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धड़कन की रफ्तार घटा रहा कोरोना, रोगियों में बढ़ा हार्ट ब्लॉकेज का खतरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 31 Oct 2020 12:59 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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केस-1
50 साल के मरीज को हाई ब्लड प्रेशर था। कोराना की चपेट में आने के बाद उन्हें केजीएमयू में भर्ती किया गया। जांच में हार्ट ब्लॉक पाया गया। तत्काल आर्टिफिशियल पेसमेकर लगाया गया। इसके बाद सर्जरी कर उन्हें पेसमेकर लगाना पड़ा।
केस-2
एक डॉक्टर को 101 डिग्री बुखार आया। इसके बाद उनकी हार्ट बीट 50 से कम हो गई। उन्होंने कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह ली और तत्काल जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हालांकि, डॉक्टर को हार्ट बीट बढ़ाने वाली दवा की जरूरत नहीं पड़ी। वायरस का असर कम होने पर यह नियंत्रित होने लगी।
फेफड़ों को प्रभावित करने के साथ कोरोना दिल की धड़कन भी कम कर रहा है। सामान्य तौर पर बुखार में हार्ट बीट बढ़ जाती है, लेकिन कोरोना के तमाम मरीजों की धड़कन कम होने की शिकायत मिली है। इतना ही नहीं दिल के मरीजों में हार्ट ब्लॉकेज बढ़ने के भी लक्षण मिले हैं।
ऐसे में जिन्हें हार्ट संबंधी समस्या है, उन्हें लक्षण दिखते ही अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए। कोरोना की चपेट में आने के बाद तेज बुखार होता है। शरीर में दर्द, गले में खराश, स्वाद न आना जैसे लक्षण सामने आते हैं। वायरस का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर पड़ता है। सीटी स्कैन करने पर इसकी नसों में सिकुड़न पाई गई है।
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50 साल के मरीज को हाई ब्लड प्रेशर था। कोराना की चपेट में आने के बाद उन्हें केजीएमयू में भर्ती किया गया। जांच में हार्ट ब्लॉक पाया गया। तत्काल आर्टिफिशियल पेसमेकर लगाया गया। इसके बाद सर्जरी कर उन्हें पेसमेकर लगाना पड़ा।
केस-2
एक डॉक्टर को 101 डिग्री बुखार आया। इसके बाद उनकी हार्ट बीट 50 से कम हो गई। उन्होंने कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह ली और तत्काल जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हालांकि, डॉक्टर को हार्ट बीट बढ़ाने वाली दवा की जरूरत नहीं पड़ी। वायरस का असर कम होने पर यह नियंत्रित होने लगी।
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फेफड़ों को प्रभावित करने के साथ कोरोना दिल की धड़कन भी कम कर रहा है। सामान्य तौर पर बुखार में हार्ट बीट बढ़ जाती है, लेकिन कोरोना के तमाम मरीजों की धड़कन कम होने की शिकायत मिली है। इतना ही नहीं दिल के मरीजों में हार्ट ब्लॉकेज बढ़ने के भी लक्षण मिले हैं।
ऐसे में जिन्हें हार्ट संबंधी समस्या है, उन्हें लक्षण दिखते ही अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए। कोरोना की चपेट में आने के बाद तेज बुखार होता है। शरीर में दर्द, गले में खराश, स्वाद न आना जैसे लक्षण सामने आते हैं। वायरस का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर पड़ता है। सीटी स्कैन करने पर इसकी नसों में सिकुड़न पाई गई है।
सावधान रहें दिल के मरीज
हृदय रोग
यही वजह है कि फाइब्रोसिस का शिकार होने वाले तमाम लोग रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद भी सांस संबंधी समस्या से परेशान हैं। इस बीच यह भी जानकारी सामने आ रही है कि फेफड़े की तरह यह धड़कन को कम करता है। सामान्य मरीजों की हृदय की धड़कन 70 से 80 के बीच होती है, लेकिन वायरस की चपेट में आने वालों की हार्ट बीट 50 से भी नीचे मिली है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना कंडक्शन टिश्यू पर वार करता है, इससे भी हार्ट बीट कम हो जाती है। हालांकि, इन मरीजों की चार से छह सप्ताह बाद रिकवरी हो जाती है।
बुखार बढ़ने पर हार्टबीट बढ़ती है। हालांकि, कई ऐसे केस सामने आए हैं, जिसमें हार्टबीट कम थी और जांच में कोविड पॉजिटिव मिले। ज्यादातर मरीजों को अलग से कोई दवा देने की जरूरत नहीं पड़ती है। धीरे-धीरे उनकी रिकवरी हो जाती है। जो लोग पहले से हार्ट संबंधी दवाएं ले रहे हैं उन्हें सावधान रहने की जरूरत होती है, क्योंकि इनमें ब्लॉकेज का खतरा होता है। - डॉ. भुवन चंद्र तिवारी, विभागाध्यक्ष कार्डियोलॉजी लोहिया संस्थान
बुखार बढ़ने पर हार्टबीट बढ़ती है। हालांकि, कई ऐसे केस सामने आए हैं, जिसमें हार्टबीट कम थी और जांच में कोविड पॉजिटिव मिले। ज्यादातर मरीजों को अलग से कोई दवा देने की जरूरत नहीं पड़ती है। धीरे-धीरे उनकी रिकवरी हो जाती है। जो लोग पहले से हार्ट संबंधी दवाएं ले रहे हैं उन्हें सावधान रहने की जरूरत होती है, क्योंकि इनमें ब्लॉकेज का खतरा होता है। - डॉ. भुवन चंद्र तिवारी, विभागाध्यक्ष कार्डियोलॉजी लोहिया संस्थान
आर्टिफिशियल पेसमेकर लगाना पड़ा
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
कोविड हॉस्पिटल के आईसीयू में आने वाले उम्रदराज मरीजों की हार्ट बीट कम पाई गई है। यह देखा गया कि वायरस फेफड़े के साथ हृदय की धड़कन को भी कम कर रहा है। करीब 45 मरीजों में दो को आर्टिफिशियल पेसमेकर लगाने की जरूरत पड़ी। इनकी धड़कन 40 तक चली गई थी। कुछ मरीजों को खून पतला करने वाली दवाई भी देनी पड़ी। - डॉ. तन्मय तिवारी, केजीएमयू
मांसपेशियों में सूजन से समस्या
कोविड के उम्रदराज मरीजों में फेफड़े के साथ मांसपेशियों में भी सूजन आ जाती है। इससे हार्ट पर जोर पड़ता है। कुछ मरीजों में धड़कन कम होती है तो कुछ में बढ़ने के भी खतरे हैं। ऐसे में आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की दोनों स्तर पर लगातार निगरानी करनी पड़ रही है। कोविड में पोटेशियम भी कम होता है। यह भी हार्ट बीट कम होने की एक वजह है। - डॉ. उमेश त्रिपाठी, एसजीपीजीआई
मांसपेशियों में सूजन से समस्या
कोविड के उम्रदराज मरीजों में फेफड़े के साथ मांसपेशियों में भी सूजन आ जाती है। इससे हार्ट पर जोर पड़ता है। कुछ मरीजों में धड़कन कम होती है तो कुछ में बढ़ने के भी खतरे हैं। ऐसे में आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की दोनों स्तर पर लगातार निगरानी करनी पड़ रही है। कोविड में पोटेशियम भी कम होता है। यह भी हार्ट बीट कम होने की एक वजह है। - डॉ. उमेश त्रिपाठी, एसजीपीजीआई