गर्मियों में उन फलों-सब्जियों को खाने की सबसे ज्यादा सलाह दी जाती है जिनमें भरपूर मात्रा में पानी हो। ऐसे में तरबूज-खरबूज और खीरा सबसे अच्छा विकल्प बन जाते हैं, इनमें 80-90 प्रतिशत तक पानी होता है। पर तरबूज खाने से होने वाली दिक्कतों की जो खबरें सामने आ रही हैं, उसने लोगों को काफी डरा दिया है।
Health Risk: आखिर क्यों मौत का फल बनता जा रहा तरबूज? कहीं मिठास की लालच में तबाही तो नहीं ला रहे घर
मई के शुरुआती हफ्ते में मुंबई और अब गोरखपुर से तरबूज खाने के बाद मौत की खबरें सामने आ रही हैं। क्या वास्तव में तरबूज खाने से किसी की मौत हो सकती है? तरबूज जानलेवा क्यों साबित होता जा रहा है, आइए डायटीशियन से समझते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहले दोनों मामलों को जानिए
- इस महीने की शुरुआत में मुंबई से खबर सामने आई कि तरबूज खाने से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। परिवार ने डिनर के बाद तरबूज खाया, सुबह सबकी तबीयत खराब होने लगी और बाद में सबकी मौत हो गई। हालांकि बाद में जब तहकीकात हुई तो सामने आया कि चारों की मौत का कारण जिंक फॉस्फ़ाइड जहर था, न कि तरबूज। यह एक बहुत ही तेज चूहा मारने वाला जहर है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में पीड़ितों के शरीर के अंगों में इस जहरीले केमिकल के अंश मिले हैं। इस बात का पता लगाने के लिए जांच अभी भी जारी है कि यह जहर गलती से दिया गया था या जान-बूझकर।
- इसी तरह का दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सामने आ रहा है। खबरों के मुताबिक तरबूज खाने के बाद मैगी खाने से एक ही परिवार के 11 लोगों की हालत बिगड़ गई। सभी को उल्टी, दस्त, पेटदर्द और सांस लेने की समस्या होने लगी। सबको तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। गंभीर हालत देखते हुए डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों की हालत फूड पॉइजनिंग की वजह से बिगड़ सकती है। सही कारणों की जांच के लिए डॉक्टरों की एक टीम काम कर रही है। स्थिति अभी तक बहुत स्पष्ट नहीं है।
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
इन दोनों घटनाओं से स्पष्ट होता है कि तरबूज खाने के बाद लोगों के बीमार पड़ने या मौत के पीछे का कारण सीधे तौर पर तरबूज नहीं है। क्या तरबूज खाने से वास्तव में किसी की मौत हो सकती है? इसे समझने के लिए हमने आहार विशेषज्ञ डॉ नमृता सिंह से बातचीत की।
- डॉक्टर कहती हैं, तरबूज गर्मियों का सबसे फायदेमंद फल माना जाता है, इससे सीधे तौर पर मौत का खतरा नहीं होता।
- सोशल मीडिया पर ये भी चर्चा रही है कि तरबूज में इंजेक्शन लगाकर उसे पकाया जाता है जिससे गंभीर खतरे हो सकते हैं, असल में न तो तरबूज को इंजेक्शन लगाकर पूरा लाल करना संभव है और न ही इससे मौत होती है।
- तरबूज का छिलका उसके फल को पूरी तरह से सुरक्षित रखता है।
फिर लोगों की मौत का क्या कारण हो सकता है?
डॉक्टर बताती हैं, मुंबई वाले मामले में कारण स्पष्ट हो चुका है कि जिंक फॉस्फाइड जहर के कारण लोगों की जान गई। दूसरे मामले में जांच की जा रही है।
- तरबूज तब सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है जब उसे काटकर लंबे समय तक रख दिया जाए। इससे उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है।
- लंबे समय तक खुले में रखने से इसमें साल्मोनेला, ई-कोलाई और लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया पनप सकते हैं। ये बैक्टीरिया फूड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं।
- फूड पॉइजनिंग के गंभीर मामलों में उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन, तेज बुखार और ब्लड प्रेशर लो होने का खतरा होता है। हालांकि ये भी आमतौर पर जानलेवा नहीं माना जाता है।
- छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में संक्रमण की स्थिति गंभीर हो सकती है।
कुछ विक्रेता तरबूज को कृत्रिम तरीके से पकाते हैं या फिर इसे बेचने के लिए रंग या केमिकल का इस्तेमाल करते हैं। ये रसायन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। हालांकि इनसे भी तुरंत जान जाने का खतरा नहीं होता है। लंबे समय तक इस तरह से रसायनों के संपर्क के कारण लिवर और किडनी की समस्याएं हो सकती हैं।
तरबूज ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित होता है। कुछ लोगों में इससे एलर्जी या स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। केवल तरबूज खाने से सीधे मौत होना बेहद दुर्लभ है। ज्यादातर मामलों में असली कारण फूड पॉइजनिंग, संक्रमण, एलर्जी या पहले से मौजूद गंभीर बीमारी होती है।
क्या सावधानियां बरतें?
आहार विशेषज्ञ कहती हैं, तरबूज खाना पूरी तरह सुरक्षित फल है, यदि उसे सही तरीके से रखा और खाया जाए।
- हमेशा साफ और ताजा तरबूज ही लें। तरबूज काटने से पहले उसे पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए, इससे छिलके पर मौजूद बैक्टीरिया निकल जाते हैं।
- फल काटने के लिए साफ चाकू और बर्तन का इस्तेमाल करें।
- कटे हुए तरबूज को ज्यादा देर न रखें। यदि फल का स्वाद, रंग या गंध असामान्य लगे तो उसे फेंक दें।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।