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किसान संगठन का दावाः 10 हजार जगह हुआ चक्का जाम, कानून वापसी तक जारी रहेगा संघर्ष
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 07 Feb 2021 05:53 AM IST
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दिल्ली-आगरा हाईवे पर चक्का जाम...
- फोटो : अमर उजाला
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तीनों कृषि कानूनों के विरोध में शनिवार को तीन घंटे के देशव्यापी चक्काजाम के दौरान राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में किसान संगठन सड़कों पर उतरे। जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी सीमित स्तरों पर किसानों का प्रदर्शन हुआ। दोपहर 12 से तीन बजे तक हुए शांतिपूर्ण चक्काजाम के बाद भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार को दो अक्तूबर तक कृषि कानून वापस लेने का अल्टीमेटम दिया। गाजीपुर बॉर्डर पर टिकैत ने कहा, हम सरकार के साथ किसी दबाव में बातचीत नहीं करेंगे। सरकार को बातचीत के लिए पहले जैसा ही प्लेटफॉर्म तैयार करना होगा।
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वहीं, अखिल भारतीय किसान संघर्ष सहयोग समिति के एक सचिव अवीक साहा ने दावा करते हुए कहा, तीन घंटे के दौरान देशभर में करीब 10 हजार जगहों पर रास्ते रोके गए। इससे पहले दिन में राजस्थान के गंगानगर, हनुमानगढ़, धौलपुर और झालावाड़ सहित अनेक जगह पर किसान मुख्य सड़कों या राजमार्गों पर धरने पर बैठे। पंजाब में भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरिकलां ने कहा, हमने पंजाब के संगरूर, बरनाला, लुधियाना और बठिंडा समेत 15 जिलों के 33 स्थानों पर सड़कों पर आवाजाही रोकी।
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ज्यादातर जगहों पर किसान ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर पहुंचे। वहीं, जम्मू-कश्मीर में किसान संगठनों ने जम्मू-पठानकोट राजमार्ग पर प्रदर्शन किया। इस दौरान यहां से गुजरने वाले वाहनों को रोका गया। हरियाणा में अंबाला, सोनीपत और जींद समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हुए। किसानों ने सोनीपत में अपने ट्रैक्टर और बड़े ट्रक लगाकर ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरेल एक्सप्रेसवे बंद किया। किसान एंबुलेंस और अन्य आपात सेवा के वाहनों को जाने दे रहे थे। किसानों ने सोनीपत में कुंडली बॉर्डर के पास केजीपी-केएमपी पर जाम लगाया।
10 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रहे
दिल्ली में 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा की घटना से सबक लेते हुए पुलिस अलर्ट पर रही। एहतियातन दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार तीन घंटे के लिए बंद रहे। दिल्ली के शहीदी पार्क में प्रदर्शन कर रहे करीब 50 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। रैपिड ऐक्शन फोर्स (आरएएफ) समेत सुरक्षाबलों के जवानों ने दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बॉर्डर मोर्चा संभाला था। कोई किसान यहां नहीं पहुंचा। वहीं, यूपी में एहतियातन 144 यूपी-पीएसी कंपनी, 6 अर्द्धसैनिक कंपनी के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर तैनात किया गया था। पेट्रोलिंग और ड्रोन से नजर रखी जा रही थी।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी हुए प्रदर्शन
महाराष्ट्र के नासिक, कराड, कोल्हापुर और औरंगाबाद समेत कई जिलों में किसानों के सड़कों पर उतरने से वाहनों की आवाजाही कुछ घंटों के लिए रुकी रही। इस दौरान यहां से गुजरने वाले वाहनों को रोका गया। कराड में रास्ता रोको अभियान के तहत कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण की पत्नी सत्वशीला चव्हाण समेत 20 प्रदर्शनकारियों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया। कर्नाटक में बंगलूरू में कई लोग येलहंका पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंच और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कर्नाटक में बंगलूरू के अलावा मैसुरू, कोलार, कोप्पल, बागलकोट, तुमुकुरु, हासन, मंगलूरू, हावेरी, शिवमोगा, चिककाबल्लापुरा और अन्य जगहों पर प्रदर्शन हुए।
सिंघु, गाजीपुर और टीकरी बॉर्डर पर इंटरनेट सेवा ठप
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेशानुसार, किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए सिंघु, गाजीपुर और टीकरी बॉर्डरों और इनसे सटे इलाकों में इंटरनेट सेवा 24 घंटे के लिए शनिवार रात तक ठप रही। इन तीनों सीमाओं से सटे इलाकों में भी शनिवार रात 12 बजे तक इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगी रही।
तीनों कानून वापस ले, अन्यथा जारी रहेगा आंदोलन
हमने कानून वापस लेने के लिए सरकार को दो अक्तूबर तक का समय दिया। इसके बाद हम आगे की योजना बनाएंगे। या तो सरकार हमारी बात सुन ले, नहीं तो अगला आंदोलन ये होगा कि जिसका बच्चा फौज-पुलिस में होगा, उसका परिवार यहां रहेगा और उसका पिता अपने बेटे की तस्वीर लेकर यहां पर बैठेगा। कब तस्वीर लेकर आनी है, ये भी मैं बता दूंगा। या तो सरकार तीनों कानून वापस ले ले, एमएमसपी पर कानूनी गारंटी दे, अन्यथा यह आंदोलन जारी रहेगा और हम देश में यात्रा करेंगे। हमारा गैर राजनीतिक आंदोलन पूरे देश में होगा।
-राकेश टिकैत, प्रवक्ता भाकियू