अखिलेश का फैसलाः एक साथ 60 लाख लोगों को राहत!
बिजली कंपनियां अब जांच के दौरान ज्यादा लोड की आड़ में उपभोक्ताओं से अतिरिक्त फिक्स चार्ज की वसूली नहीं कर सकेंगी।
राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन समेत सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशक को तत्काल बिलिंग सॉफ्टवेयर में बदलाव करके टैरिफ आर्डर के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही करने का निर्देश दिया है।
आयोग के इस फैसले से प्रदेश के लगभग 60 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिली है।
अभी इस तरह होती थी वसूली
बिजली कंपनियों की ओर से चलाए जा रहे अभियान में जांच के दौरान जहां स्वीकृत से ज्यादा लोड मिलने पर 75 रुपये प्रति किलोवाट की अतिरिक्त वसूली की जा रही थी।
वहीं उनसे प्रति किलोवाट बढे़ अधिक भार पर अधिकतम मांग (एमडी) पेनल्टी के रूप में दुगना फिक्स चार्ज भी वसूला जा रहा था जो टैरिफ प्रावधानों के विपरीत था।
आयोग ने जुलाई में सभी बिजली कंपनियों को नोटिस जारी करके पूछा था कि किस कानूनी प्रावधान के तहत उपभोक्ताओं से यह वसूली की जा रही है?
आयोग ने दिया ये आदेश
बिजली कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं से गैरकानूनी तरीके से ज्यादा लोड पर अतिरिक्त फिक्स चार्ज के साथ-साथ एमडी पेनल्टी वसूलने के खिलाफ राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के आयोग के समक्ष जनहित प्रत्यावेदन दाखिल किया था।
आयोग ने इस पर गुरुवार को अपना फैसला सुनाते हुए सभी बिजली कंपनियों के एमडी को आदेश दिया है कि तत्काल अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर में बदलाव करें एवं घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए टैरिफ आर्डर के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही करें।
उपभोक्ता परिषद ने जताई खुशी
चेयरमैन देशदीपक वर्मा के निर्देश पर आयोग के सचिव ने बिजली कंपनियों से यह भी पूछा है कि जिन घरेलू उपभोक्ताओं का कनेक्टेड लोड से 75 प्रतिशत से कम लोड रिकॉर्ड किया गया है, टैरिफ आर्डर के प्रावधानों के अनुसार उन्हें क्या राहत दी गयी है? आयोग ने इस बाबत रिपोर्ट तलब की है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए आयोग के प्रति आभार जताया है। परिषद का कहना है इस आदेश से प्रदेश के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।