जेल में बंद कैदी कैसे हो गए एचआईवी पॉजिटिव?
बहराइच जिला कारागार में निरुद्ध करीब 35 बंदी नशे के आदी हैं, जबकि इनमें से चार बंदियों में एचआईवी पॉजिटिव मिला है। इसका खुलासा हाल ही में जेल प्रशासन द्वारा कराए गए एचआईवी टेस्ट से हुआ है।
रिपोर्ट से सकते में आए कारागार प्रशासन ने इन नशेड़ी बंदियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से मदद मांगी है। इसी क्रम में बुधवार को उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी के प्रोग्राम अफसर व ओपियाड सब्सीट्यूशंस थेरेपी सेंटर के नोडल अधिकारी ने टीम के साथ कारागार का भ्रमण किया।
इस दौरान स्मैक व इंजेक्शन के जरिए नशा करने वाले बंदियों के इलाज की सहमति बन गई है। जिला कारागार बहराइच की बैरकों में 540 बंदियों को रखने की व्यवस्था है। लेकिन, वर्तमान में यहां सजायाफ्ता व विचाराधीन बंदियों को मिलाकर करीब 15 सौ पुरुष व महिला बंदी निरुद्ध हैं।
खास बात यह है कि इन बंदियों में से करीब 35 बंदी स्मैक या इंजेक्शन के नशे के आदी हैं। इसकी पुष्टि मानवाधिकार आयोग द्वारा निर्धारित प्रारूप पर निरुद्धीकरण के बाद कारागार चिकित्सक के परीक्षण करने पर हुई है। इनमें चार बंदी एचआईवी पॉजिटिव हैं।
जेल में नहीं इलाज का इंतजाम
जानकारी के अनुसार ये एचआईवी पॉजिटिव बंदी भी आम बंदियों के बीच ही रह रहे हैं। लेकिन जेल में इन मरीजों के इलाज के लिए जेल प्रशासन के पास कोई इंतजाम नहीं है। हालांकि, जेल प्रशासन का दावा है कि एचआईवी मरीजों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
इसका भी ख्याल रखा जा रहा है कि एचआईवी पॉजिटिव जितने मरीज हैं, वे इस बीमारी संबंधी सारी सावधानियां बरतें। जेल प्रशासन ने गत 30 सितंबर को ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. माहेश्वरी पांडेय को पत्र लिखकर नशेड़ियों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए मदद मांगी है।
जिला अस्पताल प्रशासन ने इस बाबत उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी को पत्र लिखकर अवगत कराया है। बुधवार को सोसायटी के प्रोग्राम अफसर हरमेंद्र सिंह, ओपियॉड सब्सीट्यूशंस थेरेपी सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. आरएस बर्नवाल, काउंसलर मोहम्मद अजहर व डाटा मैनेजर धर्मेंद्र ने कारागार का भ्रमण किया। नोडल अधिकारी ने जेल प्रशासन के साथ मिलकर नशेड़ियों के इलाज के इंतजाम शुरू कर दिए हैं।
जेलर सुरेश कुमार ने बताया कि डॉक्टरों की टीम ने कारागार का भ्रमण किया है। किस तरह दवाएं खिलानी है और कैसे बंदियों की काउंसलिंग होनी है, इस पर चर्चा की गई है। अगले सप्ताह फिर टीम यहां आएगी। टीम के डॉक्टर बंदियों की काउंसलिंग करेंगे और परीक्षण के बाद इलाज शुरू कर दिया जाएगा।