Parents Maintenance Law India: माता-पिता का साया किसी भी बच्चे के जीवन में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच होता है। बचपन से लेकर पैरों पर खड़े होने तक, पेरेंट्स अपनी हर खुशी कुर्बान कर बच्चों का भविष्य संवारते हैं। मगर आज के दौर की एक कड़वी और दर्दनाक सच्चाई यह भी है कि कई बच्चे बड़े होकर अपने ही बूढ़े माता-पिता को बोझ समझने लगते हैं। बुढ़ापे में जब उन्हें सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत होती है, तब उन्हें अपने ही घर से बेघर या प्रताड़ित कर दिया जाता है।
Senior Citizen Act: अगर बच्चे माता-पिता को घर से निकाल दें, जो जानें बूढ़ें पेरेंट्स के क्या हैं अधिकार
Rights Of Elderly Parents :अक्सर ऐसे मामले देखने को मिलता हैं जहां कुछ लोग अपने बूढ़े माता-पिता को घर से बाहर निकाल देते हैं। आइए इस लेख में समझते हैं कि वरिष्ठ बुढ़े माता-पिता के पास क्या-क्या अधिकार होते हैं।
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शिकायत दर्ज करने की आसान प्रक्रिया
- बुजुर्गों को कचहरी के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है, वे हर जिले में मौजूद 'मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल' (एसडीएम कोर्ट) में सीधे लिखित शिकायत दे सकते हैं।
- ट्रिब्यूनल में शिकायत के लिए किसी महंगे वकील की जरूरत नहीं होती, बुजुर्ग खुद या किसी सामाजिक संस्था (NGO) की मदद से अर्जी दे सकते हैं।
- कानून के मुताबिक ट्रिब्यूनल को शिकायत मिलने के 90 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना होता है, ताकि बुजुर्गों को तुरंत राहत मिले।
- अगर बच्चे ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद भी माता-पिता को गुजारा भत्ता नहीं देते या उन्हें लावारिस छोड़ देते हैं, तो उन्हें 3 महीने तक की जेल हो सकती है।
- हर पुलिस स्टेशन में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक नोडल अधिकारी होता है, जो शिकायत मिलते ही तुरंत कानूनी एक्शन लेता है।
- अगर ट्रिब्यूनल के फैसले से बुजुर्ग संतुष्ट नहीं हैं, तो वे ऊपरी अदालत में इसके खिलाफ अपील भी दायर कर सकते हैं।