यूपी बोर्ड: परीक्षा केंद्रों पर क्या इस बार होगी नकल!
नकल माफिया पर नकेल कसने के लिए बसपा राज में जिन 906 स्कूलों को काली सूची में डाला गया था उन्हें फिर से परीक्षा केंद्र बनाने की तैयारी है। इसके लिए अब दूसरा रास्ता खोज लिया गया है। तर्क दिया जा रहा है कि जिलाधिकारियों ने इन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश की है।
इसी आधार पर प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार ने विभागीय मंत्री महबूब अली को प्रस्ताव भेजा है। जबकि परीक्षा केंद्र बनाने की अंतिम तिथि 15 दिसंबर को ही बीत चुकी है।
जानकारों की मानें तो जल्द ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। ऐसे में नकल विहीन परीक्षा को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठने लगे हैं।
वर्ष 2011 में 906 स्कूलों को माध्यमिक शिक्षा परिषद ने काली सूची में डालते हुए इन्हें कम से कम तीन या पांच साल तक परीक्षा केंद्र नहीं बनाने का फैसला किया था। वर्ष 2012 व 2013 में इन्हें परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया।
इन्हीं स्कूलों को केंद्र बनाने का था दबाव
इस बार बोर्ड परीक्षा की तैयारियां शुरू होते ही इन स्कूलों को केंद्र बनाने का दबाव शुरू हो गया। प्रभारी प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा के पद से डॉ. सूर्य प्रताप सिंह को जब हटाया गया, तभी से चर्चाओं का बाजार गर्म था कि नकल माफिया के दबाव में उन्हें हटाया गया है, ताकि दागी 906 स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया जा सके।
इसलिए काली सूची में डाले जाते हैं स्कूल
सामूहिक नकल, पर्चा आउट कराने, गलत तरीके से फार्म भराकर परीक्षार्थी बैठाए जाने, प्रश्नपत्र की पैकिंग गलत तरीके से खोलने आदि का आरोप साबित होने पर जिला विद्यालय निरीक्षक काली सूची में डालने की संस्तुति करते हैं।
इसके बाद मामले को सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष रखा जाता है। समिति आरोपों की हकीकत परखने के बाद तीन से पांच साल तक के लिए स्कूलों को काली सूची में डालती है। इस अवधि में संबंधित स्कूलों को बोर्ड परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जा सकता है।
ये कहना है शिक्षा मंत्री महबूब अली का
प्रश्न- ब्लैक लिस्टेड 906 स्कूलों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया है क्या?
जवाब- कई जिलों में स्कूलों की कमी को देखते हुए जिलाधिकारियों ने डिबार स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाने का प्रस्ताव भेजा है। विभागीय स्तर पर इसका परीक्षण कराया जा रहा है। कुछ स्कूलों के मामले में हाईकोर्ट का निर्देश भी है।
इसलिए यदि किसी स्कूल में नकल की गंभीर शिकायतें नहीं हैं तो उन्हें परीक्षा केंद्र बनाने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव करेंगे। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी लगाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?
परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरा लगाने का प्रस्ताव किसी अधिकारी का नहीं, बल्कि हमारा है। जिन स्कूलों में संसाधन हैं वहां अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और जहां नहीं हैं वो इसे लगाने का प्रयास करेंगे।
ये होगी नकल रोकने की रणनीति
प्रश्न- नकल रोकने की क्या रणनीति है?
जवाब- पूरी रणनीति तैयार है। विभागीय अधिकारियों के साथ इस संबंध में बैठक भी हो चुकी है। बोर्ड परीक्षा इस बार पूरी तरह से नकल विहीन होगी।
इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नकल कराने या फिर गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।