। नई तकनीक से बिना चीरा लगाए उपचार संभव होगा, जिससे बच्चों को कम दर्द होगा और शरीर पर कोई स्थायी निशान भी नहीं रहेगा। इस तकनीक से उपचार होने पर मरीज को अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कई मामलों में बच्चे को कुछ घंटों या अगले दिन ही छुट्टी मिल सकेगी। इससे अस्पताल खर्च कम होगा और अभिभावकों की चिंता भी घटेगी।
 

विशेषज्ञों के अनुसार नवजात बच्चों में पेशाब की नली में रुकावट जैसी समस्याएं समय पर ठीक न होने पर किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। यह उपकरण ऐसे संवेदनशील मामलों में बेहद उपयोगी साबित होगा और कई बच्चों के लिए जीवन रक्षक बन सकता है। हिमाचल प्रदेश के दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों के मरीजों को अक्सर इलाज के लिए चंडीगढ़, दिल्ली या अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों में जाना पड़ता है।

एम्स बिलासपुर में यह सुविधा शुरू होने से स्थानीय स्तर पर ही उन्नत उपचार उपलब्ध होगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पीडियाट्रिक सर्जरी में सटीकता सबसे महत्वपूर्ण होती है। आधुनिक उपकरण उपलब्ध होने से डॉक्टर जटिल मामलों का भी अधिक सुरक्षित और प्रभावी उपचार कर सकेंगे, जिससे उपचार परिणाम बेहतर होंगे और बच्चों की जीवन गुणवत्ता में सुधार आएगा। एम्स बिलासपुर लगातार नई तकनीक और आधुनिक उपकरण जोड़कर हिमाचल प्रदेश को उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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